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इंजीनियर्स कैसे करते हैं...

हाल ही में मैंने क्लिफ़र्ड साहनी की लिखी किताब “वर्ल्ड’स बेस्ट प्रोफ़ेशनल जोक्स” पढ़ी. अमूनन चुटकुलों की किताबों में या कहीं और जगह (रीडर्स डाइजेस्ट को छोड़कर) मौलिक चुटकुले कम ही मिल पाते हैं. घूम फिर कर वही पुराने, घिसे-पिटे चुटकुले दोहराए जाते हैं. परंतु पुस्तक महल, दिल्ली से प्रकाशित महज़ साठ रूपयों की इस किताब में बहुत से लतीफ़े मुझे नए-नए से लगे. इन्हीं में एक पुराना लतीफ़ा (पृष्ठ 75, संस्करण 2004) फिर पढ़ने में आया. पर है यह बहुत मज़ेदार. आप भी पढ़िए:
• इंजीनियर्स प्रिज़ीशियन से करते हैं
• इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स इंपल्स में करते हैं
• इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स जब करते हैं, शॉक्ड हो जाते हैं
• इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स लार्ज कैपेसिटी में करते हैं
• इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स अधिक फ्रिक्वेंसी और कम रेज़िस्टेंस में करते हैं
• इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स हाई फ्रिक्वेंसी और ज्यादा पॉवर में करते हैं
• मेकेनिकल इंजीनियर्स स्ट्रेस और स्ट्रेन में करते हैं
• मेकेनिकल इंजीनियर्स लेस इनर्जी तथा ग्रेटर एफिशिएंसी में करते हैं
• केमिकल इंजीनियर्स फ्लूइड स्टेट में करते हैं
• पेट्रोलियम इंजीनियर्स लुब्रिकेशन के साथ करते हैं
• एरोनॉटिकल इंजीनियर्स थॉरोली तथा लाट ऑफ सिमुलेशन के साथ करते हैं
• ड्रिलिंग इंजीनियर्स स्मूथ पेनीट्रेशन के साथ करते हैं
• सॉफ़्टवेयर इंजीनियर्स टेस्टिंग एवं फ़िक्सिंग के साथ करते हैं और हर बार फेल या क्रैश होने पर नए वर्जन्स के साथ करते हैं
• सिविल इंजीनियर्स स्पेशल, आर्किटेक्चरल वे में करते हैं और आर्किटेक्चरल इंजीनियर्स मोर सिविलाइज्ड वे में करते हैं

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धन्यवाद.
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