रविवार, 6 मई 2007

इंडिया स्फ़ीयर हिन्दी : एक नया नारद?



और, यह नया नारद तो ज्यादा ही चपल चतुर और व्यावसायिक दीखता है!

इंडिया स्फ़ीयर - पल्स ऑन द इंडियन ब्लॉगस्फ़ीयर में एक खंड है हिन्दी ब्लॉग का. यह लगभग नारद जैसे रूप में दिखता है, बस स्टेटकाउंटर का मुँह चिढ़ाता प्रश्न वाचक चिह्न भर नहीं है इसमें. परंतु यह नारद से ज्यादा साफ़ सुथरा, सुघड़ और अच्छा है. उदाहरण के लिए, काल चिंतन की प्रविष्टि - कविता आह्वान को नारद में आप अपठनीय पाते हैं क्योंकि यह कविता को गद्य रूप में बदल देता है जबकि इंडिया स्फ़ीयर में यह अपने पूरे फ़ॉर्मेटिंग के साथ उपलब्ध है. मूलतः भारतीय अंग्रेजी ब्लॉगमंडल को प्रस्तुत करने वाले इस स्थल में हिन्दी ब्लॉगों के इस खण्ड से हिन्दी ब्लॉगों के नए मुरीद पैदा होंगे इसमें कोई शक नहीं.

काल चिंतन - नारद पर


काल चिंतन इंडिया स्फ़ीयर पर


हाँ, इसमें कुछ अतिरिक्त, शातिराना खूबियाँ जोड़ी गई हैं जो इसके एडसेंस युक्त बिजनेस मॉडल के लिए जरूरी भी लगती हैं - जैसे कि चिट्ठा पोस्टों के आगे रीड मोर की कड़ी जिसमें आपको पोस्ट का सारांश या पोस्ट का अच्छा खासा हिस्सा नए पेजलोड के उपरांत वहीं पर पढ़ने को मिल जाता है. जिस पोस्ट की फ़ीड उपलब्ध नहीं होती वहां पर मूल आलेख पढ़ें की कड़ी भी उपलब्ध की गई है.

इंडिया स्फ़ीयर पर उपलब्ध चिट्ठों की कड़ियों पर सारांश या पोस्ट का कुछ हिस्सा पढ़कर आप अपनी टिप्पणियाँ भी दर्ज कर सकते हैं. आपको अलग से चिट्ठे के पोस्ट पर जाने की आवश्यकता नहीं. आरंभिक जांच पड़ताल में यह धीमा ही प्रतीत हुआ - संभवतः यह अपने सर्वर पर चिट्ठों के कैश एकत्र कर नहीं रखता - यदि आप किसी चिट्ठे की प्रविष्टि पर रीड मोर कड़ी को क्लिक करते हैं तो यह ब्लॉग पोस्ट से ही सामग्री डाउनलोड कर दिखाता है - यानी एक अतिरिक्त चरण बीच में आ जाने के कारण अनुभव धीमा प्रतीत होता है. फिर भी, चिट्ठों को नारद की तरह एकत्र कर उन्हें नए, नायाब रूप में प्रस्तुत किया गया है और संभवतः भविष्य में और भी दूसरी खूबियाँ जोड़ी जा सकें.

हाल-फिलहाल यह नारद का विकल्प तो नहीं नजर आता, मगर विकल्प बनने की संभावना तो इसमें बख़ूबी नज़र आती है - और इसके चिट्ठा प्रविष्टि के अनुक्रम को देखकर लगता है कि कहीं यह नारद की फ़ीड ही इस्तेमाल तो नहीं कर रहा?

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8 blogger-facebook:

  1. रवि जी कुछ दिन पहले MyBlogLog विजेट के द्वारा इसके बारे में जाना था और इस पर गया था। सोचा था इसे जरा टैस्ट करके इसके बारे में लिखूँगा। आप बाजी मार ले गए। :) हिन्दी संबंधी चीजों पर बखूबी नजर रहती है आपकी।

    साइट तो अच्छी नजर आती है लेकिन इसका डेटाबेस छोटा है। अगर मुझे गलत ध्यान नहीं आ रहा तो इस पर रजिस्टर होने के लिए इसने एक बटन साइट पर लगाने को कहा था जो कि मैंने अब तक नहीं लगाया।

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  2. रवि भाई,
    धन्यवाद!
    दरअसल नारद को टक्कर देने के लिए अभी कई सफ़ल/असफ़ल प्रयोग होंगे। ये नारद के लिए हितकर भी है। स्वस्थ प्रतियोगिता होनी जरुरी भी है। इससे हमे नारद को और बेहतर करने मे मदद मिलेगी।

    यह साइट काफी कुछ जगह से सामान उठाकर लाती है और उसे दिखाती है। नीयत तो बिल्कुल साफ़ है भई, माल दूसरे का विज्ञापन से आय उसकी।

