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July, 2007 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
आसपास की कहानियाँ ||  छींटें और बौछारें ||  तकनीकी ||  विविध ||  व्यंग्य ||  हिन्दी || 2000+ तकनीकी और हास्य-व्यंग्य रचनाएँ -

चलती रेलगाड़ी से विश्व का पहला हिन्दी चिट्ठा पोस्ट

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पिछले दिनों हिन्दी चिट्ठाजगत् में एक अनावश्यक सा विवाद हो गया था कि विश्व का हिन्दी का पहला ब्लॉ ब्लॉ ब्लॉ कौन. चलिए, एक और विवाद को मैं आगे बढ़ाता हूं. मेरी यह पोस्ट चलती रेलगाड़ी से की गई विश्व का पहला हिन्दी चिट्ठा पोस्ट है. मुझे लगता है कि रेल के उच्च अधिकारी ज्ञानेंद्र जी, जिन्हें विशिष्ट सेलून की सुविधा उपलब्ध है, उन्होंने भी अब तक चलती गाड़ी से कोई पोस्ट नहीं किया होगा. और अगर किया हो तो निःसंकोच आगे आएं और बताएं. उड़ते वायुयान से तो हमारे कई हिन्दी चिट्ठाकार बंधुओं ने कमाल दिखाए हैं – परंतु उनमें भी विवाद है. हमें अब तक ये ही नहीं पता कि उनमें से पहला कौन है! किसी ने क्लेम ही नहीं किया है! तो, इससे पहले कि कोई और क्लेम करे, मैंने यह क्लेम कर दिया. विश्व का पहला हिन्दी चिट्ठा जो तेज रफ़्तार से चलती रेलगाड़ी में लिखा गया और धीमी चलती रेलगाड़ी से पोस्ट किया गया (इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए आसपास स्टेशन/शहर होना जरूरी है). वैसे यह कोई तीर मारने वाली बात नहीं है – किसी भी लॅपटॉप में आरकनेक्ट की सुविधा मोबाइल या डाटाकार्ड के जरिये (अब टाटा इंडिकॉम में भी तथा अन्य जीपीआरएस युक्…

विश्व के शीर्ष चिट्ठाकार क्या और कैसे चिट्ठे लिखते हैं....

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(डिजिटल इंसपायरेशन में अमित अग्रवाल ने पेज-व्यू के बारे में लिखा) (प्रोब्लॉगर में डेरेन रॉस ने पेज-व्यू के बारे में लिखा) क्या आपको पता है कि विश्व के शीर्ष क्रम के चिट्ठाकार क्या और कैसे लिखते हैं? मेरा मतलब है कि वे अपना विषय कैसे चुनते हैं? कैसे वे सोचते हैं कि कौन सा विषय उनके पाठकों को सर्वाधिक आकर्षित करेगा? खासकर तब, जब वे नियमित, एकाधिक पोस्ट लिखते हैं. मैं पिछले कुछ दिनों से विश्व के कुछ शीर्ष क्रम के ब्लॉगरों (अंग्रेज़ी के) के चिट्ठों को खास इसी मकसद से ध्यानपूर्वक देखता आ रहा हूँ, और मुझे कुछ मजेदार बातें पता चली हैं जिन्हें मैं आपके साथ साझा करना चाहता हूँ. बड़े - बड़ों की कहानियाँ हथिया लें.इस बात की पूरी संभावना होती है कि शीर्ष क्रम के सारे के सारे चिट्ठाकार बड़ी कहानियों और बड़े समाचारों के बारे में चिट्ठा पोस्ट लिखें. बड़े समाचार को कोई भी शीर्ष क्रम का चिट्ठाकार छोड़ना नहीं चाहता. अब चाहे इससे पहले सैकड़ों लोगों ने उस विषय पर चिट्ठा लिख मारे हों, मगर फिर भी बड़े चिट्ठाकार उस विषय पर लिखते हैं कुछ अलग एंगल और अलग तरीके से पेश करते हुए – हालाकि वे कोई नई बात नहीं ब…

