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December, 2006 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हिन्दी का ऑन लाइन पीडीएफ़ परिवर्तक

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हिन्दी भाषा के दस्तावेज़ों के लिए एक बढ़िया ऑनलाइन पीडीएफ़ परिवर्तक

जमजार - वैसे तो एक ऐसा ऑनलाइन दस्तावेज़ परिवर्तक है जिसके जरिए आप कई किस्म के दस्तावेज़ों को कई अन्य किस्म के दस्तावेज़ों में मुफ़्त में परिवर्तन कर सकते हैं, परंतु यह हिन्दी भाषा के वर्ड फ़ाइलों को बखूबी पीडीएफ़ फ़ॉर्मेट में बदलता है.

यह 100 मेबा तक की फ़ाइलों को परिवर्तित कर सकता है, तथा सारा कार्य वेब इंटरफ़ेस के जरिए होता है. आपको एक आसान इंटरफ़ेस के जरिए फ़ाइल अपलोड करना होता है तथा दिए गए ईमेल पते पर सूचना मिलने के उपरांत आपको दी गई कड़ी से फ़ाइल डाउनलोड करना होता है.

हां, हिन्दी भाषा की फ़ाइलों के नाम अंग्रेज़ी में ही हों, हिन्दी में फ़ाइल नाम यह स्वीकार नहीं करता है.

संबंधित आलेख : यूनिकोड हिन्दी वर्ड फ़ाइलों को पीडीएफ़ में कैसे परिवर्तित करें

मॅड्रिवा लिनक्स पर हिन्दी

मॅड्रिवा लिनक्स पर लिखे आलेख पर पाराशर जी ( parasharas at gmail.com ) की प्रतिक्रिया थी:रवि भाई,
मैंड्रीवा लाईनक्स के बारे में इतना शानदार आपने लिखा तो हमने भी पूरी ४
सीडी का डाऊनलोड कर लिया और उस (लाईनक्स) से ही यह मेल भेज रहा हूं।
ज्यादा तो नहीं करीब १००० मिनत लगे त इस लिए लिखा कि इनस्क्रिप्'पर यह
नहीं आ रहा नियंत्रक शिफ्त की सैंतिंग की तरह कोई विधि बताएं और
मैंड्रीवी शृंखला को एक ही लिंक पर डाल दें खास कर हिंदी में कार्य करना
लोकलहोस्त पीएचपीमाई एडमिन व खास तौर से इसके मोजिला फायरफॉक्स को अपडेत
२.०.१ या आगे अपडेत या इंस्éल करना फिलहाल मशक्कत कर रहे हैं ये भी पता
नहीं चला कि विंडो से जो फोंस लिये थे वे फायरफॉक्स में नहीं आ पाए विंडो
से एक फोंत पर्सनल कर मेल तो लिख ही दी है।

आपका अपना
पाराशर

जो वर्तनी आई हैं वह इंडिक एक्सśंशन की देन हैं माफ करियेगा बस शुरू है
आपके जवाब व हल की प्रतीक्षा.मॅड्रिवा की इस समस्या का विस्तृत समाधान इस आलेख में है:लिनक्स में फ़ॉन्ट कैसे संस्थापित करें
उबुन्टु (जीवंत, बूटयोग्य सीडी) के नए संस्करण में भी यही समस्या है, और इसका विस्तृत समाधान यहाँ पर है: उबुन्टु 6.0 …

मोबाइल मेनिया उर्फ मोबाइल मैनर्स

कौन बोल रिया है?भारत के गांव गांव में मोबाइल पहुँच रहा है. नुक्कड़ की चाय की दुकान पर काम करने वाला छोरा और मुहल्ले का धोबी और खेत में काम करने वाला निरक्षर मजदूर सबके हाथ में मोबाइल दिखने लगा है. मोबाइल पर अभिजात्य वर्ग का अधिकार नहीं रहा. मोबाइल पर काल करना खर्चीला भी नहीं रहा. आपके मोबाइल में काल टाइम नहीं है, कोई बात नहीं. सामने वाले को दो-तीन मिस काल दे मारिये, वह मजबूरन काल बैक कर आपसे पूछेगा - भइये, क्या बात है?मोबाइल पर कभी आप कोई महत्वपूर्ण बात कर रहे होते हैं तभी पता चलता है कि उसकी बैटरी खत्म हो गई, और आस-पास बैटरी चार्ज करने का कोई साधन नहीं होता. कभी किसी मित्र को स्थानीय मोबाइल का नंबर लगाते हैं तो पता चलता है कि वह नंबर तो आज दो हजार किलोमीटर दूर है - और आपको एसटीडी चार्ज लग गया और आपके मित्र को रोमिंग चार्ज (या इसके उलट भी हो सकता है). और आपकी मित्रता इस एसटीडी-रोमिंग चार्ज के चक्कर में खतरे में पड़ती दीखती है. कभी किसी मित्र को मोबाइल लगाते हैं तो उधर से मित्र के बजाए भाभी जी का स्वर सुनाई देता है - "हाँ, भाई साहब, आज ये मोबाइल मेरे पास है - बाजार में कुछ काम था …

