September 2006

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रावण की चोरी

अजीबो-गरीब किस्म की चोरी की वारदातों के बारे में आपने सुना होगा. परंतु आपने 20 फुट ऊंचे रावण के पुतले के चोरी चले जाने की वारदात के बारे में नहीं सुना होगा. लोगों का सही कहना है. घोर कलजुग आ गया है. अब तो चोर रावण को भी चोरी कर ले जाने लगे हैं. वैसे, दूसरे विचार में, चोर राम को थोड़े ही ले जाएगा चोरी करके. सीता को भी नहीं ले जाएगा. राम जैसा सत्यवादी उसका क्या भला करेगा और सत्यवती सीता से उसे क्या मिलेगा? उन्हें भी खिलाना पिलाना जो पड़ेगा. बहुत हुआ तो राम का मुकुट और धनुष बाण - यदि वे खालिस सोने के हुए तो - चोरी कर ले जाएगा अन्यथा चोर के काम का तो रावण ही है!

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व्यंज़ल

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इस दौर में यारों सब हिसाब बदले गए
खबर ये है कि लोग रावण चुरा ले गए

प्रश्न मेरे मन में भी उठे थे बहुत मगर
जुबां पे आते आते जाने कहाँ चले गए

इन चोरों की अक्ल का अब क्या कहें
वक्त छोड़ गए, घड़ियाँ चुरा कर ले गए

वादे थे पाँच बरस में दुनिया बदलने के
रोटियों के बजाए टीवी से बहला ले गए

अंततः पराजितों में खड़ा हो गया रवि
विजेता होने के फ़ायदे कब के चले गए

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चुंबन ही चुंबन, ढेर सारे चुंबन...



पुस्तक चर्चा का खयाल जब तक मूर्त रुप लेगा, चलिए इसकी शुरूआत इस चिट्ठा-प्रविष्टि से कर डालते हैं. वैसे, मैंने पहले भी एक दो पुस्तकों के बारे में लिखा था जिसे अपने ज्ञानवर्धन के लिए, और दुनिया को बेहतर तरीके से समझने के लिए, मेरे विचार में हर व्यक्ति को पढ़ना ही चाहिए.

कोई बीस साल पहले मैंने एक किताब खरीदी थी. तब मेरी मासिक आय थी छः सौ रुपए (तब मैं विद्युत मंडल में प्रशिक्षु के रूप में कार्यरत था), और किताब की कीमत थी - एक सौ पचहत्तर रुपए. किताब स्थानीय बाजार में उपलब्ध नहीं थी और मुम्बई की किताब दुकान ‘बुक चैनल' के जरिए पंजीकृत डाक से ही मंगाई जा सकती थी. अतिरिक्त खर्च था - पच्चीस रुपए. यानी की मेरी मासिक आय का एक तिहाई हिस्सा इस पुस्तक पर खर्च होना था.

परंतु मैंने दूसरी बार कोई विचार किए बिना ही उस पुस्तक को अग्रिम राशि भेजकर मंगवाया था.

वैसे तो आज भी मैं किताबों, पत्रिकाओं, समाचार पत्रों में अपनी आय का अच्छा खासा हिस्सा खर्च करता हूँ, मगर वह किसी सूरत एक तिहाई नहीं होता, और सिर्फ एक किताब के लिए तो कतई नहीं. मैं सोचता हूँ कि उस वक्त उस एक किताब के लिए अपनी आय का एक तिहाई हिस्सा खरीदने के लिए लगा दिया था तो मैंने क्या कोई गलती की थी?

शायद नहीं. वह लाजवाब किताब अमूल्य है. पारखियों के लिए वैसे तो हर किताब अपने हिसाब से अमूल्य होता है. और अगर परख नहीं है तो किताबें रद्दी के भाव भी चले जाते हैं, और उनके पन्ने पान-गुटखों के पुड़िया बांधने के काम आते हैं.

आप पूछेंगे कि ऐसी लाजवाब पुस्तक आखिर है कौन सी?

वह पुस्तक आज भी मेरे पास है.

पुस्तक का नाम है - लाट्स ऑव किसेज़.

यह पुस्तक वस्तुतः चित्रों व कलाकृतियों का एल्बम है जिसमें ‘चुंबन' विषय पर 39 कलाकृतियाँ हैं. लिज़ा टटल द्वारा दो पृष्ठों का प्राक्कथन - चुंबन की महत्ता पर - पुस्तक के प्रारंभ में है. शेष किताब में विश्व के माने हुए कलाकारों की कलाकृतियाँ हैं - सभी एक से बढ़कर एक. प्रत्येक कलाकृति हजार पृष्ठों की भावनाएँ बयान करती है. इस हिसाब से उनतालीस कलाकृतियाँ उनतालीस हजार पृष्ठों की किताब तैयार करती है. इतने पृष्ठों की पुस्तक आज कोई भी अपने पूरे मासिक आय पर भी लेना चाहेगा! और, मैंने तो सिर्फ एक तिहाई हिस्सा ही खरचे थे.

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यूँ तो पुस्तक में चुंबन के तमाम कल्पनातीत भावों को उकेरे गए चित्र हैं, परंतु कुछ चित्र तो अपने आप में संपूर्ण और लाजवाब हैं - जैसे कि, फर्स्ट किस (प्रथम चुंबन), रिलक्टेंट किस (अनिच्छुक चुंबन), ऍरॉटिक किस (रत्यात्मक चुंबन), लांग डिस्टैंस किस (दूर चुंबन), सन किस्ड (सूर्य चुंबन), वेट किस (गीला चुंबन) इत्यादि.


पुस्तक की प्रस्तावना में लीज़ा लिखती हैं - चुंबनों के बिना भला कौन इस विश्व की कल्पना करेगा? प्यार रहस्यमयी होता है, और चुंबन वास्तविक. प्यार भौतिक सुख सुविधाओं के बगैर जिंदा रह सकता है, परंतु चुंबनों के बगैर नहीं. और, चुंबनों को तो सर्वकालिक शानदार सौदा कहा जा सकता है - हर कोई इसे लेना व देना चाहता है! अतः इन्हें विपुल मात्रा में दीजिए और फिर आश्चर्यचकित मत होइए जब वे सारे के सारे आपको वापस मिल जाएँ!

आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इस किताब को खरीदकर किसे मैंने भेंट दिया था!

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पुस्तक - लाट्स ऑव किसेज़
उच्च गुणवत्ता के ऑर्ट पेपर पर 80 पृष्ठ
आज की कीमत - पता नहीं (1984 की कीमत 4.95 पौंड)
आईएसबीएन नं. 0 905895894
प्रकाशक - पेपर टाइगर, ड्रेगन्स वर्ल्ड लि, ग्रेट ब्रिटेन. प्रथम संस्करण - 1984
टीप - पाठकों की मांग पर चिट्ठे का रुप रंग संवारा गया है. अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें.

पच्चीस साल पुरानी ग़ज़लें...

जब फुरसतिया जी ने अपनी पंद्रह साल पुरानी रचना धो-पोंछकर बाहर निकाली, उसे प्रकाशित किया और तमाम तालियाँ भी (टिप्पणियाँ) बटोर लीं , तो मुझे भी खयाल आया कि ऐसी पंद्रह क्या, मेरे पास तो बीस-पच्चीस बरस पुरानी, ‘विंटेज' करार दी जा चुकी रचनाएँ हैं, और उन्हें प्रकाशित कर मैं भी ‘एकाध' टिप्पणी तो लूट ही सकता हूँ. लिहाजा आप सभी के लिए मेरी पच्चीस साल पुरानी ग़ज़लें प्रस्तुत हैं. ये ग़ज़लें तब की हैं, जब प्रेम परवान चढ़ा हुआ था, उतार-चढ़ाव की हिलोरें ले रहा था, और, जैसे कि कहावत है, सावन में हर ओर हरा ही हरा नजर आता है - एक युवा, प्रेम में पगे कवि को हर ओर प्रेम-प्यार ही नजर आता है. वह बिजली के खम्भे को भी उसी प्रेम-मयी तीव्रता से देखता है जितना अपनी प्रेयसी को.

तो, इन ग़ज़लों में भले ही स्तरीयता न मिले, ‘ग़ज़ल' के बजाए ‘कूड़ा-करकट' महसूस हो, स्थापित लोग इन्हें ग़ज़ल के नाम पर कलंक मानें या सिर्फ घटिया तुकबंदी, मगर ये प्रेम प्यार में वैसे ही तीव्र अहसास से लिखी गई हैं जैसे ज्येष्ठ माह में चातक वर्षा की बूंदों के लिए रखता है.

और, जैसा कि फुरसतिया को अपनी पंद्रह साला पुरानी रचना के लिए मलाल था कि उस रचना ने उन्हें क्यों महान रचनाकार की पदवी नहीं दिलवाई, मुझे भी मलाल है कि मेरी इन ग़ज़लों ने मुझे स्थापित ग़ज़लकार क्यों नहीं बनाया?

बहरहाल, उन कारणों को मैं आज भी ढूंढ रहा हूं. तब तक आप पढ़ें इन अ-संपादित, अब तक अप्रकाशित ग़ज़लों (न, न - ये व्यंज़ल नहीं हैं, और न ही हास्य-ग़ज़ल.) को.

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ग़ज़ल 1

इंतजार के सिवा कोई चारा नहीं है अब
दिल के धड़कने का कोई सहारा नहीं है अब

सोचा था के मुहब्बत में सुकून पाएंगे हम
एक लम्हा भी खुशी का हमारा नहीं है अब

आदत पड़ी हुई है तेरे जुल्म-ओ-सितम की
तेरा प्यार भी तो हाए, गवारा नहीं है अब

हुए हैं जंग दुनिया में इक प्यार की खातिर
तेरे सिवा दुनिया में कोई प्यारा नहीं है अब

खाए थे कसमें संग वफा की राह में चलने के
तेरे नशेमन से वैसा कोई इशारा नहीं है अब

तेरी राह में गुजरेंगे बाकी बरस जिंदगी के
तेरी याद के सिवा कोई किनारा नहीं है अब

पहले तो आप थे, फिर तुम से तू हुए
तुझे कहने को रवि तुम्हारा नहीं है अब

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ग़ज़ल 2

मय क्या है मयकशीं क्या है तेरी आँखों में डूब के जाना
दिल क्या है दिल-लगी क्या है तुझसे दिल लगा के जाना

लोग तो खाते रहे हैं कसमें और वादे सदियों से वफा के
वफ़ा क्या है कसमें वादे क्या है प्यार निभा के जाना

किसी बन्दे से पूछो खुदा क्या है खुदा की बन्दगी क्या है
खुदा और खुदा की बन्दगी तुझको खुदा मान के जाना

सुना था किसी से बिगड़ी लहरों में कश्ती डूबने की बातें
कश्ती और बिगड़ी लहरें क्या हैं तुझसे प्यार निभा के जाना

चाहत में मंजिल तो क्या, राहबर को भी भुला बैठे
राह क्या है राह-ए-मंजिल क्या है ये तुझे पा के जाना

तेरे न मिलने के बहानों में है एक वो जमाने की बातें
जमाना क्या है बहाने क्या हैं ये तुझसे मिल के जाना

एक ख्वाहिश थी के अपना भी कोई गुलिस्तां हो रवि
गुलिस्तां क्या है ये तुझे अपने दर पे पा के जाना

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ग़ज़ल 3

हमको यकीं नहीं था कि इंतजार का हर एक लम्हा है मौत के बराबर
अब तलक गुमां था पर्वत के उस पार है धरती आस्मां के बराबर

जरा नजरों से अपनी किसी को किसी और अंदाज से देखा कीजिए
कुछ पता भी है आपको कि आपकी ये नजर है नश्तर के बराबर

अपने गेसुओं के खम इस तरह निकाला न कीजिए जनाब
दम निकलता है हर खम पर - हर जुल्फ़ है नागिन के बराबर

अंदाजे बयां तेरी इजहारे मुहब्बत का कोई तो तुझ से सीखे
एक गुस्से भरी निगाह है तेरी हजार मुहब्बत के बराबर

वो आए एक लम्हे के लिए चलो आए तो सही दर पे रवि
जमाना चाहे न माने हमें यकीं है वो लम्हा है जिंदगी के बराबर

वो जब चलते हैं तो मचल उठती है धरती और कांपता है आसमां
उनका हर कदम उठता गिरता है एक जलजले के बराबर

खत्म हो गई रौशनी चरागों की जो उनने उठाया आँचल जरा सा
उनके दीदार का सामना करे कैसे कोई वो है सौ बर्क के बराबर

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बर्क = बिजली का चमकना

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ग़ज़ल 4

कर उनसे कोई बात जिगर थाम के
उनका जल्वा ए हुस्न देख जिगर थाम के

मर ही गए उनपे क्या बताएँ कैसे
डाली थी नजर उनपे जिगर थाम के

इतना तो है कि बहकेंगे हम नहीं
पी है मय हमने तो जिगर थाम के

पता नहीं महफ़िल में बहक गए कैसे
पी थी मय हमने तो जिगर थाम के

मेरी आवाज लौट आती है तेरे दर से
चिल्लाता हूँ बार-बार जिगर थाम के

वो दिन भी दूर नहीं जब तू आएगी
इंतजार है कयामत का जिगर थाम के

रवि ये इश्क है जरा फिर से सोच ले
चलना है इस राह पे जिगर थाम के

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ग़ज़ल 5

किसी बहाने याद कर रंजिश ही सही
जिए जा रहे हर हाल गर्दिश ही सही

जिंदगी जीने को तो मुहाल है यहाँ
मौत के ले बहरहाल फुर्सत ही सही

तेरा प्यार न पाने का है ग़म नहीं
मुहब्बत न सही तो इबादत ही सही

मुद्दत से है खुशी नहीं मयस्सर
पीते हैं ग़म हो पीना मुश्किल ही सही

तरसते हैं तेरे इक इक दीदार को
चलो सपनों की मुलाकात ही सही

जमाना क्या है मेरी तेरी इक बात
मेरी न सही सिर्फ तेरी बात ही सही

रवि पूछे क्या फ़र्क है रोने हँसने में
ये बात न हो तो वो बात ही सही
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ग़ज़ल 6

तेरी आँखों में अपनी निशानी देखी
तेरे लिखे हर्फ में अपनी कहानी देखी

तेरे जल्वा-ए-हुस्न का चर्चा है हर तरफ
ये चर्चा कई दफ़ा लोगों की जबानी देखी

तेरे मेरे मिलने में लफ़ड़े हैं कई हजार
इन लफ़ड़ों के बीच दुनिया बेमानी देखी

मेरे दर से तू गुजरती है इस तरह
के जाते हुए सिर्फ तेरी नादानी देखी

उम्र का तकाजा अपने साथ न रहा कभी
तुझे सामने देख हमने अपनी जवानी देखी

उस दिन से खुदा के हो गए हैं कायल
जब से तुझे देखा तेरी रवानी देखी

रवि आज तक समझ न सका कि क्यों
सारी दुनिया सिर्फ तेरी दीवानी देखी

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ग़ज़ल 7


इस कदर तन्हा हैं के साया भी हमसे दूर है
दिल जिगर था जो खयालों में हमसे दूर है

हर वक्त मोहब्बत के दम पे जिए थे अब तक
वो खुदा मोहब्बत का बहुत हमसे दूर है

क्या करें यादों को मंजिल बनाए बैठे हैं
दीदार-ए-यार की वो कयामत घड़ी हमसे दूर है

मेरे हर लफ़्ज में तेरी कहानी भरी हुई है
जिसे सुनाएँ हाल-ए-दिल वो शख्स हमसे दूर है

हमने जलाए थे चराग करो यकीं हम पे
दवा क्या करें जो तकदीर हमसे दूर है

या खुदाया, क्या तेरी यही खुदाई है
तेरा नाम लेके चाहा वो ही हमसे दूर है

बड़े अरमां से जहर तूने पिया था रवि
ग़म से बचें कैसे जो मृत्यु हमसे दूर है

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ऊपर प्रकाशित ग़ज़लों की पंक्तियाँ आपको कैसी लगीं? बीस बरस का, प्रेम में अंधा इसके सिवा और क्या लिख सकता है?

अब जरा मेरी लिखी ये ताज़ी पंक्तियाँ पढ़ें -

हुआ है इधर एक अजीब सा हादसा
शहर के कुत्ते सब सियार हो गए

वक्त आपकी आँखें खोल देता है और आप बहुत सी चीजें देखने लग जाते हैं. परंतु, फिर भी, अंधेपन का अपना, अलग मजा है!

