टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

January 2007





डॉ. प्रभात टण्डन ने अपने एक वैज्ञानिक आलेख में गर्दन दर्द के कारणों व समस्या के समाधान के बारे में लिखा है. कुछ अरसा पहले मुझे भी पीठ - खासकर कमर के क्षेत्र में तथा गर्दन में दर्द बने रहने की समस्या हो गई थी. अगर आप कंप्यूटर के सामने बैठे-बैठे अपना अच्छा-खासा वक्त गुजारेंगे तो ऐसी समस्या आज नहीं तो कल होनी ही है. आयुर्वेद में अनुभूत प्रयोगों के बारे में अकसर बोला बताया जाता है. इस समस्या से निजात दिलाने वाले इस अनुभूत प्रयोग के बारे में आपको बताता हूँ. तो जब मेरी समस्या असहनीय हो गई तो प्रारंभ में कुछ समय तो मूव, आयोडैक्स और पता नहीं क्या क्या के चक्कर में रहे और जब बात नहीं बनी तो अंततः सही दवा दारू के लिए हड्डी रोग चिकित्सक को दिखाया. उन्होंने देखते ही कहा कि यह कोई बीमारी नहीं है जिसके लिए चिकित्सक को दिखाया जाए और दवा-दारू ली जाए.

उन्होंने मुझे दो साधारण व्यायाम बताए और कहा कि पंद्रह दिन ईमानदारी से ये व्यायाम सुबह शाम करो, और फिर भी बात नहीं बने तो (हँसी में कहा-) ऑपरेशन कर देंगे. भले मानस ने न कोई फ़ीस ली, न कोई प्रिस्क्रिप्शन लिखा, और दरवाजा दिखा दिया. पहले तो मुझे लगा कि कोई सेकंड ओपीनियन ले देखते हैं - पर फिर लगा कि चलो उनकी बात मानकर देख लेते हैं.

मैंने उनके बताए अनुसार व्यायाम किए, (जो कतई कठिन नहीं हैं) और सचमुच कुछ ही दिनों में मेरे गर्दन व पीठ का दर्द अस्सी प्रतिशत खत्म हो गया. नियमित व्यायाम से अभी कोई बड़ी समस्या नहीं है. अब लगता है कि तमाम जगह स्वामी रामदेव क्यों सफल हो रहे हैं. मेरे द्वारा किए जा रहे ये दो अनुभूत प्रयोग हैं:

1) गर्दन दर्द के लिए व्यायाम - एक सपाट बिस्तर या फ़र्श पर बिना तकिये के पीठ के बल लेट जाएँ. फिर अपनी गर्दन को जितना संभव हो सके उतना धीरे धीरे ऊपर उठाते जाएँ. ध्यान रहे, पीठ का हिस्सा न उठे. गहरी से गहरी सांस भीतर खींचें. फिर उतने ही धीरे धीरे गर्दन नीचे करते जाएँ. सांस धीरे धीरे छोड़ें और पूरी ताकत से अंदर फेफड़े की हवा बाहर फेंकें. यह व्यायाम कम से कम एक दर्जन बार, सुबह-शाम करें. इस व्यायाम से आपके गर्दन की मांसपेशियों को ताकत मिलती है तथा इसके परिणाम आपको पंद्रह दिवस के भीतर मिलने लगेंगे. नियमित व्यायाम से गर्दन दर्द से पीछा छुड़ाया जा सकता है.

2) पीठ दर्द के लिए व्यायाम -फ़र्श पर पीठ के बल लेट जाएँ और फिर अपने दाहिने पैर को जितना संभव हो सके उतना धीरे धीरे जितना संभव हो सके उतना ऊपर उठाते जाएँ. गहरी सांस अंदर खींचें. फिर जितना संभव हो सके उतना धीरे धीरे पैर को वापस नीचे लाएँ. धीरे-धीरे, पूरी ताकत से सांस बाहर फेंकें. बारी बारी से यह व्यायाम दोनों पैरों के लिए एक दर्जन बार करें, व दिन में दो बार सुबह शाम करें. पीठ दर्द में राहत आपको पंद्रह दिनों के बाद महसूस होगा. पैरों के इस व्यायाम से पीठ व पेट के चारों ओर के मांसपेशियों को ताकत मिलती है जिससे पीठ दर्द में भी राहत मिलती है.

टीपः इस आलेख में दिए व्यायाम को अपनाने से पहले अपने चिकित्सक से राय अवश्य ले लें.

चलते चलते -

क्या आप बता सकते हैं कि ऊपर चित्र में दिखाई दे रही सुंदरी कौन है और कहाँ रहती है?


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अब यह तो तयशुदा बात है कि तमाम घपलेबाजों, धोखेबाजों के लिए इंटरनेट एक नया आश्रय स्थल और कार्य स्थल बन गया है. छद्मनाम, अनाम और अज्ञातनाम होते हुए वे इंटरनेट पर उपलब्ध तकनॉलाजी का बेजा इस्तेमाल तमाम तरह की धोखाधड़ी कर धन कमाने के लिए करते हैं. इंटरनेट पर धोखाधड़ी के आंकड़ों में प्रतिवर्ष तेजी से इजाफ़ा होता जा रहा है.

इधर कुछ समय से इंटरनेट पर सामग्री चोरों ने भी अपने हाथ-पाँव पसारे हैं. ये सामग्री चोर इंटरनेट पर उपलब्ध तमाम तरह के सामग्रियों की चोरी (वास्तविक लेखक/प्रकाशक के बिना अनुमति के नकल) कर लेते हैं और उसे अपने सर्वर पर रख कर प्रकाशित करते हैं. अपने सर्वर पर ये एडसेंस जैसे विज्ञापन डाल देते हैं और इसे कमाई का जरिया बनाते हैं. पूर्व में भी एक ऐसा ही प्रयास हिन्दी चिट्ठा जगत में सुनील के चिट्ठे की सामग्री के साथ किया जा चुका है और अमित के अंग्रेज़ी ब्लॉग को पूरा का पूरा चोरी कर अन्यत्र प्रकाशित कर लिया गया था.

