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सखि, बिजली आई...

बेमौसम बहार
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आज सुबह-सुबह जब नियमित-अनियमित बिजली कटौती नहीं हुई तो सुखद आश्चर्य हुआ. परंतु फिर ध्यान आया कि भई, यह व्यवस्था तो सिर्फ आज के लिए है चूंकि शहर में आज मुख्यमंत्री, पूर्वप्रधानमंत्री-लोकसभा-नेताप्रतिपक्ष पधार रहे हैं. इनके स्वागत के लिए शहर में पिछले सप्ताह भर से तैयारियाँ चल रही थीं. अविरल बिजली प्रवाह के अलावा इन नेताओं के क्षणिक प्रवास से शहर को और भी बहुत सी सौगातें मिलीं. मुलाहिजा फ़रमाएँ:

• जिन क्षेत्रों-सड़कों से इन नेताओं को गुजरना है, उन की साफ़ सफाई की गई, सड़कों के गड्ढे भरे गए, स्पीड ब्रेकर्स हटाए गए तथा नए सिरे से डामरीकरण किया गया. कुछ सड़कों को चौड़ा भी किया गया. उन सड़कों के आसपास के अतिक्रमण हटाए गए तथा सड़कों पर रेहड़ी लगाने वाले, वाहन पार्क करने वालों को भगा दिया गया. पहली मर्तबा लगा कि शहर में सड़क नाम की कुछ चीज़ें हैं.
• शहर के पेयजल प्रदाय के लिए नगर निगम ने करोड़ों की लागत से एक ओवरहेड टंकी बनाई थी. परंतु उद्घाटन के अभाव में वह पिछले पाँच वर्षों से अनुपयोगी पडा हुआ था, तथा उसमें दरारें पड़ गई थीं, उसमें टूटफूट हो गई थी. मुख्यमंत्री के हाथों आज उसका उद्घाटन होना है, अत: आनन फानन उसमें सुधार कर उद्घाटन लायक बनाया गया है. देखते हैं कि पानी दे भी पाता है या नहीं.
• शहर में नगर निगम ने करोड़ों खर्च कर सिविक सेंटर नामक बहुउद्देशीय आवासी-व्यवसायिक परिसर का निर्माण पिछले पाँच वर्ष पूर्व कर लिया था. परंतु शासकीय विभागों की आपसी खींचातानी के कारण उस का किसी प्रकार का उपयोग नहीं हो पा रहा है. तैयार शुदा नए-नए बिल्डिंगों के दरवाजे-खिड़कियाँ टूट रहे हैं... खबर है कि मुख्यमंत्री इस बाबत कोई घोषणा करेंगे.
• चूंकि प्राय: सारा पुलिस महकमा मंत्रियों की व्यवस्था में लगा था, अत: राहगीरों-वाहन चालकों को जगह-जगह पुलिस-चेकिंग-वसूली से दो-एक दिन की मुक्ति मिली.
• ट्रैफ़िक लाइटें सुधर गईं, प्रशासन चुस्त दुरूस्त हो गया, गलियों में झाड़ू भी बढ़िया लग गए.
• इन नेताओं के आने से धूप में लाली ज्यादा प्रतीत हो रही है, चिड़ियाँ ज्यादा चहचहाती प्रतीत हो रही हैं और माहौल भी जरा खुशनुमा सा लग रहा है. आप आए शहर में बहार आई... (मुझे ऐसा लग रहा है, औरों को नहीं तो इसमें मेरा क्या कसूर?)
मैं उम्मीद करुंगा कि मेरे शहर में हर हफ़्ते दो हफ़्ते में कोई न कोई ऐसा बड़ा नेता आए. पर, सिर्फ उम्मीदों से काम नहीं चलेगा. तो चलिए इसके लिए, पूजा-पाठ, यज्ञ-हवन, प्रार्थना-इबादत इत्यादि करते हैं. आपसे अनुरोध है कि आप भी मेरी प्रार्थना में शामिल हों. मेरा आपसे वादा है कि आपके शहर के लिए भी मैं प्रार्थना करुंगा.
*-*-*
व्यंज़ल (हास्य ग़ज़ल, हज़ल के तर्ज पर)
*-*-*
आती हैं अब बेमौसम बहारें
कुछ की रखेल हो गई बहारें

अब तक पड़ा नहीं साबिका
कैसे जानेंगे जो आएंगी बहारें

सियासतों से लुट गई क़ौमें
बनानी होगी अब अपनी बहारें

जीने के जद्दोजहद में यारों
कैसा बसंत और कैसी बहारें

इस क़द्र नावाक़िफ़ रहा रवि
आकर गुजर चुकी कई बहारें

*+*+*

टिप्पणियाँ

  1. Jhak:

    Aaap aaye bahar laye,
    Bijli , Paani, Sadak mere sarkar laye,

    jhilye chauk per thodi der ke liye,
    Gali ke suar kutton se nijat laye.

    Maaja to taab aaye mere sarkar,
    Mahual hum aisa barkaarar paaye.

    उत्तर देंहटाएं

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