ऑफलाइनजीवी होने के टॉप #10 फ़ायदे

पिछले दिनों मुझे श्रीशजी ने गूगल पर ऑनलाइन पकड़ लिया, और आश्चर्य चकित होते हुए कहा – कि वे मुझे पहली मर्तबा ऑनलाइन देख रहे हैं. उस दिन मेरे पास दूसरा कोई विकल्प नहीं था – मैं अपने प्रीपेड मोबाइल फोन के जरिए रिलायंस आरकनेक्ट पर था और प्रतिमिनट कोई डेढ़ रुपए जेब से जा रहे थे. मैं पहले ही कोई घंटाभर विचर चुका था अतः मैंने श्रीश से माफ़ी मांगते हुए कट लिया था. आमतौर पर मैं ऑफलाइन काम करता हूँ. यह आदत तब से बनी हुई है जब इंटरनेट बेहद महंगा होता था. प्रतिमिनट इंटरनेट यूसेज चार्ज के साथ साथ टेलिफोन पल्स चार्ज का भी भुगतान करना होता था. तब दिन भर के सारे काम को एकत्र कर, सहेज कर, ई-मेल क्लाइंट पर ई-पत्रों के जवाब या फिर नए ई-पत्र लिख कर सहेज लेता था और फिर उन्हें दूसरे दिन सुबह पंद्रह मिनट या फिर बहुत हुआ तो आधा घंटा इंटरनेट पर कनेक्ट होकर सारा काम निपटा दिया करता था. सारे ईमेल, यहाँ तक कि याहू! के भी ईमेल याहू पॉप के जरिए ईमेल क्लाएंट जैसे आउटलुक पर डाउनलोड कर लेता था और फिर उनके जवाब लिख कर अगले दिन जब इंटरनेट पर कनेक्ट होता था तब भेजता था. आमतौर पर कुछ मामलों में यह आदत अब भी बनी हुई है.…

एच पी की तकनीकी अश्रेष्ठता

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कल अमितजी ने मेरे जले पर नमक छिड़क दिया था और फिर बाद में आलोकजी ने तो उस जले पर मिर्च ही बुरक दिया. उन्होंने एच पी यानी हैवलेट्ट पैकर्ड की तकनीकी श्रेष्ठता सिद्ध करने की खुद की डींग मारने वाली बात बताई तो न सिर्फ मेरा हालिया घाव हरा हो गया, बल्कि दर्द भी केंसर नुमा असहनीय हो गया. चलिए, विस्तार से बताता हूँ कि आखिर हुआ क्या था. मुझे एक लॅपटॉप की आवश्यकता फिर से महसूस हुई तो (मेरा पुराना कॉम्पेक लॅपटॉप – 33 मे.हर्त्ज, पेंटियम 386, 250 मेबा हार्ड डिस्क, 8 मेबा रैम, विंडोज 95, उस वक्त का सबसे उन्नत सिस्टम – आठ साल की अनवरत, बढ़िया सेवा देने के पश्चात् कोई दो साल पहले मर खप चुका था, और मेरी मोबिलिटी लगभग नहीं के बराबर ही थी इसीलिए आवश्यकता महसूस नहीं हो रही थी, परंतु अनूपजी से बातचीत के दौरान यह पता चला कि मोबिलिटी तो घर के भीतर भी हो सकती है - बेडरूम ड्राइंग रूम, छत आंगन - कहीं भी...) मैंने तमाम जगहों पर जानकारियों, स्पेसिफिकेशन व कीमतों को छान मारा. कई कई मर्तबा शूट आउट देखे, घंटों कंपेरिजन चार्ट देखे, दर्जनों बेस्ट बाई ऑफर देखे, बिल्ड योर लॅपटॉप साइट पर जाकर कोई दो दर्जन मर्तबा अपना …

ये स्नैपशॉट क्या है – ये स्नैपशॉट?

