बुधवार, 16 अगस्त 2006

ये रहे आपके रिटर्न गिफ़्ट...

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सधन्यवाद, ये रहे आपके रिटर्न गिफ़्ट-

भाई इन्द्र अवस्थी ने अपनी बधाइयाँ देते हुए मुझसे गुज़ारिश की थी कि मेरे जन्म दिन पर मुझे क्या उपहार मिले उसे कविता या ग़ज़ल के माध्यम से बताया जाए.

सबसे बड़ा उपहार तो निःसंदेह, हिन्दी चिट्ठाजगत् के महाचिट्ठाकार द्वारा एक नहीं, बल्कि दो-दो चिट्ठा पोस्टों के माध्यम से मुझे मिले, वह भी 22 टिप्पणियों सहित. इस उपहार के सामने तो निःसंदेह बाकी सारे उपहार फ़ीके ही रहेंगे.

रिटर्न ग़िफ़्ट के माध्यम से जीतू भाई ने मेरी व्यंज़ल मशीन उधारी मांगी है. तो उन्हें यह बता दूं कि व्यंज़ल की यह मशीन हिन्दी चिट्ठा जगत् में उनकी सक्रियता की ऊर्जा की बदौलत चलती है.

बहरहाल, आप सभी का, जिन्होंने अपनी टिप्पणियों के माध्यम से तथा दूसरे माध्यमों से मुझे बधाइयाँ दीं, आभार प्रकट करता हूँ तथा धन्यवाद देता हूँ.

मेरे साक्षात्कार में अनूप जी ने पूछा था कि मेरे चिट्ठे पर टिप्पणियाँ नहीं मिलने पर मुझे कैसा लगता है. इस दफ़ा फ़ुरसतिया के पन्नों पर जन्मदिन की बधाइयों के संदेश के रूप में कुल जमा 22 टिप्पणियाँ मिलीं तो ऐसा लगा कि न सिर्फ अब तक का हिसाब चुकता हो गया, बल्कि आने वाले समय का एडवांस भी फ़्री हो गया. यानी अब आने वाले समय में एक भी टिप्पणी न मिले, तो भी कोई वांदा नहीं प्यारयो!

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आप सभी 22 टिप्पणीकारों को, सधन्यवाद, समर्पित है निम्न व्यंज़ल : (रिटर्न ग़िफ़्ट मान लिया जाए!)

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ईस्वामी ने दी प्रतिबद्धता की मिसाल
ई-छाया ने खड़े किए कई कई सवाल

रमण कौल के शब्दों ने दिए संबल
शुभकामनाएँ बांटते रहे समीर लाल

अनुनाद तो स्वयं है प्रेरणा के स्रोत
हिन्दीब्लॉगर के आशीष से हैं निहाल

प्रतीक पाण्डे ने दी है सूर्य की उपमा
नितिन की कामनाएं भी हैं कमाल

सृजन शिल्पी के शब्दों ने दी दिशा
अतुल के बोलों ने जलाया मशाल

अनूप भार्गव को अच्छे लगे जवाब
व्यंज़ल हेतु जीतू ने मचाया बवाल

प्रमेन्द्र ने दिखाया दूसरा एक पहलू
प्रेमलता ने सौंपे कामनाओं के ढाल

कुछ कामनाएँ टिकाईँ अमित ने भी
तो सागर ने बुना बधाइयों का जाल

देर से मिली थीं सुनील की बधाइयाँ
तो इन्द्र पूछ रहे थे उपहारों के हाल

शुभकामनाओं सहित प्रकटीं प्रत्यक्षा
शशि सिंह ने कहा जिओ हजारों साल

अनूप के चिट्ठों ने मचाई है धूम तो
रवि को टिप्पणियों का क्या मलाल

**-**

6 blogger-facebook:

  1. आज अभी देखा इसे। साक्षात्कार तथा पोस्ट लिखकर मैंने कोई बड़ा काम नहीं किया। वस्तुत: मुझे लगता है कि साक्षात्कार समय-समय पर होते रहने चाहिये। यह एक तरह की आपसी बातचीत है। यह पोस्ट बढ़िया लगी।

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  2. रवि भाई,

    आप बड़े भाई है, हम आपसे लाड नही करेंगे तो किस से करेंगे?

    आपकी रिटर्न गिफ़्ट पसन्द आयी।लेकिन वो व्यंजल वाली मशीन........

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़ियां रही यही रिटर्न गिफ़्ट का नया तरीका इज़ाद करती पोस्ट.
    बधाई.
    -समीर लाल

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  4. मौके पर बधाई देने से तो चूक गया पर ऐसे कामों में देर का क्या लिहाज.

    तुम सलामत रहो हज़ार बरस
    रोशनी यूँ ही बिखेरे जाओ
    अपनी ऊर्जा को शब्द पहनाओ
    और चिट्ठे पे उकेरे जाओ

    -विनय

    उत्तर देंहटाएं
  5. रवि जी,
    टिप्पणिया रहा हूं ताकि सनद रहे और वक्त पर काम आवे।
    अरे बडे भाई साहब, आपको अपना बडा समझ कर ही सवाल खडे किये थे, अब रचनाकार का नियमित पाठक हूं। आपकी बदौलत ही तो बहुत कुछ पढने को मिलता है। बाकी रही बात विज्ञापनों की, तो हमें मतलब है असली माल से, कलेवर आनी जानी चीज है, अब यही सोच कर पढ लेता हूं। मलाई मलाई छांट कर खाता हूं।

    उत्तर देंहटाएं
  6. पढते रहते हैं आपको हमेशा ।

    उत्तर देंहटाएं

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