सुनील को तो इससे ज्यादा परेशानी नहीं हुई, चूंकि उन्होंने अपने चिट्ठे को क्रिएटिव कॉमन लाइसेंस के तहत रखा है और उन्होंने इसे अपने चिट्ठे की लोकप्रियता माना. परंतु लंबे समय में गूगल इत्यादि सर्च इंजनों के जरिए जब ढूंढा खोजा जाएगा तो उन लेखों के लेखक की जगह कोई अनजाना-अजनबी नाम आएगा तब उन्हें भी शायद अच्छा नहीं लगेगा.

अमित व्यावसायिक चिट्ठाकार हैं. उनके चिट्ठे की सामग्री को कोई अन्य व्यक्ति बिना अनुमति के चोरी से इस्तेमाल करता है तो उन्हें तो भारी व्यावसायिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. आमतौर पर, प्रसिद्ध अंग्रेज़ी चिट्ठों पर पाठकों की आवाजाही की निर्भरता गूगल इत्यादि सर्च इंजनों के भरोसे ज्यादा होती है और जब आपकी लिखी सामग्री को किसी अन्य की साइट पर उपलब्ध मान कर उसे सर्च इंजन में वरीयता दी जाएगी तो व्यावसायिक नुकसान जाहिर है ज्यादा ही होगा. अमित को उस चोर-प्रकाशक को चोरी का धन्धा पानी बंद करवाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी.

(चोरी के इस चिट्ठे पर मूल Tech Trouble? चिट्ठे की चोरी की गई है)

हाल ही में बहुत से अंग्रेज़ी चिट्ठाकारों की सामग्रियों की बड़े स्तर पर चोरी की गई है. डस्कडायरी.कॉम नाम के जाल स्थल पर ढेरों अंग्रेज़ी चिट्ठों की सारी की सारी सामग्री को चोरी कर नए, उन्हें एक ही सर्वर पर, नए नए विचित्र नाम युक्त चिट्ठों में प्रकाशित किया गया है. यह सारा धंधा जाहिर है, एडसेंस के जरिए कमाई के लिए ही किया गया है. सर्वर पर वर्डप्रेस की सहायता से ये चोरी की सामग्री युक्त ब्लॉग बनाए गए हैं. विशेष बात यह है कि इसमें बहुत सारे देसी ब्लॉग हैं - भारतीयों द्वारा लिखे जाने वाले ब्लॉग. चोरी की सामग्री से बनाए गए स्पैम ब्लॉगों को स्प्लॉग भी कहा जाता है. ब्लॉगर में भी ऐसे स्प्लागों की भरमार है, तथा आए दिन उसे इन स्प्लॉगों की बढ़ती संख्या से जूझना पड़ता है. वर्डप्रेस को ऐसे स्प्लॉगों से मुक्त माना जाता है, परंतु चोरों ने अपने खुद के सर्वर पर खुद का वर्डप्रेस संस्करण लगाकर वर्डप्रेस के सुरक्षा हथियार को भी बौना कर दिया है.

कोढ़ में खाज यह है कि यहाँ पर आपके चिट्ठों की सामग्री से सारे लिंक हटाकर उसमें बेतरतीब तरीके से फोटोलीच, रेफरललूट जैसे फ़िशिंग/पॉर्न साइटों की कड़ियों को स्वचालित तरीके से जोड़ा गया है. जाहिर है, आप अपने लेखों पर ऐसी कड़ियों को कतई पसंद नहीं करेंगे.

वर्डप्रेस को इसकी सूचना देने पर उनका जवाब आया:

"यह हमारे WordPress.com द्वारा होस्ट नहीं किया गया है, अतः हम कुछ नहीं कर सकते. देखें कि ब्लॉग को कौन होस्ट कर रहा है.

शुभकामनाएँ,
लॉयड"

चोरी के ब्लॉगों की होस्टिंग गोडैडी.कॉम द्वारा की जा रही है. इसे दिसम्बर 06 में एक साल के लिए रजिस्टर कराया गया है और जनवरी 07 तक, मात्र दो महीनों में ही इसमें कुल 17 हजार चिट्ठा दर्ज हो चुके हैं. इन चिट्ठों में, जैसी कि संभावना है, ज्यादातर सामग्री चोरी की ही है. गोडैडी.कॉम तथा एडसेंस को इसकी सूचना दी जा चुकी है, परंतु प्रत्युत्तर नहीं आया है.

अगर आप या आपके मित्र अंग्रेज़ी में भी चिट्ठा लिखते हैं तो डस्कडायरी पर एक बार अवश्य खोजबीन करें और यदि नकल/चोरी पाते हैं तो इसकी सूचना गोडैडी.कॉम तथा एडसेंस को अवश्य दें ताकि इस जाल स्थल पर प्रतिबंध लगाया जा सके व इसके इस चोरी के धंधे को बन्द कराया जा सके. कुछ उदाहरण निम्न हैं:

http://raviratlami1.blogspot.com/ की सामग्री चोरी कर http://pyro1620.duskdiary.com/ पर प्रकाशित किया गया है तथा

http://alternative-theory.blogspot.com/ को चोरी कर http://kelell4u.duskdiary.com/ पर प्रकाशित किया गया है... इत्यादि .... इत्यादि.

और, जैसे कि सुनील के चिट्ठे के साथ हुआ था, कौन जाने कल हिन्दी की सामग्रियों की भी चोरी की जाने लगे? हमें ऐसे चोरों के मंसूबों पर पानी फेरना ही होगा.

देबाशीष को धन्यवाद - पहले पहल इस चोरी की सूचना देने के लिए.

अपडेट - हल्ला मचाने पर मेरे अंग्रेज़ी चिट्ठे की सामग्री चोरी कर बनाया गया ब्लॉग पायरो को मिटा दिया गया है. परंतु अब भी बहुत से चोरी की सामग्री के ब्लॉग डस्क डायरी में हैं.

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नया ब्लॉगर यूँ तो ढेरों सुविधाओं के साथ उपलब्ध है, और इसमें नित नई चीज़ें जुड़ती जा रही हैं, और जुड़ती जाती रहेंगीं. आखिरकार इंटरनेट के सबसे बड़े व सबसे ज्यादा तेज़ी से विकसित हो रहे गूगल का वरदहस्त इस पर जो है.