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ये स्नैपशॉट क्या है – ये स्नैपशॉट? अभी मैं एक कुत्ते की पांय पांय पढ़ रहा था. तो मेरा माउस जहाँ कहीं भी इधर उधर विचरता, तहाँ तहाँ पांय पांय करने लगता. कारण? कारण था एक एड ऑन – जिसका नाम है – स्नैपशॉट. मैं खिसियाया हुआ सा टिप्पणी में भौंकने वाला ही था कि – अरे! वहां भी मेरे माउस पाइंटर ने क्लिक होने से पहले ही पांय पांय करना शुरू कर दिया. फिर सोचा कि खालिस टिप्पणी से बात नहीं बनेगी. बात बिलकुल नहीं बनेगी. अभी आगे मुझे दर्जनों और चिट्ठों को पढ़ना है, और जरूरी नहीं है कि सभी मेरी उस भौंकी गई टिप्पणी को पढ़ लें. इसीलिए इस पोस्ट को लिखने का फैसला लिया. मगर, फिर ये भी जरूरी नहीं है लोगबाग इसे भी पढ़ें. और, पढ़ कर इस पर विचार कर इसे लागू कर लें ये तो और दूर की बात है. स्नैपशॉट – विचार बढ़िया है, परंतु है यह बहुत ही कष्टकारी, बहुत ही डिस्ट्रैक्टिंग, बेकार, नेटवर्क पर फ़ालतू का बोझा डालने वाला, और (मेरे जैसे) उपयोक्ता के किसी काम का नहीं. आप टिप्पणी लिखने जाते हैं – तो क्लिक करने से पहले ही यह स्वक्लिक हो जाता है और दन्न से आपके सामने टिप्पणी करने वाले विंडो का स्नैपशॉट दिखाता है. आप सन्न रह ज…

गूगल ने गूगल से कुछ कहा...

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सागर जी ने गूगल एडसेंस की मजेदार कहानी सुनाई तो मसिजीवी जी आतंकित से दिखे कि क्या वे अपने चिट्ठे पर एडसेंस दिखाना बंद कर दें? एडसेंस मिसयूज़ का किस्सा तो एडसेंस के आरंभ से ही चला आ रहा है, हालाकि अब हालात काफी कुछ सुधर गए हैं. मुझे याद आ रहा है सात आठ साल पहले का वाकया जब यहाँ रतलाम में भी किसी नेटवर्क कंपनी ने लोगों को किश्तों में पीसी बांटे थे और उन लोगों को इंटरनेट पर कुछ खास साइटों के विज्ञापनों को क्लिक करते रहने होते थे और बदले में बहुत सा पैसा मिलने का झांसा दिया गया था. उनके पीसी को हर हफ़्ते फ़ॉर्मेट किया जाता था ताकि कुकीज वगैरह से पहचान स्थापित दुबारा नहीं की जा सके. शायद तब आईपी पते से पहचानने की सुविधा नहीं जोड़ी गई रही हो. इसी बीच, हाल ही में मेरे खाते में एडसेंस रेफ़रल की सुविधा भी मिल गई. यानी कि अब मैं अपने चिट्ठों पर तीन और (हे! भगवान) गूगल विज्ञापन लगा सकता हूँ. एक अतिरिक्त तो मैंने लगा ही दिया है – सबसे नीचे पाद टिप्पणी के रूप में. मगर फिर भी, यदि आप मेरे चिट्ठों के विज्ञापनों से आतंकित दिखते हैं तो आपको आतंकित होने या अपना बीपी बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है. मेरे …

विंडोज़ विस्ता हिन्दी पर पहली नजर

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हाल ही में विंडोज़ विस्ता का हिन्दी पैक (लिप – लैंग्वेज इन्सटालर पैक) जारी किया गया है. यह एक 2.6 मेबा संस्थापना फ़ाइल है जिसे आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं. हाल ही में मैंने इस पर एक त्वरित नजर डालने की कोशिश की. यह अपने पूर्ववर्ती – विंडोज एक्सपी के हिन्दी पैक से बेहतर सुविधा वाला है. विंडोज़ एक्सपी पर एक बार हिन्दी भाषा को संस्थापित कर लेने के पश्चात् उसे वापस हटाने में मुश्किलें होती थी और आप वापस अंग्रेज़ी भाषा आसानी से नहीं ला सकते थे.इस असुविधा को विंडोज विस्ता में दूर किया गया है. आप भाषा का चयन नियंत्रण कक्ष से कर सकते हैं, और भाषा बदलने के लिए बस आपको एक रीबूट की आवश्यकता होगी. अलग-अलग प्रयोक्ता अलग-अलग भाषा रख सकते हैं, और चाहे जितनी भाषा रख सकते हैं. भाषा आसानी से निकाली (अनइंस्टाल) जा सकती है और अक्षम भी की जा सकती है. फिर भी, यह लिनक्स तंत्र की बहुभाषा सुविधा के सामने कुछ भी नहीं है – लिनक्स में आप एक ही कम्प्यूटर पर एकानेक प्रयोक्ता के रूप में एक साथ दसियों भाषाओं के वातावरण में काम कर सकते हैं और एक साथ छः भाषाओं में लॉगिन कर डेस्कटॉप वातावरण पृष्ठभूमि में चालू रख स…