इन चेतावनी संदेशों को अनदेखा न करें

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इंटरनेट के फ़िशिंग हमलों से कैसे बचें?पिछले हफ़्ते मुम्बई पुलिस ने कुछ नाइजीरियाई नागरिकों को इंटरनेट पर चार-सौ-बीसी और धोखाधड़ी करने के आरोप में पकड़ा. उन पर आरोप था कि उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक की एक नकली साइट तैयार कर बैंक व ग्राहकों को करोड़ों रुपयों का चूना लगाया. उन्होंने बैंक के ग्राहकों को नकली ईमेल भेजकर कहा था कि कुछ कारणों से वे अपने पास-वर्ड और उपयोक्ता नाम अपडेट करें. ईमेल में कड़ी उस नकली साइट की थी जो हूबहू आईसीआईसीआई बैंक की असली साइट जैसा दिखता था. ग्राहक झांसे में आकर अपनी गोपनीय जानकारियाँ वहाँ डाल देते थे. अपराधियों ने यह जानकारी हासिल कर असली बैंक खातों से करोड़ों रुपए निकाल लिए और इंटरनेट बैंकिंग के ग्राहकों व सेवा प्रदाताओं को करोड़ों रुपयों का चूना लगाया. इस तरह की धोखा-धड़ी, जिसमें नकली साइट बना कर उपभोक्ताओं को ठगा जाता है, फिशिंग कहलाता है.अपना शिकार फांसने के लिए अपराधी नकली साइटें इस तरह बनाते हैं कि वे पूरी असली लगें. एक सामान्य उपयोक्ता के लिए नकली और असली साइट में भेद करना मुश्किल होता है. इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर इंटरनेट ब्राउज़रों के नए संस्करणों…

आय से अधिक, अनुपातहीन संपत्ति भी कोई वस्तु होती है?

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तू कितना कमाता है रे ललुआ?**-**मुझे तो आज तक आय से अधिक संपत्ति का फंडा समझ में ही नहीं आया. मेरी मां मुझसे पूछा करती थी, जब पहले पहल नौकरी लगी थी - तू कितना कमाता है रे ललुआ. मां के लिए उसका बच्चा हमेशा ललुआ ही रहता है. मैं शर्माता था कि मेरी आय मेरे हिसाब से, मेरी औकात से कम है, और मैं उसमें कुछ भत्ते इत्यादि को भी जोड़कर बता देता था. शायद यह था आय से अधिक संपत्ति.
परंतु किसी के पास आय से अधिक संपत्ति कैसे जमा हो सकती है भला. जितनी जिसकी आय होती है, उतनी ही या उससे कम ही तो वह जमा कर पाएगा ना? सरल सा गणित है, मान लो कि आपकी आय एक्स है. अब उस एक्स आय में से आपने वाय खर्च कर दिया तो जो संपत्ति आपके पास जमा होगी तो वो तो एक्स ऋण वाय होगी ना? आप लाख कृपण हों, अपनी आय में से कुछ भी खर्च नहीं करते हैं, तब, मान लिया कि खर्च, यानी कि वाय, शून्य है. ऐसी स्थिति में भी जो संपत्ति आपके पास जमा होगी वह एक्स माइनस जीरो यानी की एक्स - आपकी पूरी आय ही तो होगी, उससे अधिक नहीं. इससे यह सीधे-सीधे सिद्ध होता है कि आय से अधिक संपत्ति तो हो ही नहीं सकती. अगर ऐसा होने लगा तो नया गणित पैदा हो जाएगा, गणित…

