टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

कैसे, किसलिए विचार?

सुदर्शनी विचार?
*-*-*

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सरकार द्वारा पिछली दफा जारी भारत के जनसंख्या आंकड़ों पर हर कोई अपनी अपने अपने चश्मे से दृष्टि डाल रहा है, और जनसंख्या विस्फोट की असली समस्या पर कोई दृष्टि डालने को तैयार ही नहीं है. आग में घी डाल रहे हैं रा स्व संघ प्रमुख सुदर्शन जो यह कहते हैं कि प्रत्येक हिन्दू को कम से कम चार बच्चे पैदा करने चाहिए. उनकी धर्म सम्बन्धी गणनाओं के अनुसार हिन्दुओं के भारत में अल्पसंख्यक हो जाने का खतरा है, चूंकि मुसलमान ज्यादा बच्चे पैदा कर रहे हैं. (जबकि वैज्ञानिक गणनाओं के अनुसार, वर्तमान दर पर ऐसा होने में हजारों साल लगेंगे)

अगर हिन्दू के अल्पसंख्यक होने का खतरा है तो फिर चार क्या हमें तो चौबीस बच्चे पैदा करने चाहिए. हमें जीवन भर बच्चे ही पैदा करते रहने चाहिए. हर साल एक. फिर देखो हम तो दुनिया में दो चार साल में ही बहु संख्यक हो जाएंगे. भारत में तो हैं ही, पूरी दुनिया में बहुसंख्यक हो जाएँगे. मुसलमान ही क्या, वर्तमान वैश्विक ईसाई समुदाय को भी हम अल्प संख्यक बना देंगे. पूरा विश्व हिन्दू मय हो जाएगा. कितना मजा आएगा तब. भले ही हम कीड़े मकोड़े की तरह जीवन जी रहे हों, बच्चे पैदा करते ही जाएँगे. वाह क्या हिटलरी विचार-धारा है. सलाम! लाल सलाम!!

*-*-*
व्यंज़ल
-+-+-
उनने कमज़ोर कर ली हैं अपनी नज़र
कहते हैं न रखेंगे दूसरों की कोई खबर

उनने चल दी हैं अपनी शातिराना चालें
देखें कि क़ौम पर क्या होता है असर

उनने ऐलान किया है समाजवाद का
हम तो बेताब हैं किस घड़ी किस पहर

मंजिलें तो तय कर लीं बहुत दूर की
रास्ते किस ओर को जाएंगे जरा ठहर

लोग इतने नादान नहीं हो सकते रवि
नतीज़े से पहले रख ले जरा सी सबर

-+-+-
विषय:

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विषस्य विषमौषधम् ( विष की दवा विष होती है ) इस न्याय के आढार पर सुदर्शन जी की बात भी ठीक लगती है |

अनुनाद

दरअसल, बात जनसंख्या वृद्धि की असली समस्या को देखने की हो रही है, न कि धर्म
आधारित व्यक्तियों-संख्याओं की. भारत के दो सुपर-स्टार मुस्लिम - शाहरूख अपनी
हिन्दू पत्नी गौरी और हिन्दू - हृतिक अपनी मुस्लिम पत्नी सुजैन के साथ हार्मनी
में रह सकते हैं, और साथ रहकर इंडियन आइकन बने रह सकते हैं तो फिर भारत की
हिन्दू-मुस्लिम जनता क्यों नहीं? हार्मनी पूरे समाज के लिए चाहिए किसी धर्म
विशेष के लिए नहीं. मूल समस्या अनाप शनाप जनसंख्या वृद्धि की है, जो भारत के
हर धर्म, हर व्यक्ति, हर समाज के लिए घातक है, और मायोपिक चश्मे पहने हुए
राजनेता अपने तुच्छ फ़ायदों के लिए इस ओर देखना ही नहीं चाहते. वे चाहते हैं कि
हिन्दू-मुस्लिम लड़ते भिड़ते ही रहें. ऊपर से ये लोग चाहते हैं कि इनके अनुयायी
भी इन्हीं चश्मों से देखें.

आपकी बात का सार यहा है कि जनसंख्या की समस्या से निपटने के लिये एक प्रभावी " समान नागरिक जनसंख्या नियंत्रण संहिता " लागू की जानी चाहिये | पर इससे सुदर्शन के विरोधी सममत होंगे ?

अनुनाद

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