आज का कार्टून स्ट्रिप:


ये मरफ़ी महोदय कौन हैं? और इनके नियम इतने विचित्र किन्तु सत्य क्यों हैं?
(नियमों की पूरी सूची के लिए इस पृष्ठ के सबसे नीचे स्क्रॉल करें. नए नियम यथा समय जोड़े जाएंगे व सूची अद्यतन की जाती रहेगी. अंतिम परिवर्धन - 13 अक्तूबर 2006)
मरफ़ी का ज्ञात (या अब तक अज्ञात, मरफ़ी के हिसाब से कहें तो,) सबसे पहला नियम है - "यदि कुछ गलत हो सकता है, तो वह होगा ही". कुछ का कयास है कि यह नियम एडवर्ड एयरफ़ोर्स के नॉर्थ बेस में सन् 1949 में अस्तित्व में आया. यह नियम वहाँ पदस्थ कैप्टन एडवर्ड ए मरफ़ी के नाम पर प्रसिद्ध हुआ. दरअसल, कैप्टन इंजीनियर मरफ़ी महोदय को एयर फ़ोर्स में एक परियोजना के तहत यह शोध करना था कि क्रैश की स्थिति में मनुष्य अधिकतम कितना ऋणात्मक त्वरण झेल सकता है. जाँच प्रणाली में ही आरंभिक खराबी का पता लगाने के दौरान मरफ़ी ने पाया कि एक ट्रांसड्यूसर की वायरिंग गलत तरीके से की गई थी. उसे देखते ही मरफ़ी महोदय के मुँह से बेसाख्ता निकला - "यदि किसी काम को गलत करने के तरीके होते हैं, तो लोग उसे ढूंढ ही लेते हैं." वहां का परियोजना प्रबंधक ऐसे ही और तमाम अन्य नियमों का शौकिया संकलन करता था. उसने यह बात भी संकलित कर ली और उसे मरफ़ी के नियम का नाम दिया.
बाद में, परियोजना से संबद्ध डॉक्टर जॉन पाल स्टाप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मरफ़ी के इस नियम को उद्भृत करते हुए कहा कि परियोजना की सफलता में इस नियम का बहुत बड़ा हाथ है, चूंकि फिर बहुत सी बातों पर विशेष ध्यान दिया गया - गलतियाँ हो सकने की तमाम संभावनाओं को पहले ही पता लगाया गया और उन्हें दूर किया गया या उससे बचा गया.
हवाई जहाज निर्माण कंपनी ने इस नियम को पकड़ लिया और विज्ञापनों में जम कर प्रचार किया. और देखते ही देखते यह नियम बहुत से समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में खासा चर्चित हो गया.
इस तरह, मरफ़ी के पहले नियम का जन्म हुआ. फिर तो इस तरह के नियमों का संकलन होता रहा, और मरफ़ी का नाम दिया जाता रहा.
मरफ़ी के पहले नियम के बारे में कुछ मरफ़ियाना खयाल -
• मरफ़ी के पहले नियम की खास बात यह है कि इसे मरफ़ी ने नहीं बनाया, बल्कि मरफ़ी नाम के ही किसी दूसरे आदमी ने बनाया.
• क्या कोई व्यक्ति नियम बना सकता है? नहीं. नियम तो पहले से ही बने होते हैं. बस हमें पता बाद में चलता है, जब कोई उसे खोज लेता है, और दुनिया को बताता है.
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मरफ़ी के नियम के जन्म की एक दूसरी कहानी -

सन् 1930 में यूएस नेवी में पदस्थ कमांडर जे. मरफ़ी को हवाई जहाजों के रखरखाव का दायित्व सौंपा गया था. एक दिन किसी फ़िटर ने हवाई जहाज पर कोई पुरजा उलटा लगा दिया. जाहिर है, वह पुरजा ऐसे डिज़ाइन का था जो उलटा भी लग सकता था. इसे देख कर मरफ़ी ने कहा - "यदि कोई फ़िटर हवाई जहाज के पुरजे को उलटा लगा सकता है तो अंततः वह एक दिन उलटा लगा ही देगा."
धीरे से यह नियम संशोधित होता गया और मरफ़ी के बहुचर्चित नियम का जन्म हुआ.
मरफ़ी के नियम की जन्म की कहानी में मत भिन्नता से यह तो सिद्ध होता है कि नियम आपके इर्द गिर्द सदा सर्वदा रहते है. बात सिर्फ उनके खोजने-बताने की रह जाती है.

और, मरफ़ी के नियम कुछ ऐसे बनते हैं:

मरफ़ी के नियमों के जन्म की तीसरी, असली कहानी!

मरफ़ी के कुछ अन्य नियम यहाँ पढ़ें:
मरफ़ी का भारतीय घरेलू महिलाओं हेतु नियम
मरफ़ी के कुछ प्यारे नियम
मरफ़ी के कुछ सामान्य नियम
मरफ़ी के घरेलू व कंप्यूटरी नियम
मरफ़ी के अध्ययन-अध्यापन नियम
नन्हें मुन्नों के लिए मरफ़ी के नियम
मरफ़ी के वाणिज्यिक व्यापारिक नियम
मरफ़ी के पिता के नियम
मरफ़ी के नए साल के नियम
मरफ़ी के चौपहिया नियम
मरफ़ी के बस अड्डे के नियम

नन्हें मुन्ने बच्चों के लिए मरफ़ी के नियम


• जब आप अपने बच्चे को गोद में उठाकर चलना चाहते हैं तो वे हर हाल में खुद अपने पैरों पर चलना चाहते हैं.
• जब आप चाहते हैं कि आपका बच्चा खुद अपने पैरों से चलकर जाए तो वे किसी सूरत आपकी गोद नहीं छोड़ते हैं.
• जब आप बच्चा-गाड़ी लाते हैं, तो वह उसपर बैठकर नहीं, उसे धकेल कर चलना चाहते हैं.
• जब आप बच्चा-गाड़ी लाना भूल जाते हैं तो वो बच्चा-गाड़ी में जाने की जिद करते हैं.

• किसी भोजन में जितना ज्यादा, गहरा और स्थाई धब्बा बनाने की क्षमता होती है, उस भोजन में किसी बच्चे के द्वारा कपड़ों में फैलाए जाने की उतनी ही ज्यादा संभावना होती है.
• उप-प्रमेय - किसी भोजन में स्थाई धब्बा लगाने की जितनी ज्यादा क्षमता होती है, उस भोजन के किसी बच्चे के द्वारा उतने ही मंहगे कपड़े व फर्नीचर पर फैलाए जाने की उतनी ही अधिक संभावना होती है.
• किसी बच्चे को आज जो पसंद है वह कभी भी कल पसंद नहीं होगा (विशेष रुप से भोजन).

• किसी बच्चे के द्वारा गलती (या शैतानी) करने पर उसके अभिभावकों की झल्लाहट आसपास मौजूद व्यक्तियों की संख्या के सीधे अनुपात में होती है.

• मेरा खिलौना नियम : यदि यह मेरा है, तो यह सिर्फ मेरा है,
यदि यह तुम्हारा है, तो भी यह मेरा है,
यदि यह मुझे पसंद है, तो यह मेरा है,
यदि इसे मैं आपसे ले सकता हूँ, तो यह मेरा है,
यदि मैं किन्ही चीजों से खेल रहा हूँ, तो वे सबकुछ मेरे हैं,
यदि मैं सोचता हूं कि यह मेरा है, तो फिर यह मेरा है,
यदि मैंने इसे पहले देखा है तो फिर यह मेरा है,
यदि मैंने इसे लेकर कहीं छोड़ कर रख दिया है, तब भी यह मेरा है,
यदि आपने इसे लिया हुआ है, तब भी यह मेरा है,
यदि मैंने या किसी ने इसे छुपाया हुआ है, तब भी यह मेरा है,
यदि यह उसके जैसा दिखता है जैसा कि मेरे घर में है, तो यह मेरा है,
• यदि यह टूट गया है, तो यह तुम्हारा है.


• यदि मैं पसारा फैलाता हूँ तो साफ तुम्हें करना होगा.
• यदि मैं इसे तोड़ता हूँ, तो यह मेरी नहीं तुम्हारी गलती है.

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• एक अभिभावक जितना जोर से चिल्लाकर, जितना ज्यादा देर तक और बारंबार समझाने की कोशिश करेगा किसी बच्चे के द्वारा उसे समझे व अपनाए जाने की संभावना उतनी ही कम होगी.
• किसी भोजन को बनने में जितना ज्यादा ऊर्जा, सामग्री व समय लगता है, किसी बच्चे के द्वारा उसे खाए जाने की संभावना उतनी ही कम होती है.

• कार (या बस) जैसे ही चलने को होती है, उसमें सवार बच्चों को सूसू करने की तीव्र आवश्यकता महसूस होती है.
• जो कपड़े/जूते आप इस हफ़्ते खरीद लाए हैं, वे अगले हफ़्ते या तो बच्चे को फिट नहीं होंगे या फिर वे बच्चे को पसंद नहीँ आएंगे.
• किसी दूसरे कमरे से आती हुई आवाज के उलटे अनुपात में वहाँ मौजूद बच्चे द्वारा की जा रही शैतानियाँ होती हैं.
• अपने कार की सीट कवर के लिए आप जितना ज्यादा रकम खर्च करते हैं, आपका बच्चा उसे उतना ही कम पसंद करता है.

• जब भी आप जल्दी में होते हैं, आपका बच्चा बिला वजह देरी करता है.
• आपका फ़ोन कॉल जितना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा, आपका नन्हा उतना ज्यादा ही जोर से रोएगा या कमरे के दूसरे कोने में उतना ही ज्यादा उत्पात मचाएगा.
• झूलाघर की सुलभता व उपलब्धता आपकी आवश्यकता के उलटे अनुपात में होती है.

• आपका नन्हा हमेशा इस बात का इंतजार करता है कि कब आप काम पर जाने के लिए तैयार हों, तब फिर वह आपके कपड़ों को अपना भोजन फैलाकर या किसी अन्य तरीके से खराब करे.
• जब आप चाहते हैं कि आपका नन्हा सोए, वह आँखें फाड़कर जागता है, धमाल मचाता है. और जब आप चाहते हैं कि वह जागे, बेहोशी में सोता रहता है.



मरफ़ी के कुछ अन्य नियम यहाँ पढ़ें:

 मरफ़ी का भारतीय घरेलू महिलाओं हेतु नियम

मरफ़ी के कुछ प्यारे नियम

मरफ़ी के कुछ सामान्य नियम

मरफ़ी के घरेलू व कंप्यूटरी नियम 

 

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अद्यतन: कुछ मित्रों द्वारा सुझाए नए शीर्षक-
1 - यही कारण है कि तमाम विश्व में पर्यावरणवादियों की संख्या में इजाफ़ा हो रहा है!
2- पर्यावरणविद् बनने हेतु नया, ठोस कारण!
3- चलिए, अब तो कोई काम ही नहीं बचा, लिहाजा पर्यावरणविद् ही बन जाते हैं!

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माइक्रोसॉफ़्ट का नया, भारतीय-बहुभाषी फ़ॉनेटिक इनपुट औज़ार.
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लगता है कि भारतीय भाषाओं के लिए फ़ॉनेटिक इनपुट औजार ही अंततः लोकप्रिय और काम का होगा, भले ही इसमें एकाधिक कुंजियाँ ज्यादा दबानी पड़ती हों. फ़ॉनेटिक का अर्थ यह कि अंग्रेज़ी कुंजीपट में अगर हिन्दी में ‘कहानी’ टाइप करनी हो तो हमें टाइप करना होगा – kahaanii. चूंकि आपने इसे अंग्रेज़ी में टाइप किया हुआ है, तो भारतीय भाषाओं की इस ‘ख़ासियत’ कि जैसा बोला जाता है, वैसा ही लिखा जाता है, इसे कंप्यूटर प्रोग्रामों की मदद से आसानी से दूसरी भारतीय भाषाओं मसलन गुजराती या पंजाबी में भी बदला जा सकता है.

माइक्रोसॉफ़्ट ने भारतीय भाषाओं की इसी विशेषता को ध्यान में रखते हुए खास “माइक्रोसॉफ़्ट फ़ॉनेटिक इनपुट औजार” बनाया है. इसकी प्रमुख खासियत ही यही है कि यह एक भाषा में लिखी इबारतों को दूसरी भाषा में, तथा फ़ॉनेटिक अंग्रेज़ी में भी आसानी से परिवर्तित (अनुवाद नहीं) कर देता है. तो, अगर आप बहुभाषी हैं – जैसा कि आमतौर पर हम सभी भारतीय होते हैं, हमारे लिए यह बड़े ही काम की चीज है. उदाहरण के लिए, अब मैं एक साथ ही - हिन्दी और पंजाबी में चिट्ठे लिख सकता हूँ. मेरे हिन्दी में लिखे चिट्ठे पंजाबी में भी छप सकते हैं, बस, थोड़े से भाषा विन्यास, व्याकरण और हिज्जे बदलने होंगे. या फिर, ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ के ‘मुम्बइया-फ़िल्मी’ भाषा में पोस्ट तो भारत की किसी भी भाषा की लिपि में लिखा जा सकता है- और लोग आनंद लेकर पढ़ेंगे भी! यानी कि अब मैं भले ही तेलुगु नहीं जानता होऊँ, परंतु तेलुगु में लिख सकता हूँ, और तेलुगु पढ़ भी सकता हूँ – तेलुगु पाठ को फ़ॉनेटिक अंग्रेज़ी या फिर अपनी जानी पहचानी भाषा जैसे कि हिन्दी, में परिवर्तित कर!

संस्थापना में सरल :

मात्र 330 किबा का यह औजार आकार में छोटा है, मगर काम में बड़ा है. अभी इसका बीटा संस्करण जारी किया गया है. इसकी संस्थापना अत्यंत आसान है. इसका सेटअप प्रोग्राम चलाने पर यह स्वयमेव संस्थापित हो जाता है और आपके कंप्यूटर पर कार्य पट्टी पर डिफ़ॉल्ट विन्यास सहित इस औजार की भाषा पट्टी दिखाई देने लगती है. लेकिन इसका प्रोग्राम डाउनलोड खीझ भरा और कष्टकारी है. इस प्रोग्राम को डाउनलोड करने के लिए आपको माइक्रोसॉफ़्ट की साइट पर पंजीकृत होना होगा http://connect.microsoft.com/ , फिर वे एकाध दिन बाद आपके ईमेल पते पर डाउनलोड की कड़ी देंगे. वहां भी आपको अलग से पंजीकृत होना होगा. शायद बीटा प्रोग्राम के कारण ऐसा किया गया हो और हो सकता है, जब यह प्रोग्राम पूरी तरह जारी हो जाए तो हमें डाउनलोड की ऐसी कष्ट कारी समस्या का सामना नहीं करना पड़े. हाँ, कुछ भाषाओं में समर्थन हेतु अभी इसके बीटा संस्करण में यह आवश्यक है कि आपके विंडोज़ में सर्विस पैक 2 संस्थापित हो, या कुछ भाषा, जैसे कि असमिया के लिए आपके पास विंडोज विस्टा हो.

उपयोग में आसान :
माइक्रोसॉफ़्ट फ़ॉनेटिक इनपुट औजार उपयोग में अत्यंत आसान है. इसकी संस्थापना के पश्चात् आपके कंप्यूटर की कार्य पट्टी पर, तंत्र तश्तरी (सिस्टम ट्रे) के पास इसका प्रतीक आ जाता है. इसका विस्तृत भाषा पट्टी देखने के लिए इसे बड़ा भी कर सकते हैं. इसकी तैरती हुई भाषा पट्टी को आप सुविधानुसार कहीं पर भी रख सकते हैं. वैसे, सबसे ऊपर या सबसे नीचे ज्यादा सुविधाजनक होता है. एक बार संस्थापित होने के बाद ‘ऑल्ट+शिफ़्ट’ कुंजीपट के जरिए विविध भाषाओं में टॉगल कर सकते हैं या माउस क्लिक के जरिए वांछित भाषा का चुनाव कर सकते हैं. वांछित भाषा चुनकर आप सीधे ही विंडोज के किसी भी अनुप्रयोग में काम कर सकते हैं. चाहे वह नोटपैड हो, ब्राउज़र हो या ऑफ़िस सूट.