मरफ़ी के तकनॉलाज़ी नियम

मरफ़ी के तकनॉलाज़ी नियमबिजली से चलने वाले किसी भी उपकरण को यह कभी भी न पता चलने दें कि आप बहुत जल्दी में हैं.(मरफ़ी के कुछ अन्य, मज़ेदार नियम यहाँ पढ़ें)गलत निष्कर्ष पर पूरे विश्वास के साथ पहुँचने की व्यवस्थित विधि का नाम ही ‘तर्क' है.जब किसी सिस्टम को पूरी तरह से पारिभाषित कर लिया जाता है तभी कोई मूर्ख आलोचक उसमें कुछ ऐसा खोज निकालता है जिसके कारण वह सिस्टम या तो पूरा बेकार हो जाता है या इतना विस्तृत हो जाता है कि उसकी पहचान ही बदल जाती है.तकनॉलाज़ी पर उन प्रबंधकों का अधिकार है जो इसे समझते नहीं.यदि बिल्डिंग बनाने वाले, प्रोग्राम लिखने वाले प्रोग्रामरों की तरह कार्य करते होते तो विश्व के पहले बिल्डर का पहला ही काम संपूर्ण समाज को नेस्तनाबूद कर चुका होता.किसी संस्थान के फ्रंट ऑफ़िस की सजावट उसकी संपन्नता के व्युत्क्रमानुपाती होती है.किसी कम्प्यूटर के कार्य का विस्तार उसके बिजली के तार के विस्तार जितनी ही होती है.विशेषज्ञ वो होता है जो क्षुद्र से क्षुद्र चीजों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी रखता है. सही विशेषज्ञ वह होता है …

जीवन के हर हिस्से पर है अधिभार...

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भीड़ भड़क्का अधिभारदुनिया एक भीड़ में तबदील होती जा रही है. वैसे, भीड़ में रहने के यूँ तो बहुत मजे हैं, परंतु बहुत से तमाम खतरे भी हैं. अब एक नया खतरा सिर पर आ गया है. अगर आप भारत में हवाई यात्रा करते हैं तो आपको प्रति टिकट एक सौ पचास रुपए अतिरिक्त भुगतान करना होता है. यह एक सौ पचास रुपए अतिरिक्त किसलिए? यह एक सौ पचास रुपए कंजेशन सरचार्ज होता है यानी कि भीड़ भड़क्का अधिभार!अभी तो सिर्फ हवाई यात्रा में यह अधिभार लगाया गया है. भविष्य में इस तरह के अधिभार के अन्य क्षेत्रों में घुसपैठ के पूरे आसार हैं. लंदन के कुछ भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में वाहन ले जाने व पार्क करने के लिए शुल्क वसूला जाता रहा है. इसी तर्ज पर अब अपने यहाँ भी अतिरिक्त अधिभारित शुल्क लगा करेगा. जिस ट्रेन में आप यात्रा करना चाहते हैं, उसमें भीड़ और वेटिंग लिस्ट के अनुसार अधिभार लग सकता है. जो सीधी सपाट गड्ढे रहित सड़क आपके घर को जाती है, और इस कारण अगर उसमें भीड़-भाड़ रहती है तो आपको सरचार्ज देना पड़ सकता है. रोज रोज के अधिभार से बचने के लिए फिर हो सकता है कि आप घर ही नहीं जाएँ. वैसे, यह एक बढ़िया सा बहाना हो सकता है पत्नि…

प्रोग्रामिंग गीत...

कुछ प्रोग्रामिंग गीत मूल फंटूश से अनुवादित:

# लोकल वेरिएबल
मैं पल दो पल का शायर हूंपल दो पल मेरी कहानी हैपल दो पल मेरी हस्ती हैपल दो पल मेरी जवानी है...
# ग्लोबल वेरिएबल
मैं हर इक पल का शायर हूँहर इक पल मेरी कहानी हैहर इक पल मेरी हस्ती हैहर इक पल मेरी जवानी है...
# नल पाइंटरमेरा जीवनकोरा काग़ज़कोरा ही रह गया

# डैंगलिंग पाइंटर्समौत भी आती नहींजान भी जाती नहीं
# गोटूअजीब दास्तान है येकहाँ शुरू कहाँ खतमये मंजिलें हैं कौन सीना वो समझ सके न हम
# दो रीकर्सिव फंक्शन जो एक दूसरे को काल कर रहे हैंमुझे कुछ कहना हैमुझे भी कुछ कहना हैपहले तुम पहले तुम# डिबगरजब कोई बात बिगड़ जाएजब कोई मुश्किल पड़ जाएतुम देना साथ मेरे हम नवाज़
# सी++ से वीबीये हसीं वादियाँये खुला आसमांआ गए हम कहाँ# बग जिसे ढूंढा नहीं जा सकाऐ अजनबीतू भी कहींआवाज दे कहीं से
# अप्रत्याशित बग (विशेषकर ग्राहक को प्रेजेन्टेशन देते समय)ये क्या हुआकैसे हुआकब हुआक्यों हुआ
# फिर, तब ग्राहक -
जब हुआ तब हुआ ओ छोड़ो ये ना सोचो...
# लोड बैलेंसिंग
साथी हाथ बढ़ानाएक अकेला थक जाएगामिल कर बोझ उठाना
# मॉडम - कनेक्शन बिजी मिलने पर
सुनो कहो कहा सुनाकुछ हुआ क्…

हिन्दी कम्प्यूटिंग - दशा व दिशा...