कॉमबूस्ट और ऑर्ट-अटैक

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फ़ालतू की पैकिंग सामग्री की सहायता से रेखा ने जब एक बढ़िया सा गुलदान बनाया और फिर उसे घर की छत पर रखे असंख्य गमलों में उगे नन्हे-नन्हे पौधों के सुन्दर-सुन्दर फूलों से सजाया तो मुझे लगा कि इस गुलदान की सर्जनात्मकता व सुंदरता को आप सभी से बांटा जाए. इस गुलदान का एकाध फोटो यहाँ लगाकर इतिश्री करने का विचार था, मगर इसी बीच एक नए, नायाब किस्म के फोटो-अपलोड-फोटो-स्लाइड-शो सेवा – कॉमबूस्ट के बारे में पता चला तो सोचा कि चलो इसे क्यों न आजमाया जाए. गुलदान का निम्न स्लाइड शो इसी सेवा से बनाया गया है. Album powered by ComBoost zooms: 1 2 आप देखेंगे कि स्लाइड शो में गति को कम ज्यादा करने व ट्रांजीशन प्रभाव को बदलने के लिए ठीक यहीं पर ही पाँच विकल्प दिए गए हैं. यदि आप एक्टिव एक्स और जावा प्रोग्राम अपने कम्प्यूटर में चलने की इजाजत देते हैं तो कॉमबूस्ट में आप पचास फोटो (अधिकतम एक बार में 100 मेबा) को एक साथ, और बड़ी ही तीव्रता से – जैसा कि आप फ़ाइल मैनेजर से फ़ाइल ट्रांसफर करते हैं - अपलोड कर सकते हैं. व चाहे कितने ही फोटो अपलोड कर सकते हैं. व पारंपरिक रूप से भी एक-एक कर फोटो अपलोड कर सकते हैं. कॉम…

चिट्ठाकारी, भावुकता और व्यावसायिकता

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चिट्ठाकार मिलन समारोह की तमाम रपटें पढ़ीं. एक विशेष बात ने मुझे झकझोरा – आलोक जी की टिप्पणी पर मैथिली जी भावुक हो उठे थे. जहाँ आलोक जी का कहना भी सत्य है और उस पर मैं भी अमल करना चाहूँगा, वहीं मैथिली जी की सोच, भले ही उन्होंने आलोक जी की बात को व्यापक अर्थ में न लेकर व्यक्तिगत तौर पर ले लिए हों, भी सही है. व्यक्ति अपने पैशन, अपनी सोच और अपने विचारों को लेकर आमतौर पर भावुक तो होता ही है. निम्न पत्र मैंने फरवरी 07 में मैथिली जी को लिखा था, और उनसे प्रकाशन की अनुमति मांगी थी. तब उन पर उनके नए नवेले कैफ़े हिन्दी साइट पर हिन्दी चिट्ठों की सामग्री अनुमति के बगैर प्रकाशित करने के आरोप लगाए गए थे. और, जाहिर है, इस चिट्ठा प्रविष्टि को प्रकाशित करने के लिए उन्होंने उस वक्त यह कह कर मना कर दिया था कि यह तो व्यक्तिगत विज्ञापन जैसा कुछ हो जाएगा. आज जब श्रीश जी की टिप्पणी से सबको मालूम हो चला है, तो मैं भी यहाँ धृष्टता करते हुए इस पत्राचार को उनसे पूछे बगैर प्रकाशित कर रहा हूँ. आशा है, वे इसे अन्यथा नहीं लेंगे और मुझे माफ़ करेंगे. ************ आदरणीय मैथिली जी,
यह चिट्ठा पोस्ट मैं आपके लिए लिखना …