इनस्क्रिप्ट भी उपलब्ध

अगर आप इनस्क्रिप्ट के आदी हैं या इसमें टाइप करने में सुविधा देखते हैं तो यह सुविधा भी इसमें मिलती है. विंडोज़ के डिफ़ॉल्ट इनस्क्रिप्ट कुंजीपट को भी यह समर्थित करता है, तथा उसमें लिखी सामग्री का इस्तेमाल अन्य भाषाओं में बखूबी परिवर्तित करने के लिए करता है.
msphonetic2
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भाषाओं के लिए उपलब्ध समर्थन :

इस औजार के जरिए हिन्दी और अंग्रेज़ी के अलावा बारह अन्य भारतीय भाषाओं में काम किया जा सकता है. माइक्रोसॉफ़्ट फ़ॉनेटिक इनपुट औजार में समर्थित भारतीय भाषाएँ निम्न हैं –

• असमी
• बंगाली
• गुजराती
• हिन्दी

कन्नड़
• कोंकणी
• मलयालम
• मराठी
• पंजाबी
• उड़िया

संस्कृत
• तमिल और,
• तेलुगु

एक से दूसरी भाषा में आसान परिवर्तन

किसी एक भारतीय भाषा में लिखे पाठ को इस औजार के जरिए दूसरी भाषा में आसानी से बदला जा सकता है. शर्त सिर्फ यही है कि पाठ यूनिकोड हो. इसके लिए पाठ को चुनें तथा भाषा पट्टी में दिए गए ‘चयनित को परिवर्तित करें’ (कन्वर्ट सलेक्शन) मेन्यू को चुनें, व वांछित भाषा चुनें. आपका चयनित पाठ तत्क्षण परिवर्तित हो जाता है. आपको अलग से कुछ करने की आवश्यकता ही नहीं होती. वैसे, अभी वर्तमान में यह सुविधा सिर्फ चुने हुए अनुप्रयोगों यथा - वर्डपैड तथा माइक्रोसॉफ़्ट वर्ड में मिल पाती है. माइक्रोसॉफ़्ट का कहना है कि इस सुविधा को बाद में सभी अनुप्रयोगों में लाया जाएगा. बहुभाषी भारतीयों के लिए तो यह सुविधा अत्यंत उपयोगी है ही, इस सुविधा से भारतीय भाषा के पाठ को अंग्रेज़ी फ़ॉनेटिक में भी बदला जा सकता है जिसके उस भाषा लिपि से अंजान व्यक्ति भी उस पाठ को पढ़ कर समझ सकता है, अगर वह उस भाषा की बोली को समझता है. और, हो सकता है कि भविष्य में इस औजार के जरिए हम किसी भारतीय भाषा में लिखे पाठ को स्वचालित तरीके से चाहे जिस अन्य भारतीय भाषा में पढ़ पाएँ – अनुवाद इत्यादि की सुविधा इसमें जुड़ जाए तब!

एक से दूसरी भाषा में परिवर्तन करने के पश्चात् उसे वापस उसी भाषा में या तीसरी भाषा परिवर्तित करने पर आपको विचित्र परिणाम भी मिल सकते हैं. जैसे कि कहानी को तमिल में बदलने के बाद वापस हिन्दी में बदलने पर खहानी हो जाता है. अतः एक बार से अधिक लूप में परिवर्तन नहीं करें, तथा मूल भाषा में लिखे गए पाठ से ही परिवर्तन करें, न कि पहले से ही परिवर्तित पाठ से. साथ ही यह आरंभिक संस्थापना में ही तमाम समर्थित भाषाओं के सभी कुंजीपटों को डिफ़ॉल्ट रूप में सक्रिय कर देता है जो कि एक प्रकार से अनावश्यक ही होता है. इसे औजार के सेटिंग में जाकर अवांछित कुंजीपटों को हटाना आवश्यक हो जाता है अन्यथा कुंजीपट टॉगल करने में समस्याएँ आती हैं. लिनक्स तंत्र में उपलब्ध इनपुट औजारों की तरह इसमें जोड़ (जैसे कि अंग्रेजी हिन्दी या अंग्रेजी गुजराती इत्यादि) बनाने की सुविधा नहीं है.


फिर भी, यह औजार है काम का. जब इसमें और सुविधाएँ जुड़ेंगी तो फिर बात ही क्या. एक उदाहरण स्वरूप नीचे का पाठ मैंने हिन्दी में ही लिखा है और इस औजार में उपलब्ध ‘चयनित को परिवर्तित करें’ मेन्यू कमांड से कई अन्य भारतीय भाषाओं में परिवर्तित किया है:

(कृपया ध्यान दें कि अगर आपके कम्प्यूटर पर एरियल यूनिकोड एमएस नहीं है, या संबंधित भाषा का यूनिकोड फ़ॉन्ट संस्थापित नहीं है, तो आपको संबंधित भाषा के सामने डब्बे दिखाई देंगे.)
msphonetic3
रविरतलामी का हिन्दी ब्लाग हिन्दी
రవిరతలామీ కా హిన్దీ బ్లాగ तेलुगु
ರವಿರತಲಾಮೀ ಕಾ ಹಿನ್ದೀ ಬ್ಲಾಗ कन्नड़
ਰਵਿਰਤਲਾਮੀ ਕਾ ਹਿਨ੍ਦੀ ਬ੍ਲਾਗ पंजाबी
ரவிரதலாமீ கா ஹிந்தீ ப்லாக तमिल
રવિરતલામી કા હિન્દી બ્લાગ गुजराती
रविरतलामी का हिन्दी ब्लाग संस्कृत
रविरतलामी का हिन्दी ब्लाग मराठी
रविरतलामी का हिन्दी ब्लाग कोंकणी(देवनागरी लिपि)
രവിരതലാമീ കാ ഹിന്ദീ ബ്ലാഗ मलयालम
রবিরতলামী কা হিন্দী ব্লাগ बंगाली
ରବିରତଲାମୀ କା ହିନ୍ଦୀ ବ୍ଲାଗ उड़िया
রবিরতলামী কা হিন্দী ব্লাগ असमिया
Ravirathalaamii kaa hindhii blaaga अंग्रेज़ी फ़ॉनेटिक

आप देख सकते हैं, कि ‘रविरतलामी का हिन्दी ब्लाग’ किस तरह, आसानी से, बहुभाषी हो गया.

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ब्लॉगर के चिट्ठे विज्ञापन मुक्त कैसे पढ़ें

ब्लॉगर के कुछ चिट्ठे कल देरी से लोड हो रहे थे. स्थानीय सर्वरों में कुछ पंगा हो गया होगा. तो मैंने सोचा कि प्रॉक्सी - पीकेब्लॉग्स की शरण ली जाए, जिसने ब्लॉगर पर प्रतिबंध के दौरान हम सब भारतीय चिट्ठाकारों की बहुत मदद की थी.

और, ये क्या? चिट्ठों में से गूगल के एडसेंस विज्ञापन ग़ायब?

तो दोस्तों, अगर गूगल का एडसेंस विज्ञापन अगर आपकी आत्मा को घायल करता है, चिट्ठा पढ़ने के दौरान खीज पैदा करता है, तो पीकेब्लॉग्स जैसे प्रॉक्सी की शरण ले सकते हैं.

परंतु, यहाँ पीकेब्लॉग्स भी व्यावसायिक हो गया दीखता है. उसने एडसेंस के विज्ञापनों को तो कुचल डाले, परंतु अपना स्वयं का पारदर्शी सा विज्ञापन डाल दिया, जो कि नीचे स्थिति पट्टी पर तैरता रहता है और अनजाने में क्लिक भी हो सकता है अतः इसका इस्तेमाल करते समय जरा होशियार रहें. परंतु पीकेब्लॉग्स जैसे दर्जनों अन्य प्रॉक्सी भी तो हैं - और बहुतेरे विज्ञापन मुक्त हैं.

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पीकेब्लॉग्स (http://pkblogs.com ) के जरिए चिट्ठों को पढ़ने के लिए पीकेब्लॉग्स के यूआरएल में अपना चिट्ठा नाम जोड़ दें, बस. उदाहरण के लिए पीकेब्लॉग्स के जरिए इस चिट्ठे को पढ़ने के लिए, यह यूआरएल इस्तेमाल करें - http://pkblogs.com/raviratlami

तो फिर देर किस बात की? अपने ब्लॉगर बुकमार्क - पुस्तचिह्नों को सिरे से बदल डालें - उसे पीकेब्लॉग जैसे प्रॉक्सी से रूट करें और विज्ञापन मुक्त चिट्ठा पढ़ें - शांति से, बगैर रक्तचाप बढ़ाए!


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व्यंज़ल

(यह व्यंज़ल आज की चिट्ठाचर्चा का हिस्सा था, परंतु यहाँ फिर से उद्घृत किया जा रहा है.)

बात व्यावसायिकता की

हमने जरा सी बात की व्यावसायिकता की
उन्होंने दुकानें सज़ा लीं व्यावसायिकता की

मुँह मोड़ लिए हैं ‘लंगोटिया यारों' ने यारों
क्या जुर्म है बातें करना व्यावसायिकता की

मत करो शिकवा अपने काम में वज़न की
डालकर देखो जरा वज़न व्यावसायिकता की

लोग असफल हो गए, शायद उन्हें नहीं पता
मुहब्बत में भी जरूरी है व्यावसायिकता की

रवि भी चल पड़ा है अब दीवानों के रास्ते
हयात में देखे संभावना व्यावसायिकता की

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गूगल की नई विचार धारा: पूर्णतः ‘व्यावसायिक और लाभदायक' समाज-सेवा.

इंटरनेट की दुनिया को ‘खोज' के साथ साथ ‘एडसेंस' और ‘एडवर्ड' जैसे नायाब प्रयोगों के जरिए ‘बदल कर' रख देने वाले गूगल ने एक नई विचारधारा प्रस्तुत की है. व्यावसायिक, लाभदायक समाज-सेवा.

गूगल द्वारा 1 बिलियन डॉलर की आरंभिक राशि के साथ एक ट्रस्ट बनाया गया है जो कि तमाम विश्व में गरीबी, बीमारी और ऐसे ही अन्य वैश्विक समस्याओं को खत्म करने में योगदान देगी. परंतु इस ट्रस्ट की यह ख़ासियत यह है कि ट्रस्ट कुछ राशि व्यापार व्यवसाय में लगाकर उस पर लाभ भी कमाएगी.

व्यापारिक संस्थानों द्वारा समाज सेवा का विचार सदियों पुराना है. भारत में टाटा घराना प्रारंभ से ही समाज सेवा में रहा है. टाटा घराने के सहयोग से आरंभ हुआ टाटाइंस्टीट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च इसका अप्रतिम उदाहरण है. अभी कुछ समय पहले ही यह खबर आई थी कि वॉरेन बफ़ेट ने अपनी अधिकांश सम्पत्ति बिल एंड मलिंडा गेट्स फाउण्डेशन को समाज सेवा हेतु दान में दे दी है. सुधा मूर्ति का मुख्य पेशा समाज सेवा है - और वे यह कार्य बरसों से कर रही हैं.

परंतु गूगल की विचारधारा तो सचमुच क्रांतिकारी है. और क्यों नहीं. समाज-सेवा भी पूरे व्यावसायिक रूप में किया जा सकता है, लाभ के लिए किया जा सकता है - अगर इससे थोड़ी सी ही, सही सचमुच की समाज-सेवा होती है. गूगल अपने इस ब्रिलिएंट विचारधारा को अमलीजामा पहनाने के लिए डॉ. लैरी ब्रिलिएंट को लाए हैं, जो कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में पहले ही खासा नाम कमा चुके हैं.

संयोगवश, गूगल की यह विचारधारा उस समय अवतरित हुई है, जब चिट्ठाकारों में घनघोर, रक्तचाप-बढ़ाने वाली, आधुनिक-बनाम-दकियानूसी बहस की जंग छिड़ी हुई है कि नारद या अन्य हिन्दी चिट्ठों को व्यावसायिक रूप से स्व-निर्भर होना चाहिए या नहीं. गूगल की यह विचारधारा - चिट्ठों या नारद के व्यावसायिक कदम को न केवल पुष्ट करती है, बल्कि उन्हें ‘घोर व्यावसायिक' बनाने की ओर प्रेरित भी करती है. कारण - जब आपके पल्ले धन रहेगा - समाज-सेवा न सिर्फ खुद-बखुद होगी, सेवा के लिए धन भी निकलेगा. वरना - नंगा खाएगा क्या और निचोड़ेगा क्या.

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यहाँ यह भी बताना समीचीन होगा कि रचनाकार जैसे चिट्ठे पिछले सालभर से पूर्णतः अव्यावसायिक चलते रहे. रचनाकार पर अनुदान देने के लिए पेपैल का लिंक पहले से है. आज तक एक धेला कहीं से प्राप्त नहीं हुआ. हिन्दी के एक पृष्ठ को स्थानीय स्तर पर टाइप करवाने के न्यूनतम खर्च पाँच रुपए लगते हैं. यानी कि एक पांच पृष्ठीय कहानी के लिए पच्चीस रुपए. जबकि पाठकों की फ़रमाइशें आती हैं कि चंद्रकांता संतति जैसी रचनाएँ पूरी की पूरी इस पर आएँ. इसके लिए सहयोग तो चाहिए ही. और सहयोग नहीं मिल रहा तो व्यावसायिक होकर इस काम को पूरा करने में कोई हर्ज तो मुझे नहीं दीखता. रचनाकार या नारद का व्यावसायिक चैनल रविरतलामी या मिर्चीसेठ की तिजौरी भरने के लिए, ‘मालपानी' कमाने के लिए नहीं है. रचनाकार और नारद की स्कैलेबिलिटी तो अनंत हो सकती है, और उसके लिए तो मिलियन डॉलर वार्षिक भी कम पड़ेंगे. अगर अपनी सोच में व्यावसायिक खयाल लाएँ तो यह दिखाई भी देने लगेगा.

नारद के लिए आरएसएस फ़ीड डिज़ाइन करने के बारे में मेरी सलाह में कतई यह नहीं था कि फ़ीड रीडर या कहीं पर भी इसकी फ़ीड न जाए. वर्तमान विन्यास में बस एक अतिरिक्त क्लिक और एक अतिरिक्त पेज लोड का सवाल था - जो कि अंततः हम सबको करना ही होगा जब नारद पर कैलेंडर, जन्मदिवस अभिनंदन और इसी तरह की अन्य स्केलेबल चीज़ें अंततोगत्वा जुड़ेंगीं - जैसी कि चर्चा चल रही है. अगर यह खयाल दकियानूसी है तो फिर है - मैं अभी भी मानता हूँ कि यह खयाल किसी सूरत बुरा नहीं है. चर्चा में बीबीसी के भी उदाहरण दिए गए हैं. बीबीसी की फ़ीड में भी हमें पूरा समाचार पढ़ने नहीं मिलता. पूरा समाचार पढऩे के लिए बीबीसी के पन्नों पर फ़ीड में दिए लिंक के जरिए हमें जाना ही होता है. नारद जब ऐसी सेवा दे रहा है तो उसके पन्नों में जाकर वहां मौजूद कड़ियों के जरिए चिट्ठों को पढ़ने में क्या मजबूरी हो सकती है भला? अधिकांश चिट्ठाकार अपने फ़ीड आंशिक ही रखते हैं - सभी चाहते हैं कि लोग उनके पृष्ठों पर आएँ और स्टेटकाउंटर का ग्राफ थोड़ा बढ़ाएँ और हो सके तो एकाध टिप्पणी जड़ें. इन चिट्ठाकारों का खयाल दकियानूसी नहीं हो सकता - वरना वे अपने चिट्ठों की पूरी फ़ीड जारी कर रखते और किसी को उनके चिट्ठों पर जाने की कभी जरूरत ही नहीं होती. अर्थ यह कि नारद पर दिन में कम से कम एक बार हर नारद प्रयोक्ता को जाने की मजबूरी हो - अगर वह चिट्ठा पूरा पढ़ना चाहे. नहीं तो शीर्षक तथा सारांश पढ़ कर संतुष्ट रहे. यही तो अधिकांश चिट्ठाकार कर रहे हैं - रविरतलामी भी और फुरसतिया भी.

तो, यह अंतहीन बहस तो जारी रहेगी - जैसा कि जीतू का कहना है. बहरहाल, गूगल को हार्दिक धन्यवाद. मेरे विचारों के समर्थन हेतु उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए इससे बेहतरीन अवसर और इससे बेहतरीन उदाहरण किसी और का नहीं हो सकता था!

