बुधवार, 2 फ़रवरी 2005

अश्लील प्रश्न...

रे मूर्ख, अश्लील कौन?

एक तरफ तो एक सरकारी एजेंसी बीएसएनएल पूरे भारत में इंटरनेट के लिए बहुत ही सस्ती दरों पर ब्राडबैंड ला रही है, वहीं दूसरी तरफ एक दूसरी सरकारी एजेंसी बहुत ही बेवकूफाना तरीके से ऐसे क़ानून ला रही है, जिससे आम आदमी इंटरनेट का उपयोग करने से भी डरेगा. और ऐसा हुआ भी है. उत्तर-प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से साइबर कैफ़े में छापा मारकर उपयोक्ता – मालिक दोनों को ही गिरफ़्तार किया गया कि वे अश्लील साइट देख-दिखा रहे थे. अवनीश बजाज का उदाहरण ताज़ातरीन है ही.

परंतु जिन्होंने ये क़ानून बनाया है उन्हें इंटरनेट तकनॉलाज़ी, स्पॉम, ब्राउज़र हाइजेकर्स, वॉर्म/वायरस, पॉप-अप विंडोज़ तथा मिलते-जुलते नाम वाले स्पूफ़्ड पॉर्न साइटों के बारे में जानकारी है भी या नहीं? मुझे नहीं लगता. मेरे ई-मेल पर प्रतिदिन दर्जनों-सैकड़ों की संख्या में स्पॉम आते हैं जिनमें अधिकतर वायग्रा या पॉर्न साइटों के होते हैं. और ऐसा तो प्राय: हर ईमेल उपयोक्ता के साथ होता है. बेचारे गरीब बिल गेट्स को प्रतिदिन दस लाख ईमेल प्राप्त होते हैं. आप क्या सोचते हैं उनमें क्या होता होगा? उनमें अधिकतर ऐसे ही ईमेल होते हैं. अगर बे-ध्यानी में इनमें से किसी पर क्लिक हो गया तो ये साइटें खुल ही जाती हैं. इसी प्रकार वेब पता टाइप करते समय ब्लॉगस्पॉट की जगह गलती से आपने ब्लॉगपोस्ट टाइप किया तो यह सीधे पॉर्न साइट को खोलता है, क्योंकि चालाक भाई लोगों ने अपनी पॉर्न साइटों के रजिस्ट्रेशन ऐसे ही मिलते जुलते नामों से भी करवा रखे हैं. फिर वॉर्म/वायरस और पॉपअप विंडो का क्या करें जो पता नहीं कहाँ-कहाँ से नमूदार हो जाते हैं. इंटरनेट पर तमाम तरह से सर्च करना होता है, और इस बीच ये साइटें कहीं न कहीं से टपक ही पड़ती हैं.

अब तो आपको कोई भी पुलिसिया आपको आपके कम्प्यूटर का उपयोग इन कामों के लिए करता रंगे हाथों पकड़ ही लेगा. वह कहेगा कि भाई, आपने अपने ईमेल में इतने पॉर्न साइटों के आमंत्रण और वायग्रा के इतनी सारी दुकानों के अते-पते मंगा रखे हैं इसका अर्थ है कि आप अश्लील हैं, चलिए जेल की हवा खाइए.

हे! ईश्वर. तू भी मूर्खों से बहुत डरता होगा. है ना?
*-*-*
व्यंज़ल (हास्य ग़ज़ल, हज़ल की तर्ज पर)
*-*-*
किस बिना पर रहना होगा
मूर्खों की तरह रहना होगा

मूर्खों के राज में कैसे यारों
दानिशमंदों का रहना होगा

मूर्खों की जमात का फौजी
कहता है यहीं रहना होगा

बन जा खुद या दूसरों को
मूर्ख बना कर रहना होगा

मूर्खों के दौर में सोचे रवि
किस तरह कैसे रहना होगा

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