फिर भी, कई दफ़ा इसमें मनवांछित चीज़ें हमें इसमें अंतर्निर्मित नहीं मिल पातीं. वैसे भी, किसी भी दिए गए समय में, कोई भी अनुप्रयोग, हर उपयोक्ता की हर जरूरत को पूरा नहीं कर सकता.

ऐसे में आवश्यकता होती है हैक्स की. यानी कि वर्तमान सुविधाओं में, कानूनी रूप से बंधे हुए ही, सोर्स में कुछ फेर-बदल कर आवश्यकतानुसार नई विशेषताएँ जोड़ना. व्यक्तिगत तौर पर ही सही, आम तौर पर प्रोग्रामर्स प्राय: अपने अनुप्रयोगों में ऐसी तीमारदारियाँ करते फिरते हैं.

विकिपीडिया पर एक ऐसा ही खंड नए व पुराने (क्लासिक) ब्लॉगर हैक्स के लिए भी बनाया गया है. वहाँ पर आप ब्लॉगर से संबंधित ढेरों हैक्स पाएंगे. जैसे कि नए ब्लॉगर में तीन कॉलम का टैम्प्लेट कैसे बनाना, कैलेण्डर कैसे जोड़ना, 25 नई टिप्पणियाँ कैसे दिखाना इत्यादि इत्यादि... हर हैक्स को वर्णानुक्रम में जमाया गया है. आपको अपनी पसंद का हैक नहीं मिलता है तो आप अपनी इच्छा भी उसमें लिख सकते हैं. और यदि आपने कोई तीर मारा है - यानी कि ब्लॉगर के लिए कुछ नया हैक किया है तो आप उसे भी जोड़ सकते हैं.

ब्लॉगर प्रेमियों के लिए अत्यंत काम की कड़ी : विकी पर ब्लॉगर के लिए हैक

संबंधित आलेख: नए ब्लॉगर में साइडबार में कड़ियाँ कैसे डालें

नए ब्लॉगर में हेडर इमेज कैसे डालें

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बिहारी बाबू फ्रस्टिया रहे हैं ऐश्वर्याराय की शादी के कारण और ऊपर से करेले पर नीम चढ़ा बना रहे हैं गूगल मियाँ :)

लगता है गूगल मियाँ अब हिन्दी में लिखा ऐश्वर्या-अभिषेक समझने लगे हैं इसीलिए बिहारी बाबू को जरा ज्यादा जलाने को अंग्रेज़ी में ही सही, ऐश्वर्या-अभिषेक को संदर्भित विज्ञापन में ले आए हैं. (यह स्क्रीनशॉट मेरे कमप्यूटर का है, और यकीन मानिए, असली है - कोई काटो-चिपकाओ संपादन नहीं :)

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इसके कई तरीके हैं.

आसान सा तरीका है -

हेडर इमेज वाला टैम्प्लेट चुनें, जैसे कि हार्बर. फिर डैशबोर्ड में जाएँ, और टैम्प्लेट टैब पर Edit Html को क्लिक करें.

आपके सामने संपादन योग्य बक्से पर आपके टैम्प्लेट का एचटीएमएल कोड खुलेगा. वहाँ पर Page Structure खंड में Wrap 2 तथा Wrap 3 मिलेंगे उनके बैकग्राउण्ड यूआरएल को मिटा दें, तथा Wrap 4 के बैकग्राउण्ड यूआरएल को अपने चित्र के यूआरएल से बदल दें. टैम्प्लेट सहेज लें. आपके ब्लॉग हेडर में आपका मनपसंद चित्र आ गया है.

दूसरा तरीका भी आसान सा ही है, बस कुछ चरण ज्यादा हैं.

यह तरीका किसी भी टैम्प्लेट में काम करेगा. (यदि आपने पहले से ही हेडर में चित्र वाला टैम्प्लेट चुना है तो ऊपर दी गई विधि से चित्रों के यूआरएल को मिटाना होगा). इस तरीके के लिए भी आपको टैम्पलेट एचटीएमएल संपादित करना होगा. टैम्प्लेट के सबसे निचले हिस्से में जाएँ. वहाँ आपको यह कोड दिखाई देगा-

<b:section class='header' id='header' maxwidgets='1' showaddelement='no'>

इसे बदल कर कर दें

<b:section class='header' id='header' maxwidgets='4' showaddelement='yes'>

यदि आपको किसी टैम्प्लेट में showaddelement='no' नहीं मिलता तो उसे maxwidgets='4' के बाजू में जोड़ दें और टैम्प्लेट सहेजें.

लेआउट में जाएँ, आपको हेडर के लिए Add Page Element का विकल्प मिलेगा. उसे क्लिक करें, व Add Picture चुनें.

सम्पन्न!

(चेतावनी : इस काम को अंजाम देने के पहले अपना टैम्प्लेट सहेज लें तथा टेस्ट ब्लॉग बनाकर जाँच लें, फिर अपने ब्लॉग पर लागू करें)

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(एएक्सएन प्रतिबंधित)

यूट्यूब के गांधी वीडियो पर बंदिश की कोशिशों की सरकारी मूर्खता की कहानी अभी खत्म ही नहीं हो पाई थी कि उसी तरह की एक नई कहानी आ गई.

केंद्र सरकार ने सोनी नियंत्रित एएक्सएन चैनल पर दो माह के लिए भारत देश के भीतर प्रसारण पर प्रतिबंध लगा दिया है.

प्रतिबंध इस लिए लगाया गया है कि एएक्सएन ने अपने किसी प्रसारण में अश्लील सामग्री प्रसारित की. उक्त अश्लील प्रसारण का नाम था - वर्ल्ड्स सेक्सिएस्ट कमर्शियल.

दरअसल, एएक्सएन पर यह सीरियल कोई नया नहीं था. इस सीरियल में तमाम विश्व के विविध उत्पादों के उन विज्ञापनों को दिखाया जाता था जो तथाकथित हॉट की श्रेणी में आते हैं - ऐसे कुछेक सीरियल तो मैंने भी देखे हैं, रोमांटिक दृष्टिकोण से वे थोड़े से गर्म तो होते हैं, परंतु अश्लील तो कतई नहीं.