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सर्वाधिक पढ़े जाने वाले, सर्वप्रिय हिन्दी चिट्ठाकार, अनूप शुक्ला 'फ़ुरसतिया' जी के जन्मदिवस 15 सितम्बर पर उन्हें ढेरों बधाईयाँ! यथा - नाम -विपरीत गुण को साकार करते हुए फ़ुरसतिया जी इस दिन इतने व्यस्त रहे कि मेरे और प्रत्यक्षा के ईपत्रिया साक्षात्कार के जवाब देर रात तक प्रेषित कर पाए. वैसे, ग़लती हमारी भी थी जो हमने सोचा कि हम प्रश्न टिकाएँगे और चैट में हासिल प्रत्युत्तर की तरह दन्न से जवाब हासिल हो जाएगा.


बहरहाल, बहुतों के बड़के भैया और बहुतों के समस्या-सलाहकार , महाब्लॉगर अनूप शुक्ला के रविरतलामी और प्रत्यक्षा द्वारा लिए गए ईपत्रिया साक्षात्कार जिसे 15 सितम्बर को जन्मदिवस शुभकामना स्वरूप यहाँ पोस्ट होना था, एक दिन की देरी प्रस्तुत है. अनूप तथा पाठकों से क्षमायाचना सहित.


अनूप को एक बार फिर जन्म दिवस की ढेरों बधाईयाँ, और चिट्ठा-शुभकामनाएँ कि वे अपने चिट्ठा लेखन में नित नए आयाम बनाएँ, नए रिश्ते बनाएँ, और चिट्ठाकारों को नई दिशाएँ दें.

रविरतलामी के प्रश्न:

प्रश्न - अपने जन्म दिवस के खास मौक़े पर महाब्लॉगर किस विषय पर लिखना चाहेगा?

उत्तर- चाहता तो यह हूं कि ऐसा कुछ लिखूं कि यह 'महाब्लॉगर' की उपाधि से मुक्ति मिल जाय। पता नहीं देबाशीष को हमसे क्या नाराजगी रही कि मात्र दो साल की 'बाली उमर' के लेखन के पाप के कारण हमारे ऊपर यह उपाधि थोप दी । कानपुर में 'महा' आमतौर पर कानपुर में 'पुरुष' के पहले लगता है या बदमाश' के पहले। हम दोनों से ही बहुत दूर होने के भ्रम में हैं। लेकिन यह अपने बस में नहीं है।लोग आम तौर पर वे उपाधियां ही आपके ऊपर थोप देते हैं जिनसे आप सबसे ज्यादा बिदकते हैं। जातिवाद,कर्मकांड से बिदकने वाले नेहरूजी को सरे आम 'पंडितजी' बना दिया गया और कांग्रेस की अध्यक्षता(नेतागिरी) छो़ड़ने के लिये मजबूर होने वाले सुभाषचंद्र बोस 'नेताजी' कहलाये ।

तो जब इतने महान लोग अपने ऊपर लादी उपाधियां ढोने के सिवा कुछ न कर पाये तो हमारी क्या बिसात!तो कुछ और लिखेंगे जिसमें सबसे पहले सबेरे-सबेरे चिट्ठाचर्चा और समय मिला शाम को तो एक पोस्ट और किसी विषय पर टिका देंगे। विषय क्या होगा यह हमें खुदै नहीं पता तो आप को क्या बतायें?

प्रश्न -आप अकसर चिट्ठाकारों के आत्मसम्मान के झगड़े सुलझाते दिखाई-सुनाई पड़ते हैं?

उत्तर -यह आरोप सही नहीं है और मैं इसमें दोषी नहीं हूं। अपने किसी भी चिट्ठाकार दोस्त को अभी तक मैंने आत्मसम्मान जैसी बाहियात चीज के लिये झगड़ते नहीं देखा। हां,कभी-कभी कुछ दोस्त अपनी बेवकूफियां जाहिर करने के अधिकार को अपना मूल अधिकार मानकर उसका प्रयोग करते पाये गये। अपने को दूसरे से बड़ा बेवकूफ साबित करने में जान लगा देते हैं। अब चूकिं कक्षा ६ में हमने मूल अधिकारों के बारे में अच्छी तरह रट्टा लगाया था तो हम बता देते हैं कि भाई बेवकूफी का अधिकार मूल अधिकार में अभी तक शामिल नहीं हुआ तथा यह अभी केवल नेताऒ ,ऊंचे नौकरशाहों का ही विशेषाधिकार है। लोग मेरी बात मानकर बेवकूफियां बंद कर देते हैं तो इसमे हमारा क्या दोष?

प्रश्न - आपका चिट्ठा सर्वाधिक पठनीय होने के साथ सर्वाधिक पढ़ा जाने वाला तथा सर्वाधिक टिप्पणी प्राप्त करने वाला चिट्ठा है। आपको कैसा महसूस होता होगा यह तो हमें पता है, लेकिन इसके लिए जो जुगत आप भिड़ाते हैं वह हमें बताएँ तो औरों का भी कुछ भला हो ।

उत्तर - पहले भी हमसे इस बारे में लोग पूछ चुके हैं। समीरजी और रत्नाजी ने पूछा था कि मैं इतना अच्छा कैसे लिख लेते हैं? ये और दूसरे तमाम लोग वे लोग हैं जिनका लिखा मैं मुग्ध होकर पढ़ता हूं।तो भैया ,मुझे तो यह आरोप मेरे साथ ज्यादती लगती है। वैसे आमतौर पर अगर लोग मेरे ब्लाग पर टिप्पणी करते हैं तो उसका कारण शायद मात्र लेखन नहीं है। इसका कारण लेखन के अलावा पाठकों से निस्वार्थ आत्मीयता के भाव के संबंध हैं जो आपस में बिना मुलाकात के भी बने हुये हैं। हमारे ब्लाग को अपना समझना उनकी उदारता का परिचायक है हमारी किसी अच्छाई का नहीं। इसके लिये हमें कोसना बेकार है रवि भाई!

प्रश्न - अभी हाल ही में आपने अपने नियमित चिट्ठालेखन का शानदार दो वर्ष पूरा किया और अपने चिट्ठापोस्टों का दो सैकड़ा भी पूरा किया. आगे कुछ योजनाएँ है दिमाग में?

उत्तर -योजना जैसी तो कुछ खास नहीं लेकिन यह सोच है कि मैं नियमित लेखन करता रहूं तथा निरंतर,चिट्ठाचर्चा जैसे आयोजनों को नियमितता प्रदान करने में सहयोग करता रहूं। इसके अलावा जो भी सहयोग चिट्ठा जगत मुझसे चाहे मैं अपनी क्षमता के अनुसार उसमें सहयोग कर सकूं। हिंदी के उत्कृष्ट लेखन तथा अपने शहर कानपुर के बारे में अधिकाधिक जानकारी नेट पर उपल्ब्ध कराने का भी विचार है।

प्रश्न - अकसर आप अपने चिट्ठाकारी के लिए रविरतलामी को दोष देते हैं और हिन्दी चिट्ठा जगत में किसी पंगे के लिए जीतू को. इन दोनों से आपकी क्या दुश्मनी है?

उत्तर:-हम सच बोलनें में भले हकलायें लेकिन लिखने में घबराते नहीं हैं। रवि रतलामी ने हमें ब्लाग लेखन की राह से रूबरू कराया तो हम इसका दोष उनको देते हैं। अब इसका वो चाहे बुरा माने या भला ! यही बात जीतेंदर के लिये सही है। जैसे जहां आग लगती है तो वहां धुआं जरूर होता है वैसे ही अगर कहीं कुछ भी लफडा़ ब्लाग जगत में होता है तो समझ लो जीतेंद्र वहां मौजूद हैं। जैसे बिना आक्सीजन के आग नहीं जल सकती वैसे ही बिना जीतेंदर के कोई पंगा आगे बढ़ ही नहीं सकता। अब अगर मैं अपने दोस्तों की खूबियों के बारे में जानता हूं और दोस्तों को इस बारे में बताता हूं तो इसमें दुश्मनी जैसे बात कहां से आ गयी यह हमें समझ में नही आ रहा है।

प्रश्न - ऐसी कौन सी चीज है जो आपको अपना चिट्ठा नियमित लिखने को प्रेरित करती रहती है? खासकर तब जब आपको पता होता है कि आपका चिट्ठा इने-गिने सौ-दो-सौ लोग ही पढ़ते हैं, और आपको यह भी पता होता है कि आने वाले दो-चार सालों तक इस स्थिति में कोई खास तबदीली भी नहीं आने वाली है?

उत्तर:-अपने ब्लाग में मैंने अपने लिखने का कारण बताया है-लिखने का कारण यहभ्रम कि लोगों के पास हमारा लिखा पढ़ने की फुर्सत है। ये जो हमारे लेखन और गिने-चुने सौ-दो सौ पाठकों गठबंधन है वह वास्तव में शुरुआती घरेलू माहौल टाइप का है जहां किसी भी लेखक की झिझक मिटती है। हमें और हमारे तमाम दोस्तों को पता है कि हम लोग हमेशा अच्छा नहीं लिखते लेकिन पाठक जो है वो हमें घर के बुजुर्गों की तरह वाह बेटा बहुत खूब कहकर पीठ ठोंकता रहता है। लोग वर्तनी की तमाम गलतियां करते हैं ,बेतुकी बातें लिखते हैं, अच्छा-खराब लिखते हैं लेकिन कुल मिलाकर माहौल किसी घर में अलाव के आसपास बैठकर किस्सा हांकती चौपाल सा है जहां लोग एक दूसरे की पीठ ठोंकते-ठोंकते घायल कर देते हैं। ऐसे माहौल से चाहकर भी दूर नहीं हुआ जा सकता है। दो-चार दिन दूर रहना भी मुश्किल लगता है। लोगों की हालत -"जैसे उड़ि जहाज को पंक्षी,पुनि जहाज पर आवै" वाली हो जाती है। शायद यही बात प्रेरित क्या कहें मजबूर करती हैं नियमित लेखन के लिये।

प्रश्न - चिट्ठों या चिट्ठाकारों के नाम अते पते तो आपसे नहीं पूछते हैं, चूंकि इससे पंगा होने का खतरा है, मगर यह तो बता ही सकते हैं कि आपको किस विषय के चिट्ठे पढ़ने में ज्यादा आनंद देते हैं।

उत्तर:-कोई भी विषय जो मजेदार अंदाज में लिखा गया हो हम मजे से पढ़ते हैं। तकनीकी विषयों में अपना हाथ तंग होने के कारण कम भाते हैं।उनको हम पढ़ भले लें लेकिन समझने के लिये बाद के लिये छोड़ देते हैं फिर कभी नहीं समझते। लेखन में किस्सागोई के साथ-साथ शब्द संयोजन भी आकर्षित करता है। मजेदार होने के बावजूद,एक दम खुला मसाला पढ़ते हुये लगता है कि लेखक को पाठक पर भरोसा नहीं है ।मेरे ख्याल में पाठक को तब ज्यादा मजा आता है जब पढ़ने के साथ उसको लगे कि उसके दिमाग का भी प्रयोग हो रहा है । बिना दिमाग लगाये समझ में आने वाल सपाट लेखन को पाठक दुबारा नहीं पढ़ता। यह कुछ-कुछ वैसे ही है जैसे मूंगफ़ली छीलकर खाने में जो मजा आता है वह छिले हुये दाने चबाने में कहां!

प्रश्न - देबाशीष का कहना है कि आप नित्य, अपडेट हुए तमाम चिट्ठों को पढ़ते हैं, चिट्ठों पर टिप्पणियाँ देते हैं. चिट्ठाचर्चा भी लिखते हैं. साथ ही नियमित, लंबे पोस्ट भी लिखते हैं.साथ में नौकरी, बीवी, बच्चे ...भी! समय प्रबंधन का जो नया तरीका आपके पास है उसे हम जानना चाहते हैं। या फिर, क्या आप दफ़्तर में चिट्ठाकारी का कार्य करते हैं?यदि हाँ तो इस प्रश्न का उत्तर देने से आप मना कर सकते हैं।

उत्तर:- समय संयोजन का कोई गुप्त तरीका नहीं है। यह सारी खुराफाते हम करते हैं उन्ही चौबीस घंटों में जो सबको मिलते हैं। हां यह बात है कि हम जब कोई काम करते हैं तो चाहे जितने सिरफिरेपन का हो हम उसे निपटा के ही छोड़ते हैं। दफ्तर में चिट्ठाकारी संभव नहीं है। हमारी ज्यादातर पोस्टें देर रात की लिखी हैं। स्वामी जी की सबसे पसंदीदा पोस्ट-ये पीली वासंतिया चांद हमने २६ जनवरी को रातभर लिखी और सबेरे पांच बजे पोस्ट की ।फिर नास्ता करके झंडा फहराने गये और फिर अतुल के पिताजी से मुलाकात करने गये तथा लौटकर सोये। कल रात को हम अनूप भार्गव से मिलने लखनऊ गये। बतियाते रहे ।रात केवल तीन घंटे सोये सबेरे लौटे ।लेकिन जवाब देने हैं तो दे रहे हैं। इसे भेजने के बाद घोड़े बेच देंगे।

तो मुझे लगता है कि दिनचर्या में नियमित अनियमितता के कारण ही नियमित लेखन होता है। इससे घर वालों के साथ जरूर कुछ अन्याय हो जाता है लेकिन नौकरी पर कोई नकारात्मक असर हम नहीं आने देते ।

प्रश्न - आपके चिट्ठों के जरिए तमाम दुनिया में आपके नए रिश्ते बन गए हैं आप चिट्ठाकारों के बड़े भाई बन गए हैं. वे आपकी बातें मानने-सुनने लगे हैं। आपके घर पर आपके चिट्ठों का क्या कोई धनात्मक प्रभाव दिखाई देता है?

उत्तर:-यह अतुल ,सागर और दूसरे साथियों का बड़प्पन है कि वे हमारी बात मान लेते हैं और अक्सर अपने मन के विपरीत होने के बावजूद हमारी बात को तरजीह देते हैं। अब अगर उन लोगों में अच्छाइयां हैं तो इसमे हमारा क्या दोष? वैसे सच तो यह है कि कोई भी सम्बंध एकतरफा नहीं बनता और न ही एकतरफा प्रयासों से बना रहता है। कोई भी संबंध बनाये रखने के लिये 'न्यूनतन आपसी ईमानदारी' होना नितान्त आवश्यक होता है। बेवकूफ से बेवकूफ व्यक्ति भी चालाक से चालाक व्यक्ति की हरकतें समझता है ,कहे भले न। मुझे यही लगता है कि चूंकि हमारे संबंधों में आपस में कोई स्वार्थ नहीं है और न ही प्रतिस्पर्धा जैसी बात तो यह अपनापा बना हुआ है। इसका जितना श्रेय मुझे है उससे ज्यादा उन लोगों को है जो हमारी सही गलत बातों को झेलते हुये भी निबाहते रहते हैं। हमारे घर पर हमारे चिट्ठों का कोई तात्कालिक धनात्मक प्रभाव जैसा कुछ नहीं दिखाई देती लेकिन जैसे अतुल,स्वामी,सागर,जीतेन्द्र हमें झेलते रहते हैं वैसे ही घर वाले भी निबाहते हैं।

प्रश्न - चिट्ठा लिखने के लिए आप कोई विषय कैसे तय करते हैं कि चलो 'इस' पर लिख ही दिया जाए. और जो सोचते हैं उस पर लिख ही लेते हैं हर बार? चिट्ठा पोस्ट लिख लेने के बाद क्या आप उसे संपादित परिवर्धित करते हैं या फिर जैसा लिखा वैसा चिपका दिया की तर्ज पर पोस्ट कर देते हैं?

उत्तर:- आम तौर पर संपादन परिवर्द्धन का काम करने के बजाय एक बार में लिख कर पोस्ट कर देते हैं। वर्तनी की गलतियों के अलावा पोस्ट में कुछ जोड़ते हैं तो ऐसे कि पता रहे क्या लिखा है। एकाध बार कुछ दोस्तों ने कुछ कमियां बताईं(राकेश खंडेलवाल ,भोलानाथ उपाध्याय आदि) तो हमने उसे काट कर सही किया। एक बार लिखकर पोस्ट कर देने तथा बाद में अपना लिखा पढ़कर-ये लिखने की क्या जरूरत थी ,क्या बकवास बात लिखी है सोचने में जो मजा है वह संपादन,संसोधन ,परिवर्द्धन करने में कहां?