मैं और मेरी चिट्ठाकारी

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मेरे, तरंग में आकर लिखे गए आत्मालाप पर पहले शास्त्री जी ने अपनी टिप्पणी में, और फिर ज्ञानदत्त जी ने अपने चिट्ठे में मुझसे प्रश्न किया कि जिस बिना पर मैंने आत्मालाप किया है, वैसा ही कुछ, अन्य चिट्ठाकारों चिट्ठों को कैसे प्राप्त हो – इस पर लिखें. यानी शुद्ध-सरल भाषा में – चिट्ठों पर हिट और चिट्ठे के समर्पित पाठक बढ़ाने के तरीके लिखें. वैसे, सही में देखा जाए तो फ़ीडबर्नर के जो आंकड़े मेरे चिट्ठे पर दिख रहे हैं, वैसा ही कुछ जतन (ब्लॉगर+फ़ीडबर्नर फ़ीड योग) फ़ुरसतिया पर होता या संभवतः ई-पंडित या मोहल्ला पर होता तब भी ऐसा ही कुछ या इससे बेहतर आंकड़ा दिखाई देता होता – और इसीलिए मैंने कहा भी था – ज्यादा खुशी मनाने जैसी कोई बात नहीं, और, वैसे भी, ये तो शुरूआत है – आने वाले दिनों में सैकड़ों हजारों हिन्दी चिट्ठे तमाम तरह की लोकप्रियता प्राप्त करेंगे. दरअसल, अभी इंटरनेट का आम हिन्दी पाठक चिट्ठों के बारे में एक तरह से अंजान ही है. नहीं तो हिन्दीमीडिया को उसके प्रारंभ होने के मात्र दो महीने के भीतर ही दो-लाख हिट्स नहीं मिलते! चलिए, फिर भी, अब जब चूंकि मुझे आसन पर बैठा ही दिया गया है, तो कुछ प्रवच…

लीजिए, पेश है दुनिया का सबसे तेज इंटरनेट कनेक्शन

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यदि आपको 40 जीबीपीएस की तेज रफ़्तार युक्त इंटरनेट कनेक्शन मिले तो आप उसे क्या कहेंगे? वीवीआईपी के तर्ज वीवीब्रॉडबैण्ड? विश्व का सर्वाधिक तेज रफ़्तार का, 40 जीबीपीएस ब्रॉडबैण्ड कनेक्शन स्वीडन के कार्लस्टेड निवासी 75 वर्षीया सिगब्रिट को हाल ही में दिया गया है. वो इस तेजरफ़्तार ब्रॉडबैण्ड से क्या-क्या कर सकती हैं? वे हाई-डेफ़िनिशन टीवी के 1500 चैनल एक साथ देख सकती हैं – जी, हाँ एक साथ, – यदि वे चैनलों को किसी स्क्रोलेबल विंडो में एक साथ चालू कर दें तो :) या फिर, वे हाई डेफिनिशन डीवीडी की पूरी एक डीवीडी दो सेकण्ड में डाउनलोड कर सकती हैं. यूँ तो यह तेजरफ़्तार ब्रॉडबैण्ड एक कंसेप्ट परियोजना का हिस्सा है, परंतु यह माना जा रहा है कि इसके व्यावसायिक-व्यापारिक रूप से संभव व सफल होने के पूरे आसार हैं. मेरे लिए तो यह एक स्वप्न तुल्य बात है क्योंकि अभी मेरे पास बीएसएनएल का तथाकथित 2 एमबीपीएस ब्रॉडबैण्ड है इसके बावजूद वह ससुरा रेडियोवाणी के सुमधुर गीतों को बेसुरा बना देता है - गीतों को अटक-अटक कर जो सुनाता है , क्योंकि यह कभी भी 50 केबीपीएस से आगे की रफ़्तार पकड़ता ही नहीं! :(
चिट्ठाजगत् चिप्पिया…

अपुन का भी सैकड़ा पार!

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जी हाँ, आज अपुन का भी सैकड़ा पार हो रिएला है. :)किदर को भाई?जरा बाजू पट्टी में निगाह मारने का.अपुन का इस हिन्दी बिलाग का फ़ीड बर्नर में पढ़ने वालों का आंकड़ा तीन फ़िगर में होएला है साब.अब इंतजार है कि कब मामला चार फिगर में आए.बहूत पहले अपने पगार को चार फिगर में आने को तरसता था - कोई 1984-85 में पहली मर्तबा फोर फिगर सेलेरी मिली थी - 1004.50 रुपए. वोईच खुशी हो रिएला है बाप!वैसे, ये ब्लॉगर-फ़ीडबर्नर मिलन का कमाल है भिड़ु सो जियादा खुशी नईं मनाने का.Technorati Tags: , , , , , चिट्ठाजगत् चिप्पियाँ: हिन्दी , हिन्द ब्लॉग , फीड बर्नर , hindi , hindi blog , feedburner

टिप्पणियाँ चाहिए? मेरे पास आइए!