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  3. रवि भाई,

    यह जो नया नारद है, हाँ मैंने देखा कि हमारा सामूहिक ब्लॉग हिन्द-युग्म भी पंजीकृत है। हममें से किसी ने पंजीकृत तो कराया नहीं, फ़िर कैसे हो गया? यानी उनलोगों ने जोड़ा होगा? वैसे मुझे उसका लुक कुछ ख़ास पसंद नहीं आया।

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  4. इस जानकारी के लिए शुक्रीया रवी जी
    हमारा नारद जैसा भी है हर लिहाज़ से बेहतर है और मैं नहीं मानता कि नारद को टक्कर देने कोई और नारद तैयारी मे है चाहे वो कितना भी बेहतर हो - इसके बाद भी कई किसम के नारद देखने को मिलेंगे पर हमेशा की तरह सब एक ही नारद पर आएंगे http://www.narad.akshargram.com/

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  5. रवि जी, बहुत अच्छा प्रयास है. लेकिन
    1. चिठ्ठे बहुत कम हैं. शायद सभी चिठ्ठों ने अपनी फीड खुली नहीं छोड़ी इसलिये.
    2. वर्डप्रेस की कुछ पक्तियां दिखाता है पर ब्लोग्स्पाट की नहीं.
    3. वर्डप्रेस के चिठ्ठों पर इसके मुख्य पेज से नहीं जा सकते.(Read Original story) का लिंक नहीं है. इससे लोग थोड़ा हिचकेंगे. (नेट के पाठक बार बार क्लिक करना पसन्द नहीं करते.)
    4. चिठ्ठों के इमेज को अपने पूरे रूप में दिखाता है, इसे छोटा करके दिखाना चाहिये, जैसे कैफे हिन्दी टायपिंग टूल की इमेज पूरे 200 पिक्सेल चौड़ाई में दिखा रहा है. इससे गति एवं दर्शनीयता बहुत अधिक कम हो जाती है.
    5. फीड को ग्रहण करने का अन्तराल बहुत ज्यादा है. जब तक यह चिठ्ठे दिखायेगा, नारद इन्हें और इनके बाद के चिठ्ठे दिखा चुका होगा. अब पुराने अखबार का कौन खरीददार होगा?

    "इसके चिट्ठा प्रविष्टि के अनुक्रम को देखकर लगता है कि कहीं यह नारद की फ़ीड ही इस्तेमाल तो नहीं कर रहा?"
    मुझे तो एसा नहीं लगता. यदि करता तो काल चिंतन के आह्वाहन को कविता फार्मेट में नहीं दिखा पाता.
    "यदि आप किसी चिट्ठे की प्रविष्टि पर कड़ी को क्लिक करते हैं तो यह ब्लॉग पोस्ट से ही सामग्री डाउनलोड कर दिखाता है"
    इस साईट में ये परमानेन्ट लिंक है. सर्च इन्जन से आये टूरिस्ट इन्हीं एन्ट्रीज के एडसेन्स पर क्लिक करके आय करायेंगे. रोजाना आने वाले तो एडसेन्स पर क्लिक नहीं करेगें. फिर एडसेन्स से कमाई कैसे होगी? जो मेन पन्ने प्रविष्टि दिखाते हैं उन पर तो सर्च के पंछी जब तक आयेंगे, तब तक संबन्धित सामग्री बदल चुकी होगी.
    "मूलतः भारतीय अंग्रेजी ब्लॉगमंडल को प्रस्तुत करने वाले इस स्थल में हिन्दी ब्लॉगों के इस खण्ड से हिन्दी ब्लॉगों के नए मुरीद पैदा होंगे" अंग्रेजी ब्लाग पर आने वाले हिन्दी ब्लाग पर भी क्लिक कर लेंगे. यह इनका एक बहुत तगड़ा पक्ष है.
    जीतू जी उवाच "ये नारद के लिए हितकर भी है। स्वस्थ प्रतियोगिता होनी जरुरी भी है।"
    इसका मतलब कि आप हमारे लिये कुछ और सुस्वादु परोसेंगे?
    चूंकि अभी शुरूआत है, कमिंया तो होती हीं हैं. इन्डिया स्फीयर ने इतना करने में बहुत मेहनत की होगी इसलिये इन्हें साधुवाद.

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  6. मैथिली जी,
    आपने तो बढ़िया तकनीकी समीक्षा कर दी.

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  7. आप की ही संगति का असर है

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  8. प्रयास सराहनीय है, मैथिली जी ने तो गहन विश्लेषण कर ही दिया और जीतू जी की बात बहुत सही है कि और भी नारद जैसे प्रयास होंगे, सफल और असफल दोनों ही। कुल मिला कर तो यह ठीक ही है, क्योंकि हिन्दी चिट्ठों को अंग्रेज़ी / हिन्दी के समन्वित संकलन पर स्थान मिला है, सो पाठकों की संख्या में वृद्धि अपेक्षित ही है।

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