प्रश्न - नंदन जी के बारे में यह बताने के लिए कि वे आपके मामा लगते हैं, आपने चिट्ठाकारी के पूरे दो वर्ष क्यों ले लिए? फ़ुरसतिया का लेखन इतना संकोचमय तो कभी नहीं रहा।

उत्तर:- नंदनजी हमारे मामा हैं यह हमारे कुछ दोस्तों को पता था ।फिर उनके बारे में जब उचित समय आया तब लिखा भी। संकोच जैसी बात नहीं लेकिन मुझे यह लगता रहा कि लोग ब्लाग हमारा पढ़ते हैं नंदनजी का भान्जा होने के कारण नहीं। वैसे कारण शायद यह भी रहा कि मामाजी से हमारा उतना साथ नहीं रहा जितना लाड़-दुलार वाले ये रिश्ते होते हैं। उनके काम की व्यस्तता और हमारे मिलन में अंतराल काफ़ी रहे। मुलाकातें कम हुईं समय और दूरी के कारण ।वैसे उनका मामा वाला रूप हमारे लिये उतना मह्त्वपूर्ण नहीं हो पाया जितना कि उनका रचनाकार वाला रूप और एक संघर्षशील व्यक्ति का। भयंकर अभावों में बचपन बिताते हुये अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़ना ,बंबई के दिनों में धर्मयुग में भारती जी के तमाम अत्याचार सहते हुये भी पुराने संबंधों की गरिमा और मर्यादा निबाहते हुये उनका सम्मान करना ,फिर दिल्ली आकर प्रतिष्ठा-प्रभाव के शीर्ष तक पहुंचना और अब दोनों किडनी खराब होने तथा हफ्ते में दो डायलिसिस के बावजूद निरंतर सक्रिय बने रहना और इस तरह की तमाम बाते हैं जिनको देखकर आश्चर्य होता है कि कहां से लाते हैं इतनी जिजीविषा वे।यह सब सोचकर गर्व भी होत है कि वे हमारे मामा हैं । पहले क्यों नहीं बताया का कोई जवाब नहीं है सिवाय इसके कि किसी ने पूछा ही नहीं। वैसे और भी तमाम बाते हैं जो शायद आप बाद में कहें कि पहले काहे नहीं बताया!

प्रश्न - आपने अपने चिट्ठापोस्टों में व्यंग्य के कई बेहतरीन नमूने प्रस्तुत किए हैं। आपने लिखने व छपने की कोशिशें पहले क्यों नहीं कीं?

उत्तर:- पहले भी कुछ लेख लिखे लेकिन कहीं छपने के लिये नहीं दिये। नियमित लेखन इधर ब्लागिंग के कारण ही हुआ। अब छपाने का विचार है लेकिन आलस्य है और यह तय करना बहुत मुश्किल कि क्या छपने लायक है और क्या नहीं! कोई बहादुरी दिखाने वाला हो तो खोजे कि कौन से लेख छपाने लायक हैं। प्रश्न - 'फ़ुरसत का कोई दिन' का अर्थ आपके लिए क्या होगा? उत्तर:- 'फुरसत का दिन' का मतलब खाये-पिये-सोये। सोते-सोते थक गये तो थक कर फिर सो गये। तमाम काम की योजना बनाना और जब योजना पक्की बन जाये तो सोचना कि अब योजना पर अमल अगली फुरसत में किया जायेगा। वैसे फुरसत का एक दिन यह भी हो सकता है जब सबेरे से ही लगे कि सारा दिन बीत गया बेकार-

सबेरा अभी हुआ नहीं है लेकिन यह दिन भी सरक गया हाथ से हथेली में जकड़ी बालू की तरह अब, सारा दिन फ़िर इसी अहसास से जूझना होगा।

प्रश्न - चिट्ठाकारी के अतिरिक्त आपको और क्या करना सुहाता है?

उत्तर:- पढ़ना,दोस्तों से मिलना-जुलना, गपियाना। बीच में चैटिंग भी बहुत दिन मन रमा तमाम देश,दुनिया के लोगों से। आफिस का काम पूरा करना प्राथमिकता में सबसे ऊपर है। पढ़ने का शौक इतना है कि रात में कभी बिना कुछ पढ़े कभी नहीं सोता।

प्रश्न - हिन्दी चिट्ठाकारी का व्यवसायिक भविष्य भले ही आपको नहीं दीखता हो, परंतु उसका कुछ तो भविष्य आपको दीखता होगा. आपके विचार में कैसा रुप होगा उसका?

उत्तर:- हिंदी चिट्ठाकारी का व्यवसायिक भविष्य नहीं दिखता यह बात सही नहीं है। मेरा सवाल यह है कि व्यवसायिकता के बारे में जो दावे किये जाते हैं उनको लेकर हैं। भविष्य को लेकर मेरे जो सवाल हैं उसमें आपको जवाब देना है कि सच क्या है? मेरा सोच सही है कि गलत। व्यवसायिकता के बारे में विचार यह है कि ब्लाग पर विज्ञापन दिखें न कि विज्ञापन पर ब्लाग पोस्ट। ऐसा न हो लेखन को विज्ञापन के बीच से बिन-बटोर कर पढ़ना पड़े। कुछ गरिमा रहे। मुझे याद है कि एक बार प्रो.यशपाल ऐसे सूर्यग्रहण के बारे में बता रहे थे जो सैकड़ों सालों में एक बार पड़ता है। ऐन ग्रहण के समय जब दुनिया ऐतिहासिक क्षणों का दीदार कर रही थी तब टेलीविजन वाले 'कामर्शियल ब्रेक' ले रहे थे।इस पर प्रो.यशपाल बहुत खीझे लेकिन 'ब्रेक' ब्रेक नहीं हुआ। ऐसी व्यवसायिकता से हमें बचना होगा। जहां चिट्ठाकारी के भविष्य के बारे में बात है ,समय के साथ लोग और आयेंगे। विविधता बढ़ेगी,शायद अराजकता भी।अभी जो आत्मीयता है उसमे शायद बाद में कुछ दूसरे मत वाले आयें। हो सकता है कोई नया क्षमतावाल लेखक आये और बोरिस येल्तिसिन की तरह टैंक पर चढ़कर पूरा माहौल कब्जियाने का प्रयास करे। अभी नारद के अपना सर्वर के विचार के धनात्मक परिणाम शायद आयें कि काफ़ी लोग और मसाला एक जगह आ जाये।

प्रश्न - चिट्ठाकारों को कोई संदेश देना चाहेंगे? वह इसलिए कि आपका दर्जा बड़े भाई जैसा है - लोगबाग आपकी बातें आदेश समझकर मानते हैं।

उत्तर:- मैंने पहले भी बताया कि हमारे साथी बहुत क्षमतावान हैं। बहुत अच्छा लिखते हैं। तकनीक के मामले में किसी से कमतर नहीं हैं। मेहनत में किसी से कम पसीना नहीं बहाते। लोगों में आपस में लगाव है,सम्मान की भावना है। यह स्थिति अंग्रेजी ब्लागर्स के मुकाबले बहुत अच्छी है जहां कि एक ब्लागर्स के एंटी ब्लाग भी हैं। लोगों के आपसी संबंध इतने नजदीकी बन गये हैं कि घरेलू हो गये हैं। एक तरह की विरल अंतरंगता है आपस में। ये संबंध और प्रगाढ़ बनें यही कामना है।

कभी-कभी दूरी के कारण और विचारों में मतभेद होने के कारण आपस में गर्मा-गरमी भी होती है। जिसे रोकना न सम्भव है न जरूरी। लेकिन मेरी यही इच्छा और गुजारिश है कि दूसरे का पक्ष और मजबूरी जानने की कोशिश ईमानदारी से करते रहें तो मन में मैल नहीं जमेगा। जितने भी बार आपस में लोगों में कहा सुनी सुनी उसमें बहुत कुछ गैर इरादतन ,न्यूटन के नियमानुसार हुयी। लेकिन उसको लेकर बैठे रहना बचकानापन है। यह समझना चाहिये कि हर एक में अच्छाई का प्रतिशत हमेशा अधिक होता है।संबंधों में सौ दिन के सद्व्यवहार पर एक दिन का खराब व्यवहार नहीं हावी होने देना चाहिये।

इसके अलावा जब मौका मिले धांस के लिखें और जब लिखें तो यही समझें कि हम सबसे अच्छा लिख रहे हैं। लगातार लिखते रहने के लिये यह भ्रम बहुत जरूरी है।

प्रत्यक्षा के प्रश्न:

1) फुरसतिया को इतनी फुरसत कैसे रहती है ?

निरंतर अनियमित जीवन चर्या के बीच फुर्सत का समय पसरा रहता है।

2) आपके अंदर परसाई जी की आत्मा कब प्रवेश करती है ?

तब जब अपनी कथा लिख रहे होते हैं या तब जब दूसरों से मज़े ली जा रही होती है ? मुख्य बात मजे लेने की है। चाहे वो अपने आप से ली जा रही है या दूसरे से। वैसे अपने से मौज ले लेना एक सुरक्षात्मक और शातिराना तरीका इस बात की गारन्टी का कि दूसरे आपसे मौज न ले पायें।

3) ब्लॉग्गर समूह में बढते भाईचारे का श्रेय किसको देते हैं ?

लोगों के आपसी समझदारी को।और लोगों में अच्छे गुणों की बहुतायत और फिलहाल किसी स्वार्थ से रहित आपसी लगाव को। वैसे सच तो यह है कि भाईचारा इस लिये बढ़ता जा रहा है क्योंकि ज्यादातर ब्लागर पुरुष हैं। जब महिलाब्लागरों का बहुमत होगा तो ब्लागर समूह में 'बहानापा' बढे़गा।

4)आपने टिप्पणियाँ बाँटी , लोगों की प्रेमपूर्वक खींचाई की , व्यंग परोसे ,बदले में महाबलॉग्गर के पदनाम से आपको नवाज़ा गया । ये लेनदेन बराबरी की रही या नहीं?

यह ऐसा समीकरण है जिसका कोई हल नहीं है। लिहाजा फायदा-नुकसान की गणना नहीं की जा सकती है।

5)किसको लिखने में ज्यादा मज़ा आता है , आपबीती या जगबीती ?

जगबीती लिखने में ज्यादा मजा आता है उसमे ज्यादा मौज ली जा सकती है।

6) आपके पोस्ट इतने लम्बे क्यों होते हैं ?

क्योंकि हमें ऐसा लगता है हमारी छो॔टी पोस्ट लोग पढेंगे नहीं।वैसे सच यह है कि जो हम लिख देते हैं उसको काटने छांटने का सऊर अभी आया नहीं है इसी चक्कर में लंबाई बढ़ जाती है.

7) कवितायें मुझे पसंद नहीं ,ऐसा आप अकसर कहते पाये जाते हैं । फिर हर पोस्ट में 'मेरी पसंद' में एक कविता क्यों रहती है ?

यह बात सरासर झूठ है कि कविता हमें पसंद नहीं है। हम कविता पसंद करते हैं लेकिन हमें यह गलत फहमी भी है कि हमें कविता समझने की तमीज है। इसी भरम के मारे हमें लगता है कि तमाम कवितायें जो लोगों को अच्छी लगती हैं हमें समझ में नहीं आतीं। मुक्तिबोध ने कामायनी एक पुनर्विचार में कामायनी की आलोचना की थी और लोग बताते हैं कि अकेले में कामायनी के पद गुनगुनाते थे। ब्लाग जगत में ज्यादातर कवितायें मैं,तुम और वो को लेकर लिखा जाती हैं या फार्मूलाई अन्दाज में समाज के दोष खोजे जाते हैं। ऐसी कवितायें अक्सर वो मजा नहीं देती हैं जिसकी अपेक्षा रहती है। मेरी पसंद की कवितायें वे कवितायें हैं जो मुझे अच्छी लगती हैं और शायद मेरे दोस्तों को भी ।

8) आप पर आरोप है कि कुछ बेचारे बेगुनाह , बेकसूर लोग हैं जिनकी आप खिंचाई करते रहते हैं । अपनी सफाई में आपको क्या कहना है ?

हमें यही कहना है कि हमारे खिलाफ लगाये गये आरोप निराधार हैं। बेगुनाह,बेकसूर लोगों की खिंचाई हम कभी नहीं करते हैं।जिन लोगों के बारे में लिखने की आप बात कर रहे हैं वह असल में उनके गुणों का बखान होता है,उनका प्रचार होता है। अगर यह न करें तो उनका मानसिक संतुलन नारद की तरह हो जाये। मजबूरी में उनके प्रति प्रेमप्रदर्शन करना पड़ता है।

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यूनिकोड हिन्दी फ़ाइलों को पीडीएफ़ फ़ाइलों में कैसे परिवर्तित करें?

सबसे बढ़िया तरीका तो है कि आप नया, ताजातरीन एडॉब एक्रोबेट ले आएँ. इसमें यूनिकोड का पूरा समर्थन अब उपलब्ध हो गया है. परंतु इसमें आपको जेब से मोटी रकम खर्चनी होगी.

आइए, आपको बढ़िया, फोकटिया रास्ता सुझाते हैं.

दो तरीके आपके काम के हो सकते हैं.

पहला तरीका - मुफ़्त का ओपनऑफ़िस http://www.openoffice.org 2 का इस्तेमाल करें. यूनिकोड हिन्दी फ़ाइलों को ओपनऑफ़िस 2 में खोलें. वैसे आप पूरी तरह से, बढ़िया तरह से ओपनऑफ़िस में यूनिकोड हिन्दी में हर तरह के दस्तावेज़ बना सकते हैं - वर्ड डाक्यूमेंट से लेकर स्प्रेडशीट और प्रेज़ेंटेशन इत्यादि सबकुछ. तो आपका हिन्दी का दस्तावेज़ ओपनऑफ़िस 2 में खुला है. अब आप उसे फ़ाइल>निर्यात मेन्यू के जरिए चुनें पीडीएफ़ , और बस हो गया. है ना आसान. इसमें आपके दस्तावेज़ों की कड़ियाँ, वेब पते इत्यादि भी सुरक्षित और नेविगेशन योग्य बने रहते हैं. हींग लगे न फ़िटकरी और रंग चोखा.

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दूसरा तरीका है - इंटरनेट पर उपलब्ध तमाम तरह के पीडीएफ़ परिवर्तकों का इस्तेमाल. ये पीडीएफ़ परिवर्तक आपके कम्प्यूटर पर एक किस्म के प्रिंटर ड्राइवरों को संस्थापित करते हैं जो आपके दस्तावेज़ों को पीडीएफ़ फ़ाइल के रूप में प्रिंट (सहेजते) हैं. आमतौर पर इन पीडीएफ़ परिवर्तकों में यूनिकोड का समर्थन नहीं है. किसी किसी में यूनिकोड का समर्थन आना अब प्रारंभ हुआ है, परंतु फिर भी यूनिकोड हिन्दी में पीडीएफ़ परिवर्तन में त्रुटियाँ आ ही जाती हैं. हाल ही में जारी नोवा-पीडीएफ़ का नया संस्करण यूनिकोड हिन्दी को पूरा समर्थन देता है और यह त्रुटि रहित भी है. इसका लाइट संस्करण मुफ़्त इस्तेमाल के लिए उपलब्ध है और इसका संपूर्ण प्रोफ़ेशनल संस्करण भी मुफ़्त इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्ते आपको अपने पीडीएफ़ दस्तावेज़ में नोवा-पीडीएफ़ की एक पंक्ति की पाद-सूचना कष्टकारी न लगती हो.

नोवा-पीडीएफ़ का इस्तेमाल अत्यंत आसान है. इसे यहाँ से डाउनलोड http://www.novapdf.com/download/setup/novapp.exe कर संस्थापित करें. फिर किसी भी अनुप्रयोग - यथा वर्ड प्रोसेसर में यूनिकोड हिन्दी पाठ फ़ाइल खोलें और फ़ाइल>प्रिंट मेन्यू चुनें तथा प्रिंटर के रूप में नोवा-पीडीएफ़ चुनें. बस, कोई फ़ाइलनाम दें और हो गया. है ना आसान?