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और, टिप्पणियाँ मुझसे खरीदिए. 100 टिप्पणियों के लिए 1000 रुपए, 500 टिप्पणियों के लिए 5000 रुपए, 1000 टिप्पणियों के लिए दस हजार रुपए. ये टिप्पणियाँ स्वचालित बॉट के जरिए नहीं होंगी, परंतु बढ़िया, शुद्ध हिन्दी के जानकार कम्प्यूटर उपयोक्ताओं द्वारा की जाएंगी जो आपके ब्लॉग पोस्टों को पढ़ेंगे और फिर उस पर बढ़िया सी, पोस्ट के विषय वस्तु से मिलती जुलती, कम से कम तीन लाइनों की और अधिकतम दस लाइनों की शानदार टिप्पणियाँ करेंगे. सिर्फ हेहेहे और स्माइली टाइप नहीं. और वे कोई दर्जन-दो-दर्जन ब्लॉगर – वर्डप्रेस के असली खाते से नाम और प्रोफ़ाइल युक्त टिप्पणियाँ करेंगे. बेनामी नहीं, गाली गलौज की नहीं, असभ्य नहीं. सभ्य, सुंदर, समीचीन टिप्पणियों की गारंटी. क्या आपको पता है कि आपके चिट्ठे की टिप्पणियाँ आपके चिट्ठे के रैंक को बढ़ाती हैं उनका दर्जा संवारती हैं? आपके चिट्ठे में जितने ज्यादा कमेंट्स होंगे, जितनी ज्यादा टिप्पणियाँ होंगी, जितने ज्यादा चिट्ठों के बैकलिंक्स होंगे, आपके चिट्ठे का दर्जा हर कहीं ज्यादा होगा. आपके चिट्ठे का पीआर (गूगल पेज रेंक, ईडियट,) ज्यादा होगा. और फिर आपके चिट्ठे को सर्च इंजिनों द्…

वे सुंदर हैं – सचमुच!

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वैसे तो इंटरनेट के जरिए आभासी शुभकामना संदेश कार्ड (वर्चुअल ग्रीटिंग कार्ड) लेने देने का काम बरसों से चल रहा है और क्या ख़ूब चल रहा है. एक से एक कल्पनातीत रंगों व डिजाइनों में आप कार्डों का आदान प्रदान कर सकते हैं और कुछेक को छोड़कर आमतौर पर सभी में अब यूनिकोड हिन्दी का पूरा समर्थन भी उपलब्ध है. हाल ही में एक ऐसा ही, नया, नायाब किस्म का आभासी गुलदस्ता (वर्चुअल बुके) लेने-देने की सेवा देआरब्यूटीफ़ुल के नाम से प्रारंभ किया गया है. इसमें नया और नायाब क्या है? इस सेवा के जरिए आप किसी को भी ईमेल के जरिए मुफ़्त में आभासी गुलदस्ता प्रेषित कर सकते हैं. जिसे आपने गुलदस्ता भेजा है, वह आपके द्वारा भेजे गए गुलदस्ते को अपने ई-मेल में प्राप्त कड़ी पर जाकर देख सकता है. गुलदस्ते के साथ आप अपना संदेश भी चिपका सकते हैं. मैंने हिन्दी में चिपकाने की कोशिश की तो वे ??? प्रश्नवाचक चिह्न बन गए.परंतु रुकिए. यह गुलदस्ता यूँ तो आभासी है, परंतु व्यवहार में यह पूरा असली प्रतीत होता है. यदि आपने उसमें समय-समय पर पानी नहीं डाला तो वह मुरझाने लगेगा. और अंततः सूख जाएगा. और यही इस आभासी गुलदस्ता सेवा - देआरब्यूटीफ़…

हिन्दी की कड़ियाँ

अकसर यह प्रश्न बारंबार पूछा जाता है.