एएक्सएन एक पे चैनल है, जिसे उपयोक्ता पैसे देकर देखता है. उपयोक्ता की मर्जी है कि वह उस चैनल को देखे या न देखे. अगर वह उसे उसके नियमित मासिक सब्सक्रिप्शन राशि का भुगतान देकर देखता है, तो निश्चित रूप से उसकी सामग्री के प्रति वह खुद जवाबदार होता है कि वह क्या देख रहा होता है और क्या नहीं. यह ठीक वैसे ही है जैसे आप कनाट प्लेस के पालिका बाजार से तमाम किस्म के सीडी लाकर फ़िल्में देखते हैं. वैसे भी एएक्सएन पर 30 सेकण्डस ऑफ़ फ़ेम, हू डेयर्स विन्स, बिकिनी आइलैंड, गिनीज़ रेकॉर्ड, रिप्लीज़ बिलीव इट आर नाट जैसे खासे लोकप्रिय और ज्ञानवर्धक सीरियल आते हैं और इनमें कुछेक में ऐसी सामग्री आमतौर पर दिख जाती है जिसमें तथाकथित मॉरल पुलिसिया दिमाग के व्यक्तियों को तकलीफ़ें हो सकती हैं. परंतु यह तकलीफ़, जाहिर है उनके गंदे दिमागों के भीतर होती है. और, ईमान की बात तो ये है कि किसी भी नए ताज़े हिन्दी फ़िल्म और रीमिक्स वीडियो के बस्ट शैक्स और पेल्विक थ्रस्टों को आप देख लें, वे इन कमर्शियलों से कहीं ज्यादा अश्लील हैं- और वे धड़ल्ले से हम सबके ड्राइंग रूम में मय परिवार देखे जाते रहे हैं.

एएक्सएन पर दो माह के लिए सरकारी प्रतिबंध लगाकर सरकार न जाने क्या दिखाना चाहती है. दो माह के लिए एएक्सएन के जेनुइन दर्शक, चैनल से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी-विज्ञापनदाता इत्यादि सब पर प्रतिबंध लगाया गया है. एएक्सएन चैनल मेरा पूरा परिवार देखता है - जाहिर है, यह प्रतिबंध मुझ पर, मेरे परिवार पर भी लगाया गया है. अब यह सरकार मुझ पर प्रतिबंध लगा रही है - मेरे परिवार पर प्रतिबंध लगा रही है कि मैं क्या देखूं और क्या नहीं!

आजादी के साठ साल हो गए और सरकार अभी भी जवान नहीं हुई - उसे एडल्ट किस्म की किसी भी सामग्री से नकली दिक्कतें होने लगी है, या उसका दिमाग सठिया गया है?

इलाहाबाद के अर्धकुंभ मेले जैसे स्थलों में खुले आम गांजा पीते सैकड़ों की संख्या में नंगे साधुओं को तो हम और हमारी सरकार खुलेआम स्वीकार करते हैं, परंतु किसी प्रसारण में थोड़ी सी नग्नता नहीं! क्या विरोधाभास है.

*-*

व्यंज़ल

**-**

मेरा दिमाग मुझसे रुठिया गया है

और नहीं तो जरूर सठिया गया है


सोचता बैठा रहा था मैं तमाम उम्र

अब तो जोड़-जोड़ गठिया गया है


भला किस तरह मानेगी सरकार

इसका हर अंग जो हठिया गया है


वक्त की ज़ंजीरों को सुलझाते हुए

मेरे भीतर का मर्द पठिया गया है


जुबान बन्द कर ली है मैंने रवि

हर कोई मुझे जो लठिया गया है

**-**

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नए ब्लॉगर पर कड़ियाँ
नए ब्लॉगर की खूबी यह है कि इसमें आपको अपने ब्लॉग को सजाने-संवारने के लिए एचटीएमएल भाषा संपादन का जानकार होना कतई आवश्यक नहीं है. सारा कार्य खींचो-व-छोड़ो (ड्रैग एंड ड्रॉप) तथा आसान चित्रमय-इंटरफेस के जरिए किया जा सकता है.

हाल ही में दिव्याभ व संजय सहित कुछ अन्य हिन्दी चिट्ठाकारों को अपने ब्लॉगर ब्लॉग में साइडबार में कड़ियों को जोड़ने में समस्याएँ आईं. इसका आसान सा हल कुछ यूँ है:

नए ब्लॉगर में नया, विशेषताओं युक्त टैम्प्लेट इस्तेमाल करें. पुराने क्लासिक टैम्प्लेट में आपको पूरी सुविधा नहीं मिलेगी, जिसमें ऊपर वर्णित सुविधाएँ भी सम्मिलित हैं.

नए ब्लॉगर में साइडबार में जाल-स्थलों की कड़ियाँ लगाने हेतु निम्न, चरण-दर-चरण कार्य हैं:

चरण 1 ब्लॉगर में लॉगइन कर ब्लॉगर डैशबोर्ड में जाएँ व अपना चिट्ठा, जिसमें आप साइड बार में कड़ियाँ लगाना चाहते हैं, उसके लेआउट को क्लिक करें. आपके सामने टैम्प्लेट का पेज-एलिमेंट पृष्ठ खुलेगा.

चरण 2 पेज-एलिमेंट पृष्ठ पर आपके पूर्व चयनित ब्लॉग टैम्प्लेट के अनुसार पेज एलिमेंट विंडो खुलेगा. जैसे कि आपके ब्लॉग टैम्प्लेट का साइडबार दाईं तरफ है तो Add a page element कड़ी युक्त साइडबार दाईं तरफ दिखाई देगा अन्यथा बाईं तरफ दिखाई देगा. इस कड़ी को क्लिक करें.

चरण 3 Choose a new page element नाम का एक नया विंडो खुलेगा जिसमें आपके पास अपने ब्लॉग में कई सारे पृष्ठ अवयवों को जोड़ने के विकल्प होते हैं. साइडबार में कड़ियाँ जोड़ने हेतु Link List के नीचे दिए गए Add to Blog बटन को क्लिक करें.