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अनुगूंज में अनुवादित शब्दों की गूंज

यह शब्द भंडार मूलतः गनोम ग्लॉसरी से निकाला गया है. इस अनुवाद में बहुत से अ-हिंदीभाषियों का भी योगदान है. अतः वर्तनी की गलतियाँ हो सकती हैं. अतः वास्तविक इस्तेमाल करते समय वर्तनी सुधार लेने हेतु निवेदन है. इस अनुवाद भंडार को दिल्ली की सराय संस्था (http://www.sarai.net) के सहयोग से आयोजित हिन्दी अनुवाद कार्यशाला में तैयार किया गया है, तथा इसके अधिकांश अनुवादों को हिन्दी लिनक्स तंत्र में इस्तेमाल किया गया है.*****.*****

*abort = रोक दें

*Abstract = सार

*Accelerator = उत्प्रेरक

*Accept = मानना

*access = पहुँच

*Account = खाता

*Active = सक्रिय

*Actor = कर्ता

*Actuator =

*Add = जोड़ें

*Address = पता

*Adjust = अनुकूल बनाना

*Administration = प्रशासन

*Aggregate = योग

*Alarm = चेतावनी

*Align = पंक्तिबद्ध

*Allow = अनुमति दें

*Alpha = अल्फा

*alpha channel = अल्फा चेनेल

*Analog = ऐनालॉग

*Analysis = विश्लेषण

*Anchor = ऐंकर, लंगर

*AND = एनडी

*Animation = चलचित्र

*Anonymous = अज्ञात, अनजान

*Answer mode = उत्तर विधि

*Antialiasing = एंटीएलियासिंग

*Append = अंत में जोड़ें

*Applet = ऐप्लेट

*Application = अनुप्रयोग, युक्ति, ऐप्लिकेशन

*Application Launcher = अनुप्रयोग, युक्ति, ऐप्लिकेशन चालक

*Arc = चाप

*archive = अभिलेखागार

*area grid = क्षेत्र ग्रिड

*Argument = तर्क *Array = ऐरे

*Arrow key = तीर कुंजी

*Article = लेख, वस्तु, चीज

*Ascending order = आरोहण क्रम

*ASCII = आस्की

*aspect ratio =

*Asynchronous =

*Attachment = संलग्नक

*Attribute = खासियत , गुणधर्म

*Audio = ध्वनि, ओडियो

*Authentication = प्रामाणीकरण

*Author = लेखक

*Autofill = खुद भरें

*Availability = उपलब्धता

*Average = औसत

*Axis = अक्ष

*Background = पृष्ठभूमि

*Backup = आपात प्रति / नकल

*Balance = संतुलन

*Base = आधार

*Binary = बाइनरी, द्विचर

*Binding = बाइंडिंग

*Binomial distribution = बाइनॉमियल (द्बिपद) वितरण

*Bit = बिट

*Bitmap = बिटमैप

*Blank = खाली

*Blinking cursor = टिमाटिम संकेत

*block buffer = ब्लॉक बफर

*Blocked = रोका गया, रोके हुए, अव

*Blur image = चित्र धुंधला करें

*body = बॉडी

*Bold = गाढ़ा

*book mark = पुस्तक चिन्ह

*Boolean = बूलियन, बुलीयन

*Box = बक्सा

*Branch = शाखा

*Bricks = ईंटें

*Browse = ब्राउज़

*Browser = ब्राउज़र

*Buffer = बफ़र

*bug = दोष

*Build = बिल्ड

*Bullet = बिंदु संकेत

*Bulletin Board = सूचना पट

*Bus = बस

*Busy = व्यस्त

*Button = बटन

*Byte = बाइट

*C = सी

*Cache = कैश

*Calculator = गणक

*Calendar = तिथि पत्री

*Call = कॉल

*Cancel = रद्द

*canvas = केनवास

*Caption = शीर्षक

*Case Sensitive = केस सेंसिटिव, केस संवेदनशील

*Categories = कोटियाँ

*CD = सीडी

*Cell = सेल , कक्ष

*Cellular = सेल्युलर

*Center = केंद्र , बीच में

*Channel = चैनेल

*Character set = अक्षर माला, सारणी, तालिका

*char cell = अक्षर सेल

*Chat = गपशप

*Check bit = Check bit, जांच बिट

*check box = चेकबाक्स , जाँच बक्सा

*child = शिशु

*child process = शिशु प्रक्रिया

*Class = वर्ग

*Classification = वर्गीकरण

*Clear = साफकरें

*Click = टिक

*Clipboard = क्लिपबोर्ड

*Close = बंद करें

.

.

*code = कोड

*code segment = कोड सेगमेंट/भाग

*Coefficient = गुणांक

*Collaboration = साझेदारी

*Collate = इकठ्ठा करें

*Collision = टक्कर

*combo box = कॉम्बो बक्सा

*Command = कमाण्ड, आदेश

*Command Line = कमांड लाइन , आदेश रेखा

*Command line options = कमांड लाइन , आदेश रेखा विकल्प

*Common properties = साझा गुण , सामान्य गुण

*Compare = तुलना करें

*Concatenate = शब्द जोडें

*Condition = स्थिति

*Conduit = जरिया, माध्यम

*Confidential = गोपनीय

*Configuration = कॉन्फिगरेशन

*Confirm = पक्का करें

*Confirmation = पक्का करना

*Connection = कनेक्शन

*Constraint = सीमा , बंधन

*Content = कॉन्टिन्ट , अंतर्वस्तु, सामग्री

*Continue = जारी, रखें , रहें

*Control = कंट्रोल, नियंत्रण

*Conversion = परिवर्तन

*cookie = कुकी

*Copy = कापी, प्रतिलिपि, नकल

*Copyright = कॉपीराइट, एकाधिकार, स्वाधिकार

*CORBA = CORBA

*Core file = कोर फ़ाइल

*Correlation = संयोजन

*cos = कॉस, कोसाइन

*Cost = मूल्य

*Count = गिनती

*Covariance = सं विविधता / को वेरियंस

*CPU = सीपीयू

*crash = क्रेश करना

*Create = बनाएँ

*Criteria range = कसोजी सीमा

*Critical error = गंभीर त्रुटी

*Crop = छाँटें

*Cross-reference = अंतर संदर्भ

*Ctrl = Ctrl

*Cumulative = संचयी

*Current = बिजली, मोजूदा

*Cursor = संकेतक

*Curve = वक्र

*Customize = फ़रमाइशें

*custom window = फ़रमाइशी विंडो

*Cut = काटो

*Daemon = डीमन

*Data = डेटा, आंकड़ा

*database = डेटाबेस, डेटाधार, आंकड़ाधार, आंकड़ाकोष

*Debug = दोषसुधार

*decimal = दशमलव

*Decrease = घटाएँ

*Default = डिफॉल्ट, तयशुदा, सुनिश्चित

*Delete = मिटाएँ

*Dependence = निर्भरता

*Derived = निष्कर्ष निकालना

*Descending sort = अवरोहण क्रम

*Descriptor = डिस्क्रिप्टर,

*Desktop = डेस्कटॉप

*desktop background = पृष्ठभूमि

*desktop environment = डेस्कटॉप माहोल/वातावरण

*Destination = मंजिल, गन्तव्य

*Destroy = नष्ट करें

*Detection = पता करना

*Device = उपकरण, यंत्र

*Diagonal = कर्णरेखा, कोनाकोनी, तिरछा

*Diagram = चित्राकृति

*Dial = डायल

*Dialog Box = संवाद बक्सा, डॉयलॉग बॉक्स

*Dialout Device = डॉयलआउट उपकरण

*Digits = अंक

*Dimension = आयाम

*Direction = दिशा

*Directory = डिरेक्ट्री

*Disable = अक्षम करना, निष्क्रिय करना

*Discard = त्यागें

*Disconnect = डिस्कनेक्ट

*Discrete = अलहदा

*disk = डिस्क

*Dismiss = खारिज करें

*Display = प्रदर्शक

*Dissipation = शक्तिक्षय

*Distribute = बाँटें

*Distribution list = वितरण सूची

*Dithering = डिथरिंग

*Division by zero = शून्य से भाग

*DMA = डिएमए

*DNS = डिएनएस

*Document = दस्तावेज

*Domain = डोमेन , दायरा

*Dot = बिंदु

*Download = डाउनलोड, उतारिए

*drawer = आरेखक

*Drawing Area = चित्र क्षेत्र

*Drop = छोड़ें

*Druid = ड्रुइड

*dumb Terminal = डंब टर्मिनल

*Duplicate... = दोहरी , दो प्रति, दोहरा

*Dynamic = गतिशील

*Echo = गूंज, इको

*Edge = किनारा

*Edit = सम्पादन

*Effects = नतीजा, गुणकारी

*Eject = बाहर करें

*Electronic Mail = इलेक्ट्रानिक मेल

*E-mail = ई-मेल

*emulation = समानुकरण, एमुलेशन

*Enable = सक्षम

*Encapsulated Postscript = संपुटित पोस्टस्क्रिप्ट

*Encoding = एनकोडिंग

*Engineering = यांत्रिकी, अभियांत्रिकी

*Entity = एंटिटी

*environment variable = एनवायरमेंट वेरिएबल

*Equation = समीकरण

*Error = त्रुटी, गलती, दोष

*Ethernet = इथरनेट

*Event = घटना

*Exception = एकसेप्शन

*Exclusive OR = एक्सक्लूसिव OR

*executable file = क्रियान्वयन योग्य फ़ाइल

*Execute = क्रियान्वित करें, चलाएँ

*Exit = बाहर, निर्गम, निकास

*Expanded memory = फैली मेमोरी

*expected location = अपेक्षित स्थान, जगह

*Explicit state = स्पष्ट स्थिति

*Exponential notation = एक्सपोनेंशियल नोटेशन , घातीय

*Export = निर्यात

*expression = एक्सप्रेशन

*Extension = विस्तार, एक्सटेंशन

*Extract = निचोड़

*Favorite = पसंदीदा

*Fax = फैक्स

*Field = फील्ड

*File = फ़ाइल

*Filename = फ़ाइलनाम

*Filesystem = फ़ाइलसिस्टम

*Fill = भरें

*Filter = फिल्टर, छानें

*Find = ढूंढें

*Firmware = फर्मवेयर

*Fixed Font = फिक्स्ड फ़ॉन्ट

*Float = फ्लोट, तेरता

*Floppy = फ्लॉपी

*Flow analysis = प्रवाह विशलेषण

*Flowchart = फ्लोचार्ट

*Folder = फोल्डर

#. A set of characters of the same typeface (such as Garamond), style (such as italic), and weight (such as bold). *Font = फ़ॉन्ट

*Footer = पाद सूचना

*Forecast = पूर्वानुमान

*Foreground = अग्रभूमि

*fork = फोर्क

*Form = फॉर्म

*Format = फरमा , प्रारूप

*Formula = सूत्र

*Fourier Analysis = फूरिये विश्लेषण

*Fraction = अंशभाग, भिन्न

*Frame = फ्रेम, ढांचा

*Free Software = स्वतंत्र सॉफ्टवेयर

*Frequency = आवृत्ति, बारंबारता

*FTP = एफटीपी

*full pathname = पूरा पथनाम

*Function = प्रकार्य, फंक्शन

*Gamma = गामा

*Geometry = ज्यामिति

*get = गेट, पाएं

*Global = भूमंडलीय, वैश्विक

*GNOME = गनोम

*GNU = ग्नू

*GPL = जीपीएल

*Grab = पकड़ें

*Gradient =

*Graph = ग्राफ

*Graphical user interface = ग्राफिकल यूजर इंटरफेस

*Grid = ग्रिड

*Group = ग्रुप, समूह

*GTK+ =

*GUI = जीयूआई

*Gutter = गटर

*Hacker = हेकर

*Handle = हैंडल

*Handshake = हैंडशेक, हाथ मिलाएँ

*Hard Disk = हार्ड डिस्क

*Header = शीर्षक, हेडर

*Headword = शीर्ष शब्द

*Hello World = सबको नमस्कार

*Help = सहायता

*Hex = हेक्स

*Hidden file = छुपी फ़ाइल

*Hide = छुपाएँ

*hierarchy = क्रमव्यवस्था, पदानुक्रम, तरतमता

*Highlight... = उभारें ...

*Histogram = हिस्टोग्राम, आयत चित्र

*History = नक्शे कदम, इतिहास, पिछला, लेखा-जोखा

*Home = अथ, इब्तदा, आशियाना, घर, शुरुआत

*Home directory = निजी डिरेक्ट्री, अपना डायरे ...

*Home Page = शुरुआती पृष्ठ , पहला पन्ना

*Homogeneous environment = एकरूप वातावरण, समरूप वातावरण

*Host = होस्ट, मेज़बान, आतिथेय

*Host name = होस्ट नेम, मेज़बान का नाम

*Hot Key = फटाफट कुंजी

*Housekeeping = सार संभाल, देख-भाल , देख-रेख

*HTML = एचटीएमएल

*HTTP = एचटीटीपी

*Hue = छटा

*Icon = निशान, आइकन

*ID = आईडी, पहचान, क्रं

*IDE = आईडीई

*Identifier = पहचानकर्ता

*Idle = सुप्त, सुस्त

*Illegal = अवैध, अमान्य

*Image = चित्र, छवि, बिम्ब

*Implementation = क्रियान्वयन, अमल

*Import = आयात

*Inactive window = निष्क्रिय विंडो

*Increase = बढाऐं, बढत

*Incremental update = नये को अपडेट करना

*Indent = इंडेंट

*Index = सूची

*Indicator = सूचक

*Information = जानकारी, सूचना

*initialization = बिस्मिल्ला करना, श्रीगणेश करना, आरंभीकरण करना, शुरुआत करना

*Inode = आईनोड

*Input = इनपुट

*Input/output = इनपुट/आउटपुट

*insensitive version = असंवेदी संस्करण

*Insertion point = प्रवेश बिंदु, घुसाव बिंदु

*Install = स्थापित करना

*instruction pointer = निर्देश सूचक

*Interaction = अंतर्क्रिया

*Intercept = बीच में झटकना

*Interchange File Format = इंटरचेंज फ़ाइल फोर्मेट/प्रारूप

*Interface = इंटरफेस, मुखामुखम, आमुख

*Internal bug = आंतरिक दोष

*Internal error = आंतरिक त्रुटि

*International = अंतर्राष्ट्रीय

*Internet = इंटरनेट, अंतरजाल

*Interrupt = रोकें, टोकें

*Intersect = प्रतिच्छेदन, इंटर्सेक्ट

*Interval = अंतराल, फ़ासला

*Intuitive = अंतःप्रज्ञा

*Invalid = अवैध

*Invert = उलटना

*Invert Selection = चुने हुए को उलटें

*Invisible = अदृश्य

*I/O subsystem = आइ/ओ उप तंत्र , प्रणाली

*IP address = आईपी पता

*IRC = आईआरसी, इंटरनेट रिले चैट

*Jaz Drive = जैज ड्राईव

*Job = कार्य

*JPEG = जेपिजी

*Justify = जस्टीफाय, शब्दों के बीच जगह, समान रुप से दाएँ-बाएँ, उपर नीचे सजाना

*KDE = केडीई

*Kernel = करनेल

*Key = कुंजी, चाबी

*Keyboard = कीबोर्ड, कुंजीपट

*Keyboard shortcut = कीबोर्ड शॉर्टकट

*Keymap control = कीमेप नियंत्रण

*Keyword = बीजशब्द

*Kill = मारना

*Kill app = युक्ति मारना/मारें, अनुप्रयोग को मारें

*Kilobyte = किलोबाईट

*Label = लेबल, नामांकन करना, नाम देना

*Lambda = लेंबडा

*Landscape = लेण्डस्केप, भूदृश्य

*Language = भाषा

*LaTeX = लेटेक

*Launcher = लांचर

*launch icon = चालु करने वाला निशान

*Layer = परत

*Layout = विन्यास, बनावट

*Legal = Legal

*Length = लंबाई

*Letter = लैटर

*Library = फंकशन कोश

*License agreement = लाइसेंस करार

*Light precipitation =

*Limits = हदें, सीमाएं

*Line = लाईन, पंक्ति

*line arguments =

*linear transfer = सीधा तबादला

*Link = कड़ी

*Linux = लिनक्स

*load = लोड करना

*Local = स्थानीय

*Location = पता, ठिकाना, स्थान

*Lock = ताला

*Log = रोजनामचा

*Logical = तर्कसंगत

*Login = दाखिल हों

*Logout = बाहर जाएं

*Look = दृश्य, देखें, सूरत

*Lookup = मिलान, ढूँढे

*Loop = दोहराव, आवृत्ति, पुनरावृत्ति

*Macro = मेक्रो

*Mail = डाक

*Mailbox = डाक डिब्बा

*Mail Client = डाक ग्राहक, डाक सेवक, डाक युक्ति

*Mail server = डाक सेवक, डाक सर्वर

*Mail to = मेल टू

*Main body = मूल ढांचा

*Manager = प्रबंधक

*Man Pages = सहायता पन्ने

*Manual = निर्देशिका

*Manual page =

*Margins = हाशिए

*Mark = विभाजक चिह्न

*matching = संगति जांच, संगति मिलान

*MDI =

*Median = माध्य

*media type = मीडिया प्रकार

*Meeting = मिलाप, बैठक, मुलाकात

*Memory = मेमोरी, स्मृति

*Menu = मेन्यू, मेनू

*menubar =

*menu item =

*Merge = मिलाना

*Message = संदेश

*Metadata = फ़ाइल विवरण

*Metafile = स्बतंत्र फ़ाइल

*MIME Type = माइम प्रकार

*mini icons = छोटा/लघु आइकन/प्रतीक चिन्ह/निशान

*Minimize = छोटा करें

*MINIX = युनिक्स

*minor faults = छोटी गलतियाँ

*mirror = मिरर, प्रतिछवि, प्रतिबिंब

*mixer device = मिश्रण यंत्र

*Modal (value) = मोडल (मान)

*Mode = स्थिति

*Model = नमूना

*Modem = मोडेम

*Modifier = सहायक कुंजी

*Modify = संशोधित करें

*Module = मॉडयूल

*Monitor = मॉनिटर, दरसपट

*monochrome = मोनोक्रोम

*Mount = माउन्ट

*Mouse Cursor = माउस संकेतक

*Move = खिसकाएँ

*MS = MS

*MSDOS = MSDOS

*MTU = MTU

*Nautilus = नॉटिलस

*Negative Binomial = ऋणात्मक बायनॉमियल

*Netmask = नेटमास्क

*Netscape = नेटस्केप

*Network = नेटवर्क

*News Site = समाचार साइट

*NO-DAEMON = NO-DAEMON

*node = नोड

*Normal distribution = सामान्य वितरण

*Notebook = नोट बुक

*Notice = सूचना

*Notification = अधिसूचना

*Number = संख्या

*Number Converter = संख्या प्रवर्तक/कनवर्टर

*Numbered List = संख्या सूची

*Number Theory = संख्या थ्योरी

*Numeric = न्यूमेरिक, सांख्यिक

*Object code = ऑबजेक्ट कोड

*oblique = ऑब्लिक

*Observations = अवलोकन

*Obsolete = चलन में नहीं

*Offline = ऑफलाइन

*Online = ऑनलाइन

*Opacity = पारधमिता, अपार्दरशिता

*Open = खोलें

*Open Source = ओपन सोर्स, मुक्त स्रोत

*Operating System = ऑपरेटिंग सिस्टम

*Operation = ओपरेशन

*optional = वैकल्पिक

*Options = विकल्प

*OR = OR

*Order = क्रम

*Orientation = दिशा

*Origin = मूल

*Orthflow = ऑर्थफ्लो

*Outline = रूपरेखा

*Output = आउटपुट

*Overwrite = मिटाकर लिखें

*Owner = मालिक

*Pack = जमा, ठूँसे

*Package = पैकेज

*Packet = पेकेट

*Padding = पैडिंग

*Page = पृष्ट

*Pager = पेजर

*Palette = रंगदानी

*pane = सीमा, दायरा

*Panel = पेनल

*Panelize = पेनलीकरण

*Parameter = पेरामीटर

*Parcel = पार्सल

*Parse = पदाच्छेद, काट-छांट, छोटा करना

*Partition = विभाजन

*Password = पासवर्ड, चाबी, गुप्तशब्द

*Paste = चिपकाएं

*Path = पथ, पाथ, रास्ता

*Pattern = आकृति बंध, तौर तरीका, पद्धति

*Peak indicator = मूलसूचक

*Pearson Correlation =

*pending signals = अवशेष संकेत

*Period = अवधि, काल

*Periodic = आवधिक, कालिक, नियतकालिक

*Perl = पर्ल

*Perl Script = पर्ल लिपि

*Permission = इजाज़त, अनुमति, आज्ञा

*physical memory = फिजिकल मेमोरी

*picker button = चुनने वाला बटन, पिकर बटन

*Picker Settings = पिकर सेटिंग्स/समायोजन

*PID = पीआईडी

*Pilot device = पायलट डिवाइस

*Pipe = पाईप

*Pixel = पिक्सल

*Pixmap = पिक्समैप

*Place = v रखना, स्थापन करना,n जगह, स्थान

*Play = n खेल, v खेलें

*Plug-in = प्लग इन

*Point = बिंदु, पाइंट

*Poisson distribution =

*Policy = नीति

*Polygon = बहुभुज

*Polyline = पॉलिलाईन

*Pooled Variance = जबरदस्ती का बदलाव

*popup menu = पॉपअप मेन्यू

*port = पोर्ट

*Portrait = लम्बाचित्र, पोट्रेट

*Postal Box = डाक बक्सा

*Post Office = डाकखाना, डाकघर

*Post Processor = पोस्ट प्रोसेसर

*PostScript = पोस्टस्क्रिप्ट

*power management = बिजली प्रबंधन, पाबर प्रबंधन

*PPP = पीपीपी

*Preferences = पसंद-नापसंद, वरीयताएँ

*Prefix = उपसर्ग

*Preview = पूर्वदर्शन, झाँकी, झलक, पूर्वावलोकन

*Primary Colors = प्राथमिक रंग

*Print = छापें

*Print area = छपाई क्षेत्र

*Printer = प्रिंटर, छपाई मशीन

*Priority = प्राथमिकता

*Privacy = प्रायवेसी, गोपनीयता

*Private key = निटी कुंजी, प्रायवेट कुंजी

*Private Messages = निजी संदेश

*Problem = समस्या, मसला

*Process = प्रक्रिया

*Process ID = प्रक्रिया क्रमांक

*Processor = प्रोसेसर

#, fuzzy*profile = कोर फ़ाइल

*Program = प्रोग्राम

*Progress = प्रगति

*Progress Bar = प्रगति पट्टी

*project = प्रॉजेक्ट, परियोजना

*Propagation = प्रवर्तन

*Properties = गुणधर्म, विशेषताएँ

*Proportional font = आनुयातिक फ़ॉन्ट

*Protected = सुरक्षित

*protected workbooks = सुरक्षित कार्यपुस्तक

*Protection = सुरक्षा, हिफ़ाजत

*Protocol = प्रोटोकॉल

*Provision = प्रावधान

*Proxy = प्रॉक्सी

*proxy server = प्रॉक्सी सर्वर

*Public = पब्लिक, सार्वजनिक, आम

*Public Key = पब्लिक कुंजी

*Query = सवाल, जिज्ञासा

*Queue = क्यू में, लाइन में लगाएँ, पंक्तिबद्ध करें , कतारबद्ध करें

*Quit = निकलें, बाहर निकलें,

*Quoting = कोटिंग

*Radar map = रेडार नक्शा

*Radio = रेडियो

*Radio Button = रेडियो बटन

*Random = बेतरनीब, अनियमित, अनिश्चित, अनियत

*Range = सीमा, दायरा

*Rank = स्थान

*Rating = स्थिति, रेटिंग

*Ratio = दर, अनुपात

*Raw data = कच्चा माल, कच्चा डाटा, रॉ डाटा

*Raw memory = रॉ मेमोरी

*Readout = पढें

*ready... = तैयार ...

*Real Memory = असली स्मृति, असली मेमोरी

*real path = असली पाथ/पथ

*Real time = असली समय

*Reboot = रीबूट, फिरचालू करें

*Receive = ग्रहण करना/लेना

*Receptivity = संवेदना

*Record = रिकॉर्ड, दस्तावेज

*Rectangle = चतुर्भुज

*Recurrence = आवृत्ति

*Recursion = बारंबारता, रूटीन

*Redisplay = फिर दिखाएँ, पुनप्रदर्शन

*Redo = फिर करें

*Refresh = ताजा करें

*Region = क्षेत्र

*Regression analysis =

*regular = नियमित

*Regular expression = रिग्युलर एक्सप्रेशन

*Regulate = नियंत्रित करना

*Relationship = संबन्ध, रिश्ता

*Release = जारी करना, लोकार्पण, रिलीज

*Remote = रिमोट, दूर की कुमजी, दूरस्थ

#. To delete permanently. *Remove = हटाएँ

*Rename = पुनर्नामकरण

*Repeat = दोहराएँ

*Replace = बदलें

*Reports = रपट, रिपोर्ट

*reserved blocks = आरक्षित खंड

*Reset = पुनः सेट करें, रीसेट, पुनः सेट करें

*Resident = निवासी

*Resident memory = निवासी स्मृति, रेसिडेंट मेमोरी

*Residual = बचा-खुचा

*Resize = बडा-छोटा करें

*Resolution = रेज़ोल्यूशन, चित्रमाप

*Resource element = संसाधन तत्व

*Restart = फिर चालू करें

*Resume = दुबारा चलें

*Retrieve = वापस निकालना

*Retry = फिर कोशिश करें

*Return = रिटर्न

*Reverse video = पलट वीडियो

*Revert = पलट

*Root = रूट

*Root Directory = रूट डिरेक्ट्री

*Root Window = रूट विंडो

*Rotate = घुमाएँ, नचाएँ

*Row = रो, कतार, पंक्ति

*RPM package = आरपीएम पैकेज

*Run = चलाएँ

*Sample = नमूना

*Sampling = नमूना बनाना

*Saturation = तृप्ति

*Save = सहेजें, संग्रह करें, संचित करें

*Save As = सहेजें, संग्रह करें, संचित करें

*Scalable = आकार बदलने योग्य

*Scalar = स्केलर, अदिश

*Scale = मापक

*Scaling Factor = माप कारक

*Scan = स्केन

*schedule manager = कार्यक्रम प्रबंधक

*schema = स्कीमा, योजना

*Scientific notation = वैज्ञानिक चिन्ह

*Screen = सक्रीन, पट, पर्दा

*Screensaver = सक्रीन सेवर

*Script = स्क्रिप्ट

*Scroll = स्क्रॉल, ऊपर नीचे करें

*Scrollbars = स्क्रोल बार

*SCSI = स्कसी, एससीएसआई

*Search = खोजें

*Search Domains = डोमेन खोजें

*search string = लड़ी खोजें

*Secondary Colors = द्वितीयक रंग

*Secure channel = सुरक्षित चैनेल

*Secure keyboard = सुरक्षित कीबोर्ड

*Security = सुरक्षा

*Segment = सेगमेंट, हिस्सा, भाग, अनुभाग

*Segmentation Fault = खंड दोष

*Select = चुनें

*Selection = चयन

*Send = भेजें

*Sense = भाव, बोध

*Sensitive = संवेदी

*Separator = विभाजक

*Server = सर्वर

*Session = सत्र

*Set = व्यवस्थित करना, मान लगाना, निश्चित करना

*Settings = समायोजन, विन्यास

*Setup = सेटअप, व्यवस्थित

*Severity = गंभीरता, तीव्रता, तीक्ष्णता

*shaped text = रूपयुक्त पाठ

*Share = आदान प्रदान, साझा

*Shared Memory = साझा मेमोरी

*Shell = शेल

*Shift key = शिफ्ट कुंजी

*Show = दिखाँए

*Shut Down = बंद करें

*Signal = सिग्नल, संकेत, इशारा

*signature = हस्ताक्षर

*signature block = हस्ताक्षर खंड

*Size box = आकार बक्सा

*Skewness = तिरछापन, टेढ़ापन, वक्रता, बाँकापन

*Skip = छोड़ना, उछाल

*Slant = ढलान, वक्र स्थिति

*Slashed Cross = कहा हुआ क्रॉस

*slave = दास

*Sleeping = सुप्त

*slider = स्लाइडर

*SLIP = स्लिप

*slow terminals = धीमे टर्मिनल

*Smart = चतुर, स्मार्ट

*Smart terminal = चतुर, स्मार्ट

*smooth = समतलीकरण

*SMTP = एसएमटीपी

*Snap = क्षणचित्र

*Snooze = फिर जागना

*Socket = सॉकेट

*SOCKS Server = सोक्स सर्वर

*soft keys = सॉफ्ट कुंजियां

*software bug = सॉफ्टवेयर दोष

*Software Foundation = सॉफ्टवेयर प्रतिष्ठान

*Solid lines = ठोस पंक्तियाँ

*Solid model = ठोस नमूना

*Sort = क्रमबद्ध करें

*sound card = साउन्ड कार्ड

*Source = स्रोत

*Source code = स्रोत कोड

*Space character = रिक्त अक्षर

*Spam = बेकार डाक

*Special character = विशेष अक्षर

*Spell = वर्तनी

*Spell Checker = वर्तनी जाँच

*spool = स्पूल

*Stabilize = स्थायी

*Stack = ढेर लगाना

*Standard = प्रमाणिक, मानक

*Standard deviation = मानक विचलन

*Standby = तैयार रहें

*Start = प्रारंभ

*Startup = प्रारंभ में

*startup files = प्रारंभिक, आरंभिक, शुरुआती फाइलें

*Startup Program = प्रारंभिक, शुरुआती, आरंभिक प्रोग्राम

*State = स्थिति, हालत

*Statistics = सांख्यिकी

*Status = स्थिति, स्तर

*statusbar = स्थिति, स्तर

*step increment = पद बढ़ाना

*Stereotype = स्टीरियो टाइप

*sticky notes = चिपकने वाले संदेश, टिप्पणी

*Stock Ticker = स्टोक टिकर, जमा पट्टी

*Storage = संग्रह, संचित, संचयन, भंडारन

*Strikethrough = शब्दभेद, शब्द को काटना, काटकर निकालना

*String = अक्षरलड़ी, अक्षरमाला, अक्षरसमूह, वाक्य

*stripchart program = स्ट्रिपचार्ट प्रोग्राम

*structure diagram = संरचना आकृति/चित्र, योजना आकृति

*Style = शैली

*Subdirectory = सबडिरेक्ट्री

*Subject = विषय

*Submenu = उपसूची. उपमेनु, मेन्यु

*Submit = सौंपें , जमा करें

*Subnet = उपनेट, सबनेट

*Subscript = सब्स्क्रिप्ट

*subshell support = सबशेल सहयोग, समर्थन, सहायता

*substring = अक्षरकड़ी, उपवाक्य

*Suffix = प्रत्यय

*Superscript = उपरीलिपी

*Support = सहयोग

*Suspend = बर्खास्त करना, निरस्त करना, निलम्बित करना

*Swap = स्वेप, बदलना

*Switch level = स्तर परिवर्तन, स्विच स्तर, स्तर बदलें

*SYLK file = SYLK फ़ाइल

*Symbol = प्रतीक

*Symbolic link = ठोस पंक्तियाँ

*Symmetric control =

*Synchronize =

*Syntax error = व्याकरण दोष

*System = तंत्र

*system administrator = तंत्र प्रबंधक, शासक

*System Configuration = तंत्र कान्फिगुरेशन

*system settings = तंत्र सेटिंग

*Tab = टैब

*Table = टेबल, सारणी

*tag = टैग

*Talk = वार्ता

*tall = लंबा, लंबाई

*tar archive = टार अभिलेखागार

*target file = लक्ष्य फ़ाइल

*task = टास्क

*TCLASS = टी क्लास

*TCP/IP = टीसीपी/आईपी

*Telnet = टेलनेट

*temp file = अस्थायी फ़ाइल

*Template = टेम्पलेट, प्रारूप

*temporary buffer = अस्थायी बफ़र

*Term = पद

*Terminal = टर्मिनल

*Terminate = अंत करना, बन्द करना

*TERM variable = TERM परिवर्तनीय

*Test = परीक्षण, जाँच

*Test Module = टेस्ट मॉड्यूल, परीक्षण मॉड्यूल

*Text = पाठ्य, पाठ

*text area = पाठ क्षेत्र

*Text only = केवल पाठ

*textual name = पाठ्यनाम

*Theme = थीम, प्रसंग

*Threshold = दहलीज

*Thumb Nails = लघु छवि

*Tick = टिक

*Ticker Properties = टिकर विशेषताएँ, गुण

*Tile = टाइल, ईंट

*Time format = समय प्रारूप

*Timeout = समय खत्म, खलास

*Timer = टाइमर

*timestamp = समय चिन्ह

*Timezone = समय क्षेत्र, टाइमजोन

*Timing = टाइमिंग

*Title = शीर्षक

*TODO List = करणीय, कार्यसूची

*toggle = टॉगल

*Tolerance = धेर्यसीमा, सहिष्णुता

*Tool = औजार

*Toolbar = औजार पट्टी

*tool menu = औजार मेन्यू

*Tooltip = औजार युक्ति

*topic = विषय

*Transfer = स्थानांतरित करना

*Transfer statement =

*Transitive =

*Translate = अनुवाद

*transmission channel = प्रसारण चैनल

*Transparent = पारदर्शी

*Transpose = अदला बदली

*Trash = रद्दी

*Tree = ट्री

*Trim = छांटना

*Turing Machine = ट्यूरिंग मशीन

*Type = टाइप

*type bindings = टाइप बाइंडिंग्स

*Type mismatch = टाइप मिसमैच

*Tty = टीटीवाय

*Undelete = बहाल करें

*Underline = रेखांकित करें

*Undo = रद्द करें, वापस करें, बहाल करें

*Unexpected end = अप्रत्याशित अन्न

*unexpected error = अप्रत्याशित दोष, त्रुटी, भूल

*Unicode = यूनिकोड

*Uniform Resource Identifier =

*Uniform Resource Locator =

*Uninstall = अनस्थापित करें, हटाएँ

*UNIX = युनिक्स

*Unknown host = अज्ञात मेजबान

*Unload = हटाएँ

*Untitled = बेनाम

*Update = अद्यतन करना, ताजा करना

*Upgrade = अद्यतन करना

*Uptime = मशीन चालु समय

*Urgent condition = आपात स्थिति

*URL = यूआरएल

*USB = यूएसबी

*User = उपयोक्ता

*User defined = उपयोक्ता निश्चित/परिभाषित/तय

*user directory = उपयोक्ता डिरेक्ट्री

*User Interface = उपयोक्ता इंटरफेस, उपयोक्ता आमुख

*Username = उपयोक्तानाम

*Valid chars = वैध अक्षर

*Value = मान

*Variable = परिवर्ती

*Variance = विविधता

*Vector Graphics = वेक्टर ग्राफिक्स

*Vendor = विक्रेता, वेंडर

*VERBOSE = बड़बोला

*Verify = तस्दीक करना

*Version = संस्करण

*Vertical = लंबवत

*Vertical Alignment = लंबवत समायोजन

*VFS = वीएफ़एस

*Video = वीडियो

*View = देखें, दिखाएँ, दर्शन, नजारा

*Viewport = झरोखा

*Virtual = वर्च्युएल, आभासी

*Virtual Desktop = आभासी डेस्कटॉप

*Visualization =

*Volume = वाल्यूम

*Wallpaper = वॉलपेपर

*Warning = चेतावनी

*Watch file = फ़ाइल निगरानी

*Web Page = वेब पेज

*Weight = भार

*Widget = विजेट

*Width = चौडाई

*Window = विंडो

*Window Manager = विंडो प्रबंधक

*Word = शब्द

*Work = कार्य

*Workbook = कार्यपुस्तक

*working directory = कार्यकारी डिरेक्ट्री

*workspace = कार्यक्षेत्र, कार्यस्थल, कार्यस्थान

*Wrap = खिंचना, खिसकाना, रैप

*Write = लिखें

*WVLAN = WVLAN

*X Align = X अलाइन

*XDMCP socket = XDMCP सोकेट

*XML = एक्सएमएल

*X server = डाक सेवक, डाक सर्वर

*zero = शून्य

*Zigzagline = टेढ़ीमेढ़ी रेखा

*Zip Drive = जिप ड्राइव

*Zoom = छोटा-बड़ा करें

#~ *Applix #~ = ऐप्लिक्स

#~ *Ascii #~ = ऐस्की

#~ *CDE panel #~ = सीडीई पैनेल

#~ *Gtk #~ = जीटीके

#~ *minix #~ = मिनिक्स

#~ *Prodigy #~ = प्रोडिजी

#~ *SC/XSpread #~ = एससी/एक्ससप्रेड

.
अश्लीलता का लाभांश - भाग 2

**-**

पूर्व में आपने पढ़ा कि किस तरह मेन स्ट्रीम की मीडिया चाहे वह टेलिविजन हो या अख़बार-पत्रिकाएँ - अपने प्रसार और टीआरपी रेटिंग के लिए अश्लीलता का खंभा ऐन केन प्रकारेण थामे ही रखती हैं.

क्या कला जगत् इससे अछूता है?

मुम्बई में पिछले दिनों एक कला प्रदर्शनी लगाई गई जिसका तो नाम ही अश्लील था - टिट्स एन क्लिट्स एन एलीफ़ेंट्स डिक. प्रदर्शनी में उत्थित लिंगों के विविध स्वरूपों के कल्पनीय-अकल्पनीय कला स्वरूपों की नुमाइशें थीं. वैसे, कोकाकोला की तिरछी रखी, अस्सी अंश कोण बनाती बोतल से कला के जिस स्वरूप का आभास दिलाया जा रहा था वह किसी पेय के कर्वी बोतल की मार्केंटिग स्ट्रेटेजी से भिन्न कतई नहीं था.

कला ऐसी होनी चाहिए?








फ़वद तमकंत की पेंटिंग - स्ट्रीट कल्चर का विज्ञापन

आर्ट इंडिया का ताज़ा अंक (वॉल्यूमXI, संस्करण II, तिमाही II) भी चिल्ला चिल्ला कर इसी धारणा को सत्यापित करता दीखता है.

इसके भीतर के पृष्ठों में स्थापित, स्थापित होने के लिए संघर्षशील और नौसिखिए - तमाम किस्म के कलाकारों की तमाम तरह की कलाकृतियाँ हैं. कुछ कलाकृतियों को आर्ट गैलरी के विज्ञापनों में उद्धृत किया गया है तो कुछ कलाकृतियों को कलाकारों व कला समीक्षा हेतु उद्धृत किया गया है. पत्रिका में प्रकाशित अधिकांश कलाकृतियों को एक सामान्य-सी नज़र में देखकर ही अश्लील करार दिया जा सकता है. निश्चित रूप से इस तरह की तथाकथित कलाकृतियाँ अभिजात्य वर्ग में खासी पसंद की जा रही हैं और ये मुँह मांगे दामों में खरीदे बेचे जा रहे हैं. तभी तो ऐसी कलाकृतियों की बाढ़ सी आई हुई है और प्रदर्शनियाँ भी लग रही हैं जिनका नाम ही टिट्स एन क्लिट्स एन डिक्स से प्रारंभ होता है.

.

.

या कला ऐसी होनी चाहिए?










के.जी.सुब्रमण्यन की पेंटिंग की समीक्षा

यूं तो नग्न आदमी/औरत का मॉडल के रूप में व्यक्ति चित्र बनाना चित्रकला संकाय के विद्यार्थियों के प्रथम असाइनमेंट में ही सम्मिलित होता है. इसके बगैर उसका व्यक्ति चित्रण का कॉसेप्ट ही साफ नहीं होता. मगर इसका अर्थ यह नहीं कि वह सिर्फ नग्नता ही चित्रित करता फिरे. विख्यात चित्रकार अंजली इला मेनन ने कभी अपनी सालगिरह पर ऐसा केक काटा था जो स्तन के आकार का था, तो उस वक्त इस धमाकेदार खबर को पृष्ठ-3 पर और कला जगत् में बढ़िया, लाभप्रद प्रतिक्रियाएँ मिलीं. संभवतः इस केक ने अंजली की कला के और कलाकृतियों के मूल्यों में और इजाफ़ा किया हो.

या फिर कला ऐसी हो-








जोगेन चौधरी की पेंटिंग - कपल

समकालीन कलाकारों को लगता है अश्लीलता चित्रण रास आने लगा है. नए खरीदार नए बाजार पैदा हो गए हैं - तभी तो धड़ल्ले से ऐसी कलाकृतियाँ बनने बिकने लगी हैं. अश्लीलता में कला निश्चित रूप से नया प्रयोग है, जो लगता है कि सबको रास आ रहा है.

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(शिक्षक दिवस पर समर्पित - मरफ़ी के नियम को सत्य करता हुआ - दो दिन बाद!)

मरफ़ी के कुछ विद्यार्थीय - शिक्षकीय नियम...

• कक्षा में लगी घड़ी हमेशा गलत समय बताती है.
• स्कूल लगने का घंटा जल्दी बजता है, छुट्टी की घंटी देर से बजती है.
• स्कूल की घंटी दोपहर के खाने की छुट्टी के समय तीव्र गति से चलने लगती है.
• जब विद्यार्थी कमरे में होते हैं तभी महाविपदा आती है


• शिक्षकों के लिए हर मजेदार विषय विद्यार्थियों के लिए उबाऊ होता है.
• विद्यार्थियों द्वारा किसी विषय को समझे जाने की संभावना उस विषय की व्याख्या के लिए शिक्षक द्वारा लिए गए समय व किए गए श्रम के उलटे अनुपात में होती है.
• कक्षा की लंबाई (समय), उबाऊ शिक्षक व उबाऊ विषय के सीधे अनुपात में होती है.
• विद्यार्थी अच्छे परिणाम लाते हैं तो उन्हें प्रशंसा व पुरस्कार मिलते हैं. विद्यार्थी जब फेल होते हैं तो उन्हें उनके शिक्षक घटिया पढ़ाते हैं.
• स्कूल का सबसे शरारती बच्चा स्कूल के प्राचार्य का बेटा होता है.


• जिस दिन शिक्षक के स्कूल पहुँचने में देरी हो जाती है, उसकी मुलाकात गेट पर प्राचार्य से अवश्य होती है.
उपप्रमेय - जिस दिन विद्यार्थी देर से स्कूल पहुँचता है, उस दिन उपस्थिति पहले दर्ज कर ली जाती है.
• यदि शिक्षक स्कूल समय पर पहुँच जाता है और प्राचार्य से उसकी मुलाकात नहीं होती है तो फिर उसे संकाय समिति की मीटिंग में देर हो जाती है.
• किसी स्कूल में नए विद्यार्थी उन स्कूलों से आते हैं जहाँ पढ़ाई नहीं होती.
• अच्छे विद्यार्थी दूसरे स्कूलों में चले जाते हैं.
• अच्छे विद्यार्थी/अध्यापक दूसरे स्कूलों के होते हैं.


• जाँच परीक्षा के दिन पंद्रह प्रतिशत विद्यार्थी अति आवश्यक कारणों से अनुपस्थित होते हैं.
• यदि शिक्षक कला विषय पढ़ाता है तो प्राचार्य फ़िजिकल ट्रेनिंग संकाय का होता है और वह कला विषय से घोर नफरत करता है. और यदि शिक्षक फ़िजिकल ट्रेनिंग संकाय का होता है तो प्राचार्य भी उसी संकाय का होता है और उसके जमाने में वह अपने विद्यार्थियों को कई राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मैच जितवा चुका होता है.
• कोई परीक्षक जब कोई कॉपी जाँचना प्रारंभ करता है तो मरफ़ी के तमाम नियम प्रभावशील हो जाते है.
• पुस्तकालय के लिए वेइनर का नियम - यहाँ कोई समाधान नहीं मिलता है सिवाय क्रॉस रेफ़रेंस के!


• यदि आप किसी कक्षा में किसी विषय में प्रवेश पाना चाहते हैं तो अगर उसमें "क" विद्यार्थियों के लायक सीट होती है तो प्रवेश सूची में आपका क्रमांक "क+1" होता है.
• कक्षा के समय की रूपरेखा इस तरह बनाई जाती है कि उससे प्रत्येक विद्यार्थी का अधिकतम समय बरबाद होता है.
• उप-प्रमेय - दो कक्षा के समय की रूपरेखा अगर बढ़िया बन पड़ती है तो वे कक्षाएँ परिसर के विपरीत कोने में एक के बाद एक लगातार लगती हैं.
• वांछित कोर्स के लिए प्राथमिक आवश्यकता वाला कोर्स वांछित कोर्स के पूरा होने के बाद के सेमेस्टर में पढ़ाया जाता है.
• जब आप परीक्षा के ठीक पहले अपने नोट्स पर एक निगाह मारते हैं तो जो अंश सर्वाधिक महत्वपूर्ण होते हैं, उनकी लिखावटें समझ में नहीं आतीं.


• किसी परीक्षा के लिए आप जितना ज्यादा पढ़ते हैं, आपको उतना ही सन्देह होता है कि उत्तर कौन सा, किस तरह लिखना है.
• मुख्य (फाइनल) परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों में से अस्सी प्रतिशत उस पुस्तक से आते हैं जिन्हें आपने नहीं पढ़ा तथा जिनके लैक्चर आपसे छूट चुके होते हैं.
• अंग्रेज़ी के अर्धवार्षिक परीक्षा के एक दिन पहले शरीरविज्ञान का शिक्षक आपको पचास पृष्ठों का एक प्रोजेक्ट रातों रात कर लाने का गृहकार्य देता है.
• उप-प्रमेय- प्रत्येक शिक्षक यह सोचता है कि विद्यार्थी के पास उसके द्वारा दिए गए गृहकार्य को करने के अलावा अन्य कोई कार्य नहीं होता है.

.

.

• यदि आपको पुस्तक खोलकर परीक्षा देने को कहा जाता है तो आप पुस्तक लाना भूल जाते हैं.
• उप-प्रमेय - यदि आपको जांच परीक्षा कार्य घर से पूरा कर लाने को कहा जाता है तो आप यह भूल जाते हैं कि आप कहाँ रहते हैं.
• सेमेस्टर के अंत में आपको पता चलता है कि आपने किसी ऐसे कोर्स के लिए दाखिला लिया था जिसकी एक भी कक्षा में आपने हाजिरी नहीं दी या नहीं लगी या लगी तो शिक्षक छुट्टी पर रहे.
• मुख्य परीक्षा का प्रथम नियम : गणित के मुख्य परीक्षा के दौरान ही आपके साइंटिफ़िक कैल्कुलेटर की बैटरी खराब हो जाती है.
उप-प्रमेय - यदि आपके पास अतिरिक्त बैटरी होते हैं तो वे खराब निकलते हैं.


• अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षा में आपका सबसे प्यारा दोस्त दूसरे कमरे में परीक्षा देता है तथा आपकी बगल की कुर्सी पर वह विद्यार्थी बैठता है जिससे आपको सबसे ज्यादा चिढ़ होती है.
• सीगर का नियम - जो कुछ भी कोष्ठकों में दिया गया होता है उसे अनदेखा किया जा सकता है.
• नताली का कैल्कुलस का नियम : कोई भी पाठ, परीक्षा के बाद ही समझ में आता है.
• सेइत का उच्च शिक्षा का नियम : उपाधि प्राप्त करने के लिए जो परीक्षा आप पास करना चाहते हैं, वह आपको अगले सेमेस्टर से पहले नहीं मिलती.
• टर्म पेपर का नियम - आपके प्रोजेक्ट या टर्म पेपर के लिए अति आवश्यक पुस्तक / पत्रिका / जर्नल के पृष्ठ लाइब्रेरी से अवश्य गायब मिलते हैं.


• उप-प्रमेय - यदि उपलब्ध भी होते हैं, तो वे कटे-फटे या अपठनीय होते हैं.
• डुग्गन का शोघ का नियम : - अत्यंत महत्वपूर्ण उद्धरण का स्रोत पता नहीं पड़ता.
• विद्यार्थियों के लिए रोमिंगर का नियम- किसी पाठ्यक्रम का शीर्षक जितना ही साधारण सा होगा, आप उससे उतना ही साधारण सीख पाएंगे.
• किसी पाठ्यक्रम का शीर्षक जितना ज्यादा विशिष्ट होगा, उसमें दाखिला लेने के लिए योग्यता विद्यार्थियों में उतनी ही कम होती है.
• हैनसेन का लाइब्रेरी का नियम - आपके पड़ोस की लाइब्रेरी में काम लायक कोई भी किताब कभी भी नहीं मिलती.


• लंदन का लाइब्रेरी का नियम - इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपको कौन सी किताब चाहिए. वह हमेशा ही आलमारी के अ-पहुँचयोग्य सबसे निचले खंड में होता है.
• रोमिंगर का शिक्षकों के लिए नियम - किसी परीक्षा में बैठने के लिए यदि कक्षा में विद्यार्थियों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी जाती है तो अनुपस्थितों की संख्या में इजाफ़ा हो जाता है. यदि किसी परीक्षा में बैठने के लिए कक्षा में उपस्थिति वैकल्पिक होती है तो सारी कक्षा सारे समय मौजूद रहती है.
• गणित की कक्षा पर पेंजा का नियम - किसी पाठ के अति महत्वपूर्ण चरण पर दरवाजे पर कोई न कोई दस्तक दे देता है.

मरफ़ी के कुछ और नियम यहाँ पढ़ें

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