हिन्दी में कैसे लिखें. इस चिट्ठे पर साइडबार में भी कड़ियाँ हैं, परंतु पाठकों की निगाहें शायद वहां भी निगाह नहीं जा पाती.

हिन्दी सहायता के लिए बहुत से मित्रों ने बहुत अच्छे प्रयास कर बढ़िया लेख लिख रखे हैं. पहले इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ें फिर भी कोई समस्या हो तो निसंकोच पूछें.

हिन्दी टूल किट इन्सटाल - हिन्दी में 7 प्रकार के कुंजीपट - इनस्क्रिप्ट, रेमिंगटन (कृतिदेव), फ़ोनेटिक इत्यादि से लिखने के लिए अपने कम्प्यूटर को बिना विंडोज एक्सपी सीडी  कैसे सेट करें

हिन्दी में कैसे लिखें - यू-ट्यूब पर एक और वीडियो ट्यूटोरियल

हिन्दी पढ़ने लिखने में समस्याएं व उनका निराकरण

हिन्दी के बारे में बारंबार पूछे जाने वाले सवाल

कम्प्यूटर पर हिन्दी लिखने पढ़ने के बारे में विस्तृत सहायता


हिन्दी में कैसे लिखें - वीडियो ट्यूटोरियल

आसानी से देवनागरी में कैसे लिखें? चित्रमय उदाहरण

हिन्दी में चिट्ठा लिखने हेतु वीडियो ट्यूटोरियल वर्ड प्रेस के लिए तथा ब्लॉगर ब्लॉगस्पॉट के लिए
उपरोक्त दोनों कड़ियाँ ई-शिक्षक के सौजन्य से, जहाँ हिन्दी कम्प्यूटिंग से संबंधित अन्य सामग्री भी आपको मिलेगी.

हिन्…

चिट्ठाजगत् के लिए टैग स्वचालित लगाएँ

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नए नवेले हिन्दी चिट्ठा एकत्रक चिट्ठाजगत् में टैग की सुविधाएँ दी गई हैं. ठीक वैसा ही जैसा टेक्नोराती में है. जिससे कि एक ही टैग से संबंधित सभी चिट्ठा प्रविष्टियों को देखा जा सके. परंतु चिट्ठों में टैग लगाने के लिए चिट्ठाजगत् का कोड जाहिर है थोड़ा सा अलग रखा गया है. अपने चिट्ठों में चिट्ठाजगत् का टैग कोड कैसे लगाएँ इसका विवरण चिट्ठाजगत् में यहाँ पर दिया गया है. परंतु वह बहुत ही लंबा, उबाऊ प्रक्रिया है और हर टैग के लिए एचटीएमएल कोड जेनरेट कर / बना कर उसे नकल-चिपका कर काम में लेना होगा. यदि आप अपना चिट्ठा लिखने के लिए विंडोज लाइव राइटर इस्तेमाल करते हैं तो चिट्ठाजगत् का कोड लगाना बहुत ही आसान है. कैसे? आइए, देखते हैं- इसके लिए विंडोज लाइव राइटर प्रारंभ करें. अब Insert > Tags को क्लिक कर टैग लगाने का डॉयलॉग बॉक्स खोलें. नीचे Tag Provider: ड्रॉप डाउन मेन्यू में क्लिक कर (Customize Providers…) चुनें. अब Add बटन को क्लिक करें. एक नया बक्सा खुलेगा जिसमें टैग लगाने के लिए चिट्ठाजगत् के नाम का एक नया प्रोवाइडर बनाने के लिए आप आवश्यक जानकारी भर सकेंगे. सबसे ऊपर Provider Name वाले बक्से म…

बेनामी टिप्पणियों से सावधान!