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कम्प्यूटर पर हिन्दी - दशा व दिशा?हिन्दी कम्प्यूटिंग पर एक रपट मैंने व करुणाकर (संयोजक इंडलिनक्स) ने सालेक भर पहले तैयार किया था. पीडीएफ़ फ़ाइल फ़ॉर्मेट में यह रपट गूगल पृष्ठों के सहयोग से आपके अवलोकनार्थ प्रस्तुत है. हिन्दी कम्प्यूटिंग के कुछ अनदेखे अनजाने पहलुओं की ओर इंगित करती यह रपट जानकारी पूर्ण है. यह रपट, जाहिर है, अंग्रेज़ी में है अन्यथा वह इस चिट्ठे पर कब का अवतरित हो जाता. मूलत: इसे अंतर्राष्ट्रीय प्रेक्षकों को ध्यान में रखकर बनाया गया था. यदि कोई बंधु इसका हिन्दी में अनुवाद कर कहीं प्रकाशित करना या अन्य रूप में इस्तेमाल करना चाहें जैसे कि इसे अद्यतन करना, तो इसकी वर्ड फ़ाइल मैं उन्हें भेज सकता हूँ.हिन्दी कम्प्यूटिंग पर यह जानकारी परक रपट (पीडीएफ़ फ़ाइल से) यहाँ पढ़ें.**/** ..

विंडोज़ युक्त अपने पीसी पर लिनक्स कैसे संस्थापित करें?

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विंडोज़ मशीन पर लिनक्स भी संस्थापित कैसे करें?

उन्मुक्त के चिट्ठे पर जब लिनक्स की खूबी के बारे में चर्चा हुई और जब ईशिक्षक पर चिट्ठा तैयार करने का फ्लैश ट्यूटोरियल देखने को मिला तो विचार आया कि लिनक्स संस्थापित करने के लिए भी एक फ़्लैश ट्यूटोरियल क्यों न तैयार किया जाए?

ऐसा ही एक फ़्लैश ट्यूटोरियल यहाँ पर है जिसे आप अपने विंडोज़ पीसी के अतिरिक्त पार्टीशन पर मॅड्रिवा लिनक्स 2007 संस्थापित करने हेतु काम में ले सकते हैं. मॅड्रिवा लिनक्स छोटे कार्यालय, घरेलू तथा साइबर कैफ़े इत्यादि के लिए बहुत ही अच्छा है चूंकि इसमें मल्टीमीडिया तथा विंडोज पार्टीशन को देखने का समर्थन अंतर्निर्मित है, जबकि फेदोरा या रेडहैट में इसे अलग से संस्थापित करना होता है.

मॅड्रिवा लिनक्स की संस्थापक डीवीडी आप लिनक्स फ़ॉर यू पत्रिका के नवंबर 2006 अंक के साथ प्राप्त कर सकते हैं. यदि आपके शहर में यह अनुपलब्ध हो तो किट्स एंड स्पेयर्स से मंगा सकते हैं. और यदि आपके पास डाउनलोड की सुविधा है तो फिर क्या बात है - मॅड्रिवा सीडी या डीवीडी इमेज डाउनलोड करें आज ही और संस्थापित करें अपने कम्प्यूटर पर मॅड्रिवा लिनक्स 2007 - अत्यंत …

ईमेल के जरिए भेजें 1 गीगाबाइट तक की फ़ाइल!

