टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

ब्लॉगर की जगह खत्म ?

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प्रिये, मैंने गूगल की सारी जगह इस्तेमाल कर डाली!

क्या कहा? नहीं मानते. चलो कोई बात नहीं. मैंने भी कौन सा सच कहा है. परंतु गूगल का ब्लॉगर जब अपने विशाल डाटाबेस को संभाल नहीं पाता है तो यदा कदा इसी किस्म के विचित्र त्रुटि संदेश दिखाता रहता है.

उदाहरण के लिए, यह त्रुटि संदेश मेरे एक ब्लॉग के प्रकाशन के दौरान कल प्रकट हुआ, परंतु ब्लॉगर को धन्यवाद कि आज सुबह सब कुछ फिर से सामान्य हो चला.

001 java.io.IOException: No space left ...


क्या आश्चर्य कि बहुत से लोग ब्लॉगर से वर्डप्रेस की ओर दौड़ लगा रहे हैं, और कई लाइन में लगे हैं.

और मैं?

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नहीं. कभी नहीं. ब्लॉगर तो रेस का वह काला घोड़ा है जिस पर आप दांव लगा सकते हैं. लंबे रेस में, मेरी बात का यकीन कीजिए, इसमें तमाम तरह के प्रॉडक्टिविटी औज़ार और जुड़ेंगे जिससे यह सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म बना रहेगा.

**-**

इस बीच अगस्त 2006 के प्रथम सप्ताह में रचनाकार के प्रकाशन का गौरवशाली एक वर्ष पूरा हो गया. इस एक वर्ष में रचनाकार में विभिन्न विधाओं में कुल जमा निम्न रचनाएँ प्रकाशित हुईँ-

संस्मरण - 10
व्यंग्य - 25
लघुकथा - 19
चुटकुले - 23
गजल - 24
कहानी - 42
कविता - 49
आलेख - 20
बालकथा - 4
समीक्षा - 2

यानी कुल जमा 200 से अधिक पोस्ट रचनाकार में किए गए, जिनमें से अधिकांश ऐसे लेखकों की रचनाएँ हैं, जिनके पास अपना स्वयं का जरिया रचनाओं को इंटरनेट पर देखने का भी नहीं है - लिखना तो दूर की बात है. कई अच्छी व घरोहर रचनाओं को अनुमति सहित या साभार पुनर्प्रकाशित भी किया गया है.

आने वाले दिनों में रचनाकार में विस्तार की और कोशिशें की जाएंगी. रचनाकार में क्या हिन्दी का प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग बन सकने की काबिलियतें दिखती हैं? या हिन्दी का प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग बनने में क्या कुछ और साल लग जाएंगे?

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विषय:

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मेरी भी ब्लागर के विषय मे यही मान्यता है, आगे आगे देखिये होता है क्या.
'रचनाकार'के गौरवशाली एक वर्ष पूर्ण होने की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनायें.
समीर लाल

ब्लौगर गूगल का है यदि गूगल नम्बर एक है तो ब्लौगर भी रहेगा|

फिकर नॉट. ब्लॉगस्पॉट ठीक ठाक है. कहीं जाने की ज़रूरत नहीं. अपन यहीं डेरा-डंडा गाड़कर बैठेंगे.

बहरहाल, स्वाधीनता दिवस पर बड़े भैया को मेरा जयहिंद.

भाई साहब - अगर बुरा ना मानो तो एक गल कहों - हम भी आप ही की तरह ब्लॉगर के गुण गाते नही थकते और आज भी ब्लॉगर की तारीफ करते मगर किया है कि अगर एक छोटी सी जगाह पर सौ देढ सौ भैंस बांधो तो किया हाल होता है उस जगाह का? इसी लिए मजबोरी मे हम ब्लॉगर का घर छोड वर्ड प्रेस चले आए :)

आपको 59 वां आज़ादी वर्ष और साथ मे छुट्टी की बधाई

bhai directory main hi jagah samapt hui hai, googleplex main hazaro ekad virtual space kayam hai.

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