रविवार, 6 मार्च 2005

हिंग्लिश?

अँग्रेज़ी में हिन्दी कि हिन्दी में अँग्रेज़ी?
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शनिवार को टाइम्स ऑफ इन्डिया तथा इंडियन एक्सप्रेस के संपादकीय पृष्ठों पर दो विरोधाभासी चीज़ें एक साथ दिखाई दिए. परंतु ये कोई राजनीतिक नज़रिया या टीका टिप्पणी नहीं थे.

भले ही भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा राष्ट्र हो जिसकी जनता अँग्रेज़ी भाषा बोलती है, परंतु इस अँग्रेज़ी में हिन्दी भी घुलती मिलती दिखाई देने लगी है. हिन्दी में अँग्रेज़ी तो खैर, एक इमल्शन की तरह घुल मिल गई है, और प्राय: आम बोलचाल तथा अब तो गंभीर लेखन में भी, अँग्रेजी के शब्दों का बख़ूबी इस्तेमाल हो रहा है. मैंने अपनी ग़ज़लों में कई मर्तबा अँग्रेज़ी के शब्दों का बख़ूबी प्रयोग किया है.

ट्रू ह्मूमन ग्लोबलाइज़ेशन - विश्वमानववाद का इससे सटीक उदाहरण और क्या हो सकता है भला.

1 टिप्पणियाँ./ अपनी प्रतिक्रिया लिखें:

  1. विश्व मानवतावाद सिर्फ़ एक भाषा से नहीं बल्कि सैकड़ों भाषाओं से सम्भव है…

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