चरण 4 Configure Link List नाम का एक नया पॉपअप विंडो खुलेगा जिसमें Title इनपुट बक्से में कड़ियों के लिए सार्थक नाम भरें जैसे कि - मेरी कहानियाँ. फिर New site url में उस कड़ी का यूआरएल भरें जिसकी कड़ी आप देना चाहते हैं. उदाहरण के लिए http://pratimanjali.blogspot.com/2007/01/blog-post_16.html जो कि प्रतिमांजलि पर प्रकाशित हैप्पी न्यूईयर कहानी का यूआरएल है. New site name में उस कड़ी का नाम दें जो कि जाहिर है होगा - हैप्पी न्यूईयर. इसके बाद Add Link को क्लिक करें. यह कड़ी अब आपके ब्लॉग में जुड़ चुकी है.

चरण 5 अतिरिक्त कड़ियाँ जोड़ने हेतु हर बार न्यू साइट यूआरएल में कड़ी का यूआरएल भरें तथा न्यू साइट नेम में उस कड़ी का नाम दें, तथा एड लिंक को क्लिक करें. इस तरह आप ढेरों कड़ियाँ बना सकते हैं.

चरण 6 यदि आप अन्य, नए विषय - जैसे कि मेरी ग़ज़लें शीर्षक के अंतर्गत कड़ियाँ बनाना चाहते हैं तो चरण 3 से फिर से आरंभ करें व Title में नया शीर्षक भर कर कर नई कड़ियाँ डालें.

है ना आसान? हैप्पी ब्लॉग लिंकिंग. और, इस नए ब्लॉगर में इस तरीके से कड़ियाँ डालने पर आपके ब्लॉग टैम्प्लेट की सेटिंग खराब भी नहीं होगी जैसा कि दिव्याभ के साथ हो रहा था - साइड बार में कड़ियाँ डालने पर कड़ियाँ बाजू में प्रदर्शित होने के बजाए पृष्ठ के नीचे प्रदर्शित होने लगी थीं.

चरण 0 : पहला महत्वपूर्ण चरण: पहले एक टेस्ट ब्लॉग बनाएँ, सारा नया प्रयोग यहाँ करें, पूरी तरह संतुष्ट व सफल होने पर फिर उन सेटिंग्स को अपने ब्लॉग पर लागू करें.

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हिन्दी व मराठी का पाठ से वार्ता (टैक्स्ट टू स्पीच प्रोग्राम) जारी..

वैसे तो विंडोज़ तंत्र के लिए वाचक नाम का हिन्दी का पाठ-से-वार्ता प्रोग्राम (टेक्स्ट टू स्पीच) कुछ समय से उपलब्ध है, परंतु लिनक्स तंत्र के लिए ऐसा कोई प्रोग्राम अब तक अनुपलब्ध था.
हाल ही में सीडॅक मुम्बई की भाषा कम्प्यूटिंग समूह - जनभारती ने हिन्दी व मराठी के लिए पाठ-से-वाचन प्रोग्राम का अल्फ़ा संस्करण जारी किया है. वस्तुतः यह लिनक्स तंत्र के लिए पहले से उपलब्ध फ़ेस्टिवल नाम के पाठ-से-वार्ता नाम के स्पीच इंजिन के एक्सटेंशन के रूप में काम करता है. इसका अर्थ है कि इसका इस्तेमाल करने के लिए आपके लिनक्स तंत्र में पहले से ही फ़ेस्टिवल संस्थापित होना आवश्यक है. फ़ेस्टिवल एक क्रास प्लेटफ़ॉर्म स्पीच सिंथेसाइजर है जिसे विंडोज, लिनक्स, मॅक, बीएसडी, सन-स्पार्क इत्यादि सभी में इस्तेमाल किया जा सकता है.
जाहिर है, आपके लिनक्स तंत्र में यदि फ़ेस्टिवल संस्थापित नहीं है तो पहले उसे संस्थापित करें. प्रोग्राम संस्थापनाओं की जानकारी हेतु यह कड़ी देखें.
हिन्दी फ़ेस्टिवल यहाँ से डाउनलोड कर संस्थापित करें:
http://janabhaaratii.org.in:9673/indicbhaaratii/Members/Priti_Patil/festival-hi-0-1-tar.gz
मराठी भाषा का पैक यहाँ पर है:
http://janabhaaratii.org.in:9673/indicbhaaratii/Members/Priti_Patil/festival-hi-0-1-tar.gz
हिन्दी पैक की संस्थापना आसान है. बस आपको इस पैक को अ-संपीडित कर इसमें समाहित install.sh स्क्रिप्ट को चलाना है. बस.
हाँ, हिन्दी पाठ से वार्ता प्रोग्राम को चलाना थोड़ा कठिनाई भरा होगा यदि आपने फ़ेस्ट्वल के लिए कोई ग्राफ़िकल फ्रंटएण्ड संस्थापित नहीं किया है. हिन्दी पाठ-से-वार्ता प्रोग्राम तीन चरणों में प्रारंभ होगा-
1 टर्मिनल पर फ़ेस्टिवल प्रारंभ करें
2 फ़ेस्टिवल कमांड प्राम्प्ट पर हिन्दी वार्ता सक्षम करने के लिए कमांड दें
3 किस हिन्दी पाठ फ़ाइल को पढ़ना है उसके लिए कमांड दें
कमाण्ड सिण्टेक्स निम्नानुसार होगा:
$ festival
festival> (voice_hindi_NSK_diphone)
festival> (tts "/home/sample.txt" nil)
यहाँ पर /home/sample.txt यूनिकोड हिन्दी पाठ फ़ाइल का पथ है, जिसे कि पढ़ा जाना है.
प्रोग्राम को चलाकर देखने पर महसूस हुआ कि यह मशीनी आवाज में हिन्दी पढ़ता है तथा अगर आप अपने पाठ में उचित स्थल पर स्पेस या विराम चिह्न नहीं लगाते हैं तो यह पाठ को एक लय व गति में लगातार पढ़ता जाता है जो कि अजीब लगता है, व समझ में भी नहीं आता. इसके विपरीत विंडोज का वाचक प्रोग्राम ज्यादा अच्छा है, व उसकी आवाज भी मशीनी नहीं लगती. साथ ही यह कुछ शब्दों को जिनको यह पढ़ नहीं पाता, छोड़ देता है. फिर भी, चूंकि यह अभी अपने अल्फ़ा अवतरण में है, इन्हें नज़र अंदाज किया जा सकता है, और भविष्य में इसके एक बढ़िया सुघड़ हिन्दी स्पीच इंजिन के रूप में विकसित होने की पूरी आशा रखी जा सकती है.
जनभारती टीम को इस सराहनीय उपलब्धि के लिए बधाईयाँ!
मैंने निम्न पाठ (अभी यह सिर्फ text फ़ाइलों को समर्थित करता है) को इस स्पीच इंजिन से पढ़ाया और इसे रेकॉर्ड कर लिया. इसका एमपी3 फ़ाइल (1 मे.बा.) यहाँ है जिसे आप डाउनलोड कर या स्ट्रीम कर सुन सकते हैं.
पाठ:
एक घिसा पिटा चुटकुला सुनिए
एक ग्राहक - दूध वाले से पूछता है -- क्यों बे, दूध इतना पतला क्यों है
तो दूध वाला पलट कर जवाब देता है - क्या करूं साहब, अबकी मेरी गाय ही पतली हो चली है.
एक दूसरा घिसापिटा, चुटकुला सुनिए
विमल, अपने दोस्त से कहता है - यार, मैं उससे शादी करूंगा जो सुन्दर हो, बुद्धिमान हो, भली हो और सुघड़ हो.
विमल का दोस्त उसे समझाता है - वो तो ठीक है यार परंतु , अपने देश में चार - चार शादियों की मनाही है.
कर्मण्येवाधि कारस्ते मा फलेशु कदाचनः
ऊं भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गोदेवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात्
ऊं नमः शिवाय
या अली
वाहे गुरू
जय यीशु
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अद्यतन : इसका ऑनलाइन, मुफ़्त संस्करण यहाँ से प्रयोग कर सकते हैं:

