टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

एक चिट्ठाकार की आखिरी हँसी...री लोडेड...

दि लास्ट लाफ़

इस चित्र को ध्यान से देखिए. ये इनके जीवन की अंतिम, उन्मुक्त हँसी है.

फिर इनके जीवन में दुनियादारी, रिश्तेदारी और न-जाने-क्या-क्या-दारी प्रवेश कर जाएगी और आगे की जो भी हँसी आएगी, वो, यकीन मानिए, नक़ली-सी और बनावटी-सी हँसी होगी. और, बहुत होगी तो विद्रूप की हँसी होगी - दुनियादारी पर ठहाके लगाते हुए...

मैं इतने विश्वास के साथ कैसे कह रहा हूँ?

भुक्तभोगी जो हूँ!

चित्र में ये दो जीव एक जान हैं कौन? देखते हैं कौन सबसे पहले अंदाज़ा लगाता है :) , और सही अंदाज़ा लगाता है!

अद्यतन # 1

जब यह पोस्ट प्रकाशित किया गया था तो नारद जी को एक ब्लॉग के गुम हो जाने से अजीर्ण हो गया और वे उसी को ढूंढते रह गए. लिहाजा यह पोस्ट नारद के पिछले पेजों में बरीड हो गया और इसे मैं फिर से पोस्ट कर रहा हूँ, थोड़ा सा संपादित कर और अब तक पाठकों के आए टिप्पणियों पर प्रतिटिप्पणियाँ कर.

जैसा कि समीर जी, अतुल जी, धुरविरोधी जी ने बख़ूबी अंदाज़ा लगा लिया था - यह चित्र मेरी भांजी निवेदिता और हिन्दी ग्राम के चिट्ठाकार - आशीष का है. और उन्मुक्त जी, यह चित्र 20 अप्रैल को हुई सगाई के अवसर का है, पर हाँ, सगाई को आधी शादी तो मानी ही जाती है. और, अपना नाम नहीं बता रहे भाई साहब, अगर हम आपकी भाषा को पहचाने में कामयाब हुए हैं तो आप अमित जी - इट्ज़-मी हैं! और अंकुर जी, अब तो आपको पता चल गया होगा कि चित्र किनका है.

सगाई के अवसर पर मैं अपरिहार्य कारणों से पहुंच नहीं पाया था - आरक्षित रेल टिकटों को ऐन मौके पर निरस्त करवाना पड़ गया था. मेरे पास ये चित्र और सगाई का वीडियो अभी हाल ही में पहुँचे जिसे देख कर लगा कि मुझे तो वहाँ हर हाल में होना ही चाहिए था - ये तो बहुत बड़ा नुकसान हो गया - सगाई के समय खूब मजे किए इन सभी ने! और, आशीष का बरमूडा अभी भी मोहल्ले का चर्चित विषय बना हुआ है! ख़ैर, अब शादी का बेसब्री से इंतजार है.

और, आप पाठकों को यदि ध्यान न हो तो फिर से बता दूं कि यह रिश्ता हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रतिफल के रूप में ही सामने आया है जिसमें प्रेरक - उत्प्रेरक स्वरूप फुरसतिया जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

पुनश्च: हँसी चाहे जैसी भी हो, आइए, हम सभी इन्हें शुभकामनाएँ दें - आशीष-निवेदिता ऐसे ही तमाम उम्र हँसते रहें - इनकी शादी सफल, खुशनुमा और हँसी-खुशी से भरपूर हो.

Tag ,,,
विषय:

एक टिप्पणी भेजें

Ankur Gupta

YE KISKI PHOTO HAI?

हमें तो मांट्रियल पधारे आशीष भाई लग रहे हैं, जिनका हमें इंतजार है हमारे द्वारे, :)

आशीष एवं निशि
सही है ना?

निशि यानी निवेदिता
पोहे का लोहा दुनियां पानती है

अंदाज तो कुछ कुछ लगा लिया था परंतु हँसी के बारे में क्या बोलें? आपने लिख ही दिया है।

शादी की शुभकामनायें।

नही जी अभी ये आखीरी हँसी नही है, अभी शादी के लिये कम से कम चार छह महीने बाकी है :) अपना हीरो तो अभी माँट्रीयल की फ्रेँच कन्याओ के दर्शन मे व्यस्त है :)

और पहेली का हल तो तस्वीर के फाइल के नाम मे ही दिया हुआ है :)

हे हे हम तो फोटो देखते ही समझ गए थे। लेकिन आखिरी हँसी तो शादी वाले दिन होगी न। :)

आपके इच्छानुसार मैने उस लेखन को हिन्दी मे अनुवाद किया है। आशा करता हूँ कि आप उसे पड़ेंगे:

http://arbitmax.blogspot.com/2007/02/celebration-means.html

आमीन ये जोड़ा इसी तरह जिन्दगी का सफ़र तय करे

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
कृपया ध्यान दें - स्पैम (वायरस, ट्रोजन व रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त)टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहां पर प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

अन्य रचनाएँ

[random][simplepost]

व्यंग्य

[व्यंग्य][random][column1]

विविध

[विविध][random][column1]

हिन्दी

[हिन्दी][random][column1]
[blogger][facebook]

तकनीकी

[तकनीकी][random][column1]

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

[random][column1]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget