राग रंग - एक नया पॉडकास्ट


कोई दो साल पहले मैंने एक पोस्ट लिखा था - ब्लॉग? क्या इतिहास की बातें करते हो, अब तो पॉडकास्ट करो - तब मैंने नहीं सोचा था कि हिन्दी में पॉडकास्टिंग को अपनी पूरी रफ़्तार में आने में इतना समय लग जाएगा.

बहरहाल, देर आयद दुरूस्त आयद. उन्मुक्त अपने ऑग फ़ॉर्मेट में विविध विषयों में हिन्दी पॉडकास्टिंग की अलख जगाए हुए थे कि तरकश पर खुशी के पॉडकास्ट से सिलसिला आगे बढ़ा. फिर पॉडभारती का पदार्पण हुआ जो अपने बेहद पेशेवराना अंदाज के कारण बहुत जल्द सफ़लता की सीढ़ियों पर चढ़ेगा ऐसी उम्मीदें हैं.

और, अभी हाल ही में प्रगति रथ ने भी अपना पॉडकास्ट ब्लॉग - राग रंग प्रारंभ किया है जो माईपॉडकास्ट.कॉम नामक मुफ़्त पॉडकास्ट सेवा प्रदाता पर स्थित है. प्रगति - श्री जयप्रकाश मानस जी की सुपुत्री हैं.

राग रंग के आरंभिक अंकों में जहाँ कुछ बेहद लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी गीतों को पिरोया गया है तो वहीं कुछ हिन्दी फ़िल्मी गाने भी हैं.

माईपॉडकास्ट.कॉम के जरिए अपना स्वयं का पॉडकास्ट प्रारंभ करना बहुत आसान है. या तो आप माइक्रोफ़ोन से अपनी स्वयं की बकबक रेकॉर्ड करें - जैसा कि उन्मुक्त करते हैं और उसकी एमपी3 (उन्मुक्त ऑग फ़ॉर्मेट इस्तेमाल करते हैं जो ज्यादा लोकप्रिय नहीं है, परंतु मुक्त स्रोत है) फ़ाइल तैयार करें. या पहले से तैयार एमपी 3 फ़ाइल जैसे कि गानों की फ़ाइल लें. माईपॉडकास्ट.कॉम में पॉडकास्ट खाता खोलें, अपनी एमपी3 फ़ाइल लोड करें, फ़ाइल के बारे में कुछ लिखें, और बस हो गया.

दुनिया को आपके पॉडकास्ट की दीवानी होते देर नहीं लगेगी.

जब तक कि आप अपना स्वयं का पॉडकास्ट प्रारंभ करें, राग रंग के पॉडकास्ट सुनें व उन्हें दें अपनी शुभकामनाएं.


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रवि भाईसाहब, सूचना के लिए धन्यवाद।

थोडा मेरी जानकारी बढाएं
पॉड्कास्ट होता क्या है, बताएं

मेरे विचार से पॉडकास्टिंग का प्रयोग बढ़ेगा। यह चिट्ठाकारी से ज्यादा आसान है विडियोकास्ट भी आसान हो सकता है पर इसके लिये विडियो कैमरा होना चाहिये।
संतोष जी ऐसे मैंने पॉडकास्टिंग के बारे में यहां लिखा है और पॉडकास्ट भी किया है।

रवि जी, देखने में मामूली काम लग सकता है लेकिन वाकई में आप बडा काम कर रहे हैं। हिन्दी में जानकारी बांटने का काम। हम में से हर कोई कुछ न कुछ जान रहा होता है लेकिन वों बांटना नहीं चाहता। वो उस प्रसव पीडा से नहीं गुजरना चाहता जो गागर में सागर भरने के लिए जरूरी है। आपने पॉडकास्‍ट की थोडे से शब्दों में अहम सूचना दी। शुक्रिया। यह एकलव्य शायद अंगूठा न दे पाये पर गुरु दक्षिणा की कोई और शक्ल तलाश करेगा।

भाई नसीरुद्दीन,
आपने मुझे द्रोणाचार्य मान लिया है तो मेरा अब तक का लेखन - यकीन मानिए - सफल हो गया. और कुछ आपने सचमुच सीख लिया तो वास्तव में यही मेरी सच्ची गुरु दक्षिणा है.

भाई अभिनव, संतोष, उन्मुक्त,
आपके विनम्र विचारों हेतु धन्यवाद. संतोष जी, उन्मुक्त जी ने पॉडकास्ट के बारे में बढ़िया लिखा है अवश्य पढ़ें तथा इस लेख की सबसे पहली कड़ी में भी पॉडकास्ट के बारे में जानकारी है.

रवि जी ,नयी जान कारी के लिए धन्यवाद।

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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