http://vozme.com/index.php?lang=hi

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इंडीवर्ड : एक नया बहुभाषी ऑनलाइन शब्द संसाधक

एक नया ऑनलाइन (वस्तुतः बहुभाषी) हिन्दी शब्द संसाधक बीटा स्वरूप में जारी किया गया है. इंडीवर्ड नाम के इस ऑनलाइन हिन्दी शब्द संसाधक में निम्न खूबियां हैं -

1 यह इंटरनेट एक्सप्लोरर के साथ साथ फ़ॉयरफ़ॉक्स पर भी चलता है

2 अन्य ऑनलाइन कुंजीपटों के विपरीत यह ब्राउज़र विंडो में तीव्र गति से चलता है.

3 हिन्दी के अतिरिक्त अन्य भारतीय भाषाओं का समर्थन है, तथा इन भाषाओं में लिपि परिवर्तन की सुविधा ऑनलाइन है.

4 चार कुंजीपटों का समर्थन है - सिस्टम, फ़ोनेटिक, इनस्क्रिप्ट, आईट्रांस

5 असीमित अनडू-रीडू समर्थन

6 इसे आसानी से जाल स्थलों पर इंटीग्रेट किया जा सकता है. इसका मीडिया विकि के साथ जुड़ा तमिल संस्करण यहाँ देखें-

http://te.indiwiki.org/

भविष्य में इसमें रिच-टेक्स्ट संपादन विशेषता जोड़ने की योजनाएँ हैं - ऐसा इसके विकासकर्ता कृष्ण मोहन का कहना है.

जाँच करें व अपने बग रपट यहाँ भेजें - gkmohan at gmail dot com

संबंधित आलेख : हिन्दी राइटर डिजिट पर

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देवेन्द्र पारख का हिन्दी राइटर डिजिट सीडी पर

जी हाँ, देवेन्द्र पारख का मुफ़्त सॉफ़्टवेयर - हिन्दी राइटर संस्करण 1.4.a , डिजिट पत्रिका के जनवरी 2007 के अंक के साथ उपलब्ध सीडी में संलग्न किया गया है.

इससे निश्चित रूप से डिजिट पत्रिका के लाखों पाठकों को न सिर्फ इसकी जानकारी मिल सकेगी, बहुतों के लिए, जो हिन्दी के बारे में कम जानकारी रखते हैं या जान नहीं पाते, नई संभावनाएँ पैदा करेगा.

देवेन्द्र को बधाई!

संबंधित विषयों पर अन्य आलेख:

आशीष का हिन्दी औजार

हिन्दी में ऑफ़िस सूट

हिन्दी शब्द संसाधक

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डॉग शिट स्क्वॉड का यही तो अर्थ होगा ना? कुत्ता मल बल भी कह सकते हैं. इससे ज्यादा भला लगने वाला नाम आपको सूझे तो जरूर सुझाएँ. बहरहाल, बात कुत्तों के मल विसर्जन की हो रही है.

इंडियन एक्सप्रेस की स्तंभकार तवलीन सिंह मुम्बई में मरीन ड्राइव पर सुबह-सुबह अपने पालतू कुत्ते को टहलाने निकलीं. उनका कुत्ता सामाजिक रूप से सभ्य, ट्रेण्ड कुत्ता था जो सुबह बाहर टहलाने निकाले जाने पर ही उपयुक्त, पवित्र स्थान को सूंघ-सांघ कर मल मूत्र विसर्जन करता था.

तवलीन का कुत्ता मरीन ड्राइव के ऐसे ही किसी पवित्र स्थल को और अधिक पवित्र कर रहा होगा, इतने में मुम्बई महानगर निगम का एक कर्मचारी उनके पास पहुँचा और तवलीन से कहा कि या तो वह तत्काल ही उनके कुत्ते द्वारा उत्सर्जित मल मूत्र को साफ करे अन्यथा उन्हें पाँच सौ रुपया जुर्माना भरना पड़ेगा.

तवलीन ने पूछा कि भाई मेरे तुम हो कौन किस हैसियत से बात कर रहे हो और ये कौन सा कानून है?

उस व्यक्ति ने बताया कि वह नए-नए बनाए गए विभाग कुत्ता टट्टी बल से है और उसका काम है - जो लोग अपने पालतू कुत्तों को सुबह सुबह लेकर घूमने निकलते हैं उस पर नजर रखना ताकि उनके कुत्ते सरे आम खुले में मल मूत्र विसर्जित न करें. अगर करें तो उनके मालिक वहीं तत्काल साफ करें अन्यथा वह कानून के तहत पाँच सौ रुपयों का जुर्माना वसूलता है.

तवलीन ने कहा - भाई मेरे, यह तो ठीक है, लेकिन जो आवारा कुत्ते सरे आम घूमते रहते हैं और जो मुम्बई के तमाम कुत्तों का 99.99 प्रतिशत है उनके मल मूत्र विसर्जन का क्या हिसाब है. और कुत्तों का मल-मूत्र तो बायो-डिग्रेडेबल है, अगर लोग अपने साथ इन्हें साफ करने के लिए हाथ में पॉलिथीन लेकर चलें, मल को पॉलिथीन में भरकर यहाँ वहां या चलो, कूड़ेदान में ही फेंक दें तो समस्या तो और गंभीर हो जाएगी. और यदि यह स्थान कांच की तरह साफ होता तो जरूर इसके तत्काल साफ करने में कोई बात दिखती है. यह स्थल तो पहले ही बहुत गंदा है.

कुत्ता टट्टी बल के उस व्यक्ति को कुछ समझ में नहीं आया. उसने मोबाईल पर अपने उच्चाधिकारियों से सम्पर्क किया. वहां से जाहिर है, नियमानुसार काम करने की हिदायत दी गई.

तवलीन के पास अपने कुत्ते की मल मूत्र साफ करने का कोई साधन उस समय नहीं था, और न ही वह इस बेकार के अटपटे कानून के 500 रुपये जुर्माना भरना चाहती थी, लिहाजा उन पर इस के जुर्म में एक प्रकरण दर्ज किया गया जिसका निर्णय आने में शायद दस-बीस साल तो स्वाभाविक रूप से लग ही जाएंगे...

जिस देश में हर संभावित स्थलों पर पान की पीकों के दाग, पॉलिथीन के थैले, कचरा, गोबर दिखाई देता है वहाँ पालतू कुत्तों के मल पर यह कानून और यह स्क्वाड... अच्छा है! शायद आवारा पशुओं को कुछ अक्ल आ जाए, और पान की पीकें उगलने वालों को भी!

संबंधित व्यंग्य / आलेख : गंदे लोग

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हिन्दी कम्प्यूटिंग का रजत जयंती वर्ष...

कुछ समय पहले मैंने भोपाल के रवींद्र भवन में हिन्दी कम्प्यूटिंग के पच्चीस वर्ष विषय पर एक प्रस्तुति दी थी. जिसका विवरण यहाँ पर है.

यह प्रस्तुति आपके अवलोकनार्थ मॅक्रोमीडिया फ्लैश में है, जिसे आप इस कड़ी को क्लिक कर देख सकते हैं:

http://raviratlami.googlepages.com/hindi-computing.html

आप चाहें तो इसे डाउनलोड भी कर सकते हैं. डाउनलोड की कड़ी है:

http://raviratlami.googlepages.com/hindi-computing.swf

(यह 4 मेबा फ़ाइल है)


प्रकटतः जितनी प्रगति होनी चाहिए थी, उतनी तो नहीं ही हुई, परंतु संतोष की बात है कि अब चक्र ने गति पकड़ ली है, और अब पहिया थमेगा नहीं....


संबंधित आलेख: इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए, गौरवशाली 150 वां अंक

प्रभासाक्षी : हिन्दी के बढ़ते कदम - मासिक हिट्स 1 करोड़ के कगार पर


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बालेंदु व प्रभासाक्षी को बधाईयाँ!

हिंदी हिंदी के प्रमुख समाचार-विचार पोर्टल प्रभासाक्षी.कॉम पर होने वाले दैनिक हिट्स की संख्या तीन लाख से अधिक हो गई है। दो जनवरी को पोर्टल पर तीन लाख एक हजार हिट दर्ज किए गए। प्रभासाक्षी प्रबंधन ने सन 2006 के अंत तक पोर्टल के दैनिक हिट्स की संख्या तीन लाख से अधिक हो जाने की संभावना जताई थी जो सटीक सिद्ध हुई। इस तरह, इंटरनेट पर हिन्दी पाठकों की कुल संख्या के करीब पंद्रह फीसदी हिस्से पर काबिज इस पोर्टल के मासिक हिट्स भी बढ़कर 85 लाख से अधिक हो गए हैं. उम्मीद है कि अगले तीन महीनों में पोर्टल के मासिक हिट्स की संख्या एक करोड़ का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लेगी.

याद रहे, प्रभासाक्षी.कॉम के संपादक बालेन्दु दाधीच को तकनीकी क्षेत्र में उनके योगदान के लिए माइक्रोसॉफ्ट की तरफ से 'मोस्ट वेल्यूएबल प्रोफेशनल 2007' पुरस्कार प्रदान किया गया था। प्रभासाक्षी की लोकप्रियता निरंतर बढ़ रही है और पिछले एक साल में इस पर आने वाले इंटरनेट उपयोक्ताओं (सर्फरों) की संख्या लगभग तीन गुना हो गई है। हिंदी भाषी अप्रवासी भारतीयों और छोटे शहरों के हिंदी पाठकों के चहेते इस पोर्टल ने हिट्स के मामले में 26 अप्रैल 2006 को ढाई लाख का आंकड़ा पार किया था। प्रभासाक्षी ने प्रचार आदि पर भारी भरकम खर्च किए बिना अपनी संपादकीय और तकनीकी क्षमताओं के बल पर तीन लाख का आंकड़ा पार किया है। प्रभासाक्षी पर होने वाले हिट्स को लगातार वेबलॉगएक्सपर्ट और वेबट्रेंड्स सॉफ्टवेयरों की मदद से मॉनीटर किया जाता है।

निरंतर बढ़ती लोकप्रियता

प्रभासाक्षी.कॉम का संचालन द्वारिकेश संवाद लिमिटेड करता है जो श्री गौतम मोरारका के नेतृत्व वाले द्वारिकेश समूह का उपक्रम है। बालेन्दु दाधीच के संपादन में प्रकाशित किए जा रहे इस पोर्टल के हिट्स में लगातार वृध्दि का कारण उसकी स्वच्छ, सूचनापरक और विशद सामग्री, समाचार देने की गति, तकनीकी श्रेष्ठता व सरलता तथा प्रसिध्द व अनुभवी लेखकों का जुड़ाव माना जाता है। प्रभासाक्षी.कॉम का लक्ष्य भारत से संबंधित सूचनाओं का विश्वसनीय हिंदी स्रोत बनना है और वह सनसनीखेज या उत्तोजक सामग्री के प्रयोग से बचता है। समाचारों के मामले में भी यह पोर्टल पूरी तरह निष्पक्ष संपादकीय नीति पर चलता है और सभी पक्षों के विचारों को समान रूप से कवर करता है। प्रभासाक्षी में प्रयुक्त सामग्री परंपरा और नवीनता के प्रति संतुलन पर आधारित होती है। प्रगतिशील विचारों पर आधारित होने के बावजूद यह पोर्टल भारतीय संस्कृति के उज्ज्वल पक्षों के प्रति गहरा सम्मान और लगाव दिखाता है और साथ ही साथ दकियानूसी और कट्टरपंथी विचारों के विरोध में खड़ा रहता है।

पिछले एक साल में प्रभासाक्षी के पाठकों के अनुपात में भी बहुत दिलचस्प और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। साल भर पहले जहां इस पोर्टल के 65 फीसदी पाठक अनिवासी भारतीय तथा विदेशी थे वहीं अब उनकी संख्या घटकर लगभग पच्चीस फीसदी रह गई है और स्वदेशी पाठकों की संख्या बढ़कर 75 फीसदी तक जा पहुंची है। यह इस बात का परिचायक भी है कि भारत के छोटे शहरों और कस्बों में भी इंटरनेट का प्रचलन धीरे-धीरे बढ़ रहा है और हिंदी पाठकों में इंटरनेट के प्रयोग की अभिरुचि बढ़ रही है।

पिछले पांच साल की अवधि में प्रभासाक्षी भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में रहने वाले हिंदी पाठकों के बीच भी अपनी जगह बनाने में सफल रहा है। भारत से विदेश गए लोगों को उनकी भाषा, भूमि और संस्कृति से जोड़े रखना इसके उद्देश्यों में प्रमुख है। जिन देशों में प्रभासाक्षी सबसे अधिक देखा जाता है उनमें अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा प्रमुख हैं। प्रभासाक्षी के कुल सर्फरों के आधे से अधिक अमेरिका से आते हैं। इस पोर्टल पर पांच श्रेणियों में समाचार और 26 श्रेणियों में गैर-समाचार सामग्री दी जाती है। प्रसिध्द लेखक-पत्रकार खुशवंत सिंह, मशहूर संपादक व मानवाधिकारवादी कुलदीप नायर, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण नेहरू, पूर्व सांसद व संपादक दीनानाथ मिश्र आदि प्रभासाक्षी के लेखकों में शामिल हैं। विख्यात हिंदी कार्टूनिस्ट काक भी इससे जुड़े हुए हैं।

स्रोत: प्रभासाक्षी


(क्या यह बताना उचित रहेगा कि मेरे आलेख भी प्रभासाक्षी में आते रहे हैं? - रवि :) )

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इंटरनेट एक्सप्लोरर के बगैर काम नहीं चलेगा भाई...

बीएसएनएल 1 जनवरी 2007 से अपने ब्रॉडबॅण्ड की दरों में खासी कमी कर रहा है. इस खुशी के मौके पर उनके जाल स्थल पर अपना ब्रॉडबॅण्ड इस्तेमाल की जानकारी लेने पहुँचा तो क्या पाया?

(ऊपर दिए गए स्क्रीनशॉट ने) मेरा अभिनंदन कुछ यूँ किया :

माफ़ कीजिएगा, आईई (इंटरनेट एक्सप्लोरर) चाहिए.

आईई क्यों? ऑपेरा, मॉज़िल्ला या फिर कॉन्करर क्यों नहीं? इसके माने कि जो विंडोज इस्तेमाल नहीं करते हैं (सुन रहे हैं उन्मुक्त जी?), सिर्फ लिनक्स या मॅक इस्तेमाल करते हैं उनके लिए बीएसएनएल के जाल-स्थल के दरवाजे तो पूरी तौर से बन्द? यह तो जबरदस्ती आईई इस्तेमाल करने के लिए ललकारे जाने वाली बात हुई!

जहाँ माइक्रोसॉफ़्ट द्वारा ब्लॉगरों को लॅपटॉप के घूँस दिए जाने की चर्चा हो रही है ताकि उनके विंडोज विस्टा के बारे में (अच्छा) लिखें, क्या बीएसएनएल को आईई इस्तेमाल करने-करवाने के लिए ऐसा ही कुछ तो नहीं मिलगया...?

या बीएसएनएल के साइट एडमिनिस्ट्रेटर को यह नहीं पता कि आधी दुनिया आईई से उबर चुकी है?

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अंतत: अभिव्यक्ति / अनुभूति यूनिकोड पर

हिन्दी साहित्य को इंटरनेट पर पहचान देने में प्रतिबद्ध अभिव्यक्ति और अनुभूति ने नए साल में अंतत: यूनिकोड का आवरण पहन ही लिया.

हिन्दी के विकास को नि: संदेह इससे नई दिशा मिलेगी. हालाकि पुराने पन्ने अभी भी शुषा फ़ॉन्ट में ही हैं, परंतु अब गूगल के गैर यूनिकोडित हिन्दी को भी ढूंढ लेने की क्षमता की वजह से अब पुराने पन्नों को यूनिकोडित करना वैसे भी गैर जरूरी रह गया है.

फ़ॉर्मेटिंग में कुछ समस्या है - जैसे कि फ़ॉयरफ़ॉक्स पर सामग्री - पृष्ठ जस्टीफ़ाई होने के कारण टूटी दिखती है - परंतु इसे शीघ्र ही दूर कर लिया जाएगा ऐसी उम्मीदें हैं.

टीम अभि को बधाईयाँ.

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