मंगलवार, 14 दिसंबर 2004

इंडिया क्रम्बलिंग ?

इंडियन एक्सप्रेस में पिछले कुछ दिनों से समाचार सीरीज छप रहा है कि किस प्रकार कर्नाटक की नई सरकार सत्ता में आते ही बैंगलोर के लिए लिए गए पिछली सरकार के निर्णयों, कार्यों और खासकर विकास कार्यों को जानबूझ कर रोक रही है. जिसके कारण बैंगलोर बर्बाद होता जा रहा है. यह सब क्षेत्रीय राजनीति के तहत हो रहा है. प्रदेश तथा देश के विकास कार्यों से राजनीतिज्ञों को कोई लेना देना नहीं है.
यह स्थिति कमोबेश भारत भर में है. दरअसल राजनीतिज्ञों को अपनी और अपनी पार्टी के अलावा अन्य किसी के विकास में कोई दिलचस्पी नहीं है. जो भी कार्य किए जाते हैं वह सत्तारूढ़ पार्टी की भलाई के लिहाज से किए जाते हैं. किसी पार्टी की सरकार अगर कोई काम करती है, तो विरोधी पार्टी को उसमें भ्रष्टाचार नज़र आता है. सरकार बदलते ही उसमें मीन मेख निकाल कर उन कार्यों की धज्जियाँ उड़ाई जाती हैं. नतीजतन भारत देश जहाँ साधनों संसाधनों की कोई कमी नहीं है, जहाँ का तहाँ खड़ा है.
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ग़ज़ल
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ईमान का रास्ता और था
मैं चला वो रास्ता और था

चला तो था दम भर मगर
मंजिल का रास्ता और था

तेरी वफा की है बात नहीं
हमारा ही रास्ता और था

कथा है सफल सफर की
क्या तेरा रास्ता और था

सब दुश्मन हो गए रवि के
वो दिखाता रास्ता और था

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