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पिछले दिनों इस चिट्ठे के एक पोस्ट में एक बेनामी टिप्पणी आई जो कुछ यूँ थी – asdlkhaaaaaaaa
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" मुझे लगा कि ये मेरे किसी ब्लॉग प्रशंसक (या धुर-आलोचक) की टिप्पणी है जो संभवतः हिन्दी में लिखना चाह रहा होगा और बेचारा कुछ समस्या के कारण लिख नहीं पा रहा होगा. मेरे ईमेल में इसकी सूचना मिलते ही वस्तु-स्थिति जांचने अपने चिट्ठे पर जब उस टिप्पणी को देखने गया तो एक अजीब घटना हुई. चिट्ठे पर टिप्पणी देखने की कड़ी को क्लिक करते ही वह ब्राउज़र को दूसरी साइट पर ले जाने लगा, और फ़ॉयरफ़ॉक्स के सुरक्षा तंत्र ने सचेत किया कि यह एक असुरक्षित साइट है. एक सेकंड को तो कुछ समझ में नहीं आया कि ये क्या हो रहा है, परंतु फिर एकाएक बिजली कौंधी. मुझे लगा कि हो न हो इस टिप्पणी में कुछ स्क्रिप्ट / कोड छुपा है – हालांकि ब्लॉगर किसी अवांछित कोड को टिप्पणी में डालने नहीं देता है, फिर भी होशियारी से कोई अवांछित कोड डालने में सफल हो ही चुका था. उस टिप्पणी के एचटीएमएल स्रोत को देखने पर वह कुछ ऐसा दिखा –<a href=3D"http://raviratlami.blogspo=t.com/2007/07/u-s.html">=C2=BF=C7=9D=C9=B9=C7=9D=…

¿ǝɹǝɥ uǝʇʇıɹʍ sı ʇɐɥʍ

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यह क्या लिखा है?क्या आप बता सकते हैं कि नीचे की पंक्तियों में क्या लिखा है और कैसा लिखा है?
¡ंेद ाकंौच ेसउ रऔ ंेजेभ खिल टलप-टलउ छुक ीह ासऐ ोक र्तिम ेनपअ ा़फद ीलगअ 'ोतातआ ाजम ादाय्ज बत ातटलप
हरत सइ छुक रिफ ाय
हरत सइ छुक ोक ठाप ीद्निह हय िदय रगम¿राजऔ त्सम न ैह.ैह ातटलप ेस ँएाद हरत ीक ूद्रउ हय ोक ठाप ीद्निह ुतंरप 'ंैह ेहर ाप खेद¿ǝɹǝɥ uǝʇʇıɹʍ sı ʇɐɥʍ– हरत सइ छुकंेम कष्रीश ेक ेठ्टिच सइ पआ िक ासैज – ैह ातटलप ंेम पूर ेरसूद छुक हय ंेम ी़जेर्गंअ.ैह ायग ापाछ ँाहय रक टलउ ोक ठाप ेरूप सइ ाराव्द राजऔ टलप रष्कअ नइालनऑ कए 'लसअरद
उत्तर प्राप्त करने के लिये यहाँ जाएँ. :)

अमरीका ऑनलाइन इन ???????

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एओएल.इन भारतीय इंटरनेट परिदृश्य में धूमधड़ाके से प्रविष्ट हुआ है और अपनी पैठ बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है. प्रिंट मीडिया से लेकर अन्य दृश्य-श्रव्य मीडिया में भी एओएल.इन के विज्ञापन धुआंधार चले आ रहे हैं. भारतीय ब्लॉगों – खासकर हिन्दी चिट्ठों में जहाँ जहाँ एडसेंस हैं, एओएल का जमूरा जब तब मुँह से आग उड़ाता दिख जाता है.इसी आग से प्रभावित होकर मैंने भी सोचा कि चलो, एक ई-मेल खाता एओएल पर खोल ही लिया जाए. एओएल मेल दिखने में पूरा का पूरा याहू! मेल का जुड़वां भाई दिखता है. इंटरफ़ेस वही घिसा-पिटा सा है और धीमा भी. मगर मुझे तो इसकी हिन्दी की परीक्षा लेनी थी. फटाफट इस नए खाते पर एक हिन्दी में ई-मेल भेजा और इसके जरिए एक हिन्दी में ई-मेल किया. नतीजा – वही ढाक के तीन प्रश्न – यानी ??????ईमेल की मुख्य सामग्री की यूनिकोड तो खंडित नहीं हुई, मगर प्रेषक / प्राप्तकर्ता और विषय के यूनिकोड खंडित हो गए. एओएल – भारत में नए सिरे से, नए ब्रॉड नाम से पैठ बनाने की कोशिश कर रही है तो कम से कम इधर तो उसे ध्यान देना ही था – या उसकी नजर सिर्फ अंग्रेज़ी इस्तेमाल करने वाले भारतीयों पर है? क्या एओएल भारत में …

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