टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

चिट्ठा चोरी

ब्लॉग पोस्ट की चोरी करो क्योंकि तुम पर निगाह नहीं रखी जा रही है...

एक और हिन्दी ब्लॉग पोस्ट की चोरी. वह भी चित्र समेत!

आमतौर पर साभार, कड़ी सहित व लेखक रचनाकार के नाम-अता-पता सहित रचनाओं को कई-कई मर्तबा पुनर्प्रकाशित करने में कहीं कोई हर्ज नहीं होता और अगर व्यावसायिक हितों को नुकसान नहीं पहुँचता है तो लेखकों को इसमें आपत्ति नहीं होती और वे प्रकाशित होने में खुशी ही महसूस करते हैं. ध्येय यह होता है कि रचनाएँ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचे व ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ें.

परंतु जब लेखक की रचनाओं को बिना श्रेय दिए, बिना नाम दिए या अपने नाम से या किसी और नाम से प्रकाशित करने की घटनाओं को क्या कहें? काव्या विश्वनाथन? नहीं. ये तो कोई प्रिंसेस मलेशिया हैं!

मूल रचना रचनाकार पर यहाँ देखें –

इसके प्रथम भाग को जैसा का तैसा टीप कर प्रकाशित किया गया है यहाँ पर.

आप देखेंगे कि रचनाकार – रघुवीर सहाय का नाम मिटा दिया गया है.

चिट्ठा सामग्री की चोरी आम बात है. इस बारे में तथा कुछ सावधानियों के बारे में चर्चा यहाँ पर की गई है.

वह तो इस चिट्ठे पर रेखा की बनाई कलाकृति पर निगाह पड़ गई और जाना पहचाना चित्र होने के कारण जरा ध्यान देने पर रचनाकार की प्रविष्टि याद आ गई अन्यथा यह चोरी निगाह में ही नहीं आ पाती (प्रविष्टि सितम्बर 06 की है)

विषय:

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rachna

i felt like writing shame shame on the blog of the person who copied the blog
i think we all should in bulk writte in comment section shame shame
commendable memory and effort on your part

बहुत अच्‍छी जानकारी आपने दी रवि भाई । भारत में अभी बौद्धिक संपदा अधिकार कानून के प्रति जागरूकता कम है इसी के कारण हमारी न्‍याय प्रणाली एवं इसके प्रभावी ढंग से लागू करने वाले तंत्र भी नये हैं । इस कारण ऐसा हो रहा है धीरे धीरे यह अपराध बढेगा और तंत्र भी अनुभवी होता जायेगा पर प्रिवंशन इज बेटर देन क्‍योर । धन्‍यवाद

इससे पहले भी ये कई बार हो चुका है इसे देखें
http://pahadihimanshu.blogspot.com/2007/05/songs.html.इन सज्जन को भी कई बार लिखा असर ही नहीं हुआ.

रविजी, इस चिट्ठाचोर का प्रोफाईल देख लीजिए, बंदे ने 25 ब्लाग बना रखे हैं, हाथी पाल लो और खिलाने के लिए कुछ न हो तो आदमी यही सब करता है.
वैसे आपकी नजर से कोई बच नहीं सकता. लगता है आपका खुफिया तंत्र चुस्त-दुरूस्त है.

रवि भाई साहब;
मन से बडा़ चौकीदार दुनिया मे अभी पैदा नहीं हुआ.सरासर चौट्टाई तो कभी न कभी तो पकड़ में आ ही जाती है...क़ानून का पंजा चले उससे पहले स्वयं जान लेना चाहिये कि हम जो कर रहे हैं वह उचित नहीं.मन की अदालत तो एक दिन आपका जुलूस निकाल ही देगी.शब्द ब्रह्म है और हम सब उस शब्द-मंदिर के सेवी...अपने आराध्य के कपडे़ उतारता है कोई ?

मैं इनके अलावा दो और चोरों को जानता हूँ. एक तो हैं ख्वाब का दर वाले साहब, जिन्होंने कई बार बीबीसी की वेबसाइट से मालकर उठाकर चेपा है, एक ललित मोहन पांडे हैं जिन्होंने पिछले दिनों बिल गेट्स वाली पोस्ट चुराई थी. इन दोनों सज्जनों की चोरी पकड़ने पर मैं शोर भी मचाया लेकिन ये बाज़ नहीं आते.

क्या कहें, इन चोरों की माया हम भी भुगत चुके हैं। एकदम बेशर्म होते हैं ये। :(

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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