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ईमेल के जरिए भेजें विशाल, 1 गी.बा. तक की फ़ाइलें!
यूँ तो बहुत सारे औजार व ईमेल / मैसेन्जर प्लगइन्स हैं जिनके जरिए आप (जैसे कि जीमेल के) डिफ़ॉल्ट 10 मेगा बाइट से अधिक आकार की फ़ाइल ईमेल के जरिए भेज सकते हैं, परंतु पांडो विशिष्ट है. यह मुफ़्त है, कार्यकुशल है और नए किस्म का है. यह वेब ईमेल/ ईमेल क्लाएंट तथा मैसेन्जर के प्लगइन के रूप में कार्य करता है तथा बढ़िया कार्य करता है. इसके जरिए आप एक ही बार में 1 गीगा बाइट की एक विशाल फ़ाइल या सैकड़ों फ़ाइलों को ईमेल के जरिए उन खातों को भेज सकते हैं, जो इतनी आकार की फ़ाइलों को स्वीकार करते हैं (जैसे कि जीमेल या आपकी कंपनी का असीमित आकार स्वीकारने वाला ईमेल खाता). पांडो को काम करते हुए कुछ स्क्रीनशॉट नीचे देखें. पांडो का कार्य बहुत सरल है, व स्वयं व्याख्या करने वाला है. आपको *.pando एक्सटेंशन को खोलने के लिए (पांडो आपके ईमेल संलग्नक को इसी नाम से भेजता है) आपके कंप्यूटर पर पांडो संस्थापित (पांडो सिर्फ 3.5 मेबा का डाउनलोड है) होना आवश्यक है अतः आप जिस ईमेल प्राप्त कर्ता को पांडो के जरिए बड़ी फ़ाइल भेज रहे हैं, उसके पास भी पांडो संस्थापित होना …

जब बहे बयार उलटी...

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चलिए, बयार उलटी बहने तो लगी...यूँ तो इस तरह की एकाध घटना पहले भी घट चुकी है, परंतु आज यकायक दो संयोग एक साथ हुए.सुबह-सुबह एक पत्रकार मित्र ने फोन कर बधाई दी कि दिल्ली से निकलने वाले हिन्दी अखबार वीर अर्जुन पर छपा मेरा आलेख उन्हें अच्छा लगा. वीर अर्जुन यहाँ वितरित नहीं होता है, परंतु उन्हें नमून प्रतियां डाक से मिलती हैं. 22 नवम्बर 2006 का अख़बार आज उन्हें मिला था. अख़बार के अंतिम पृष्ठ पर मेरा आलेख छपा था.मैंने उन्हें बताया कि मैंने वीर अर्जुन को कोई आलेख वालेख नहीं भेजा था और हो सकता है कि आलेख किसी ‘दूसरे' रवि का होगा. तब उन्होंने बताया कि यह आलेख माइक्रोसॉफ़्ट के बहुभाषी कुंजीपट के बारे में है.अरे! यह आलेख तो मैंने प्रभासाक्षी के लिए लिखा था व उसे अपने चिट्ठे पर प्रकाशित किया था. हो सकता है कि वीर अर्जुन ने उनमें से किसी एक से लिया हो. बहुत संभावना है कि प्रभासाक्षी से लिया हो, चूंकि अपने यूनिकोडित चिट्ठे को वीर अर्जुन का कोई वीर पढ़ता हो, यह तो मुझे नहीं लगता.दूसरी घटना यह हुई कि मेरे याहू खाते पर नवराही जी का पत्र आया जिसमें उन्होंने नेट पर प्रकाशित रेखा के चित्रों को पंचनाद…

भारत की मुकम्मल तस्वीर...

.मानव विकास सूचकांक: मृतप्राय भारतीय राजनीति की मुकम्मल तस्वीर...द संडे इंडियन के 20 - 26 नवंबर के अंक में अरिंदम चौधरी का संपादकीय पठनीय है. अपने संपादकीय में अरिंदम ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा वर्ष 2006 के लिए जारी मानव विकास सूचकांक में भारत की अत्यंत दयनीय स्थिति का वर्णन किया है. भारत की उन्हीं स्थितियों-परिस्थितियों के बारे में इस चिट्ठे पर तो नियमित, व्यंग्यात्मक चर्चा होती ही रहती है जिसके बारे में अरिंदम ने मानव विकास सूचकांक का हवाला देते हुए किया है.प्रस्तुत है उस संपादकीय के कुछ महत्वपूर्ण अंश:"...यह रिपोर्ट मूलतः औसत आयु, वयस्क साक्षरता दर, प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा में पढ़ने वालों की संख्या और सकल घरेलू उत्पाद के संदर्भ में जीवन स्तर को दर्शाती है और संयुक्त राष्ट्र के ज्यादातर सदस्य देशों के बारे में उपलब्ध आँकड़ों पर आधारित होती है. किसी भी फिक्रमंद भारतीय के लिए इस रिपोर्ट पर एक निगाह डालना बहुत पीड़ादायक होगा, क्योंकि एक सरसरी निगाह में भी विश्व में भारत की दर्दनाक स्थिति साफ नजर आती है....""...इस वास्तविकता का आभास हो…

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