सोमवार, 6 दिसंबर 2004

कतरनें

कतरी हुई कतरनें
इस ब्लॉग में उपयोग की गई कतरनें प्रायः लोगों को रुचिकर प्रतीत होती हैं. हालाँकि इन कतरनों का प्रयोग संदर्भ वश किया जाता है, परंतु कभी-कभी कतरनों के मूल अवयव ज्यादा ही रोचक होते हैं. कुछ पाठकों ने कतरनों को अधिक स्पष्ट बड़े और पढ़े जा सकने लायक आकार में शामिल करने की मांग की है. बड़े आकारों के चित्रों को लिंक के रूप में देने की कोशिश रहेगी ताकि वेब पृष्ठ अनावश्यक रूप से भारी न हो जाए.

मैंने फ्लिकर, हैलो, पिकासा इत्यादि का उपयोग किया है तथा ये साइटें पता नहीं क्यों चित्रों को फिर से कॉम्प्रेस कर देती हैं जिससे कि वे स्पष्ट नहीं रह पाते. जो जोकर जैसा मेरा चित्र बाजू में दिख रहा है, वह फ्लिकर का किया धरा है. लोगों का कहना है कि मैं इस चित्र में जैसा दिखता हूँ उससे कहीं ज्यादा बेहतर दिखता हूँ :)

बड़े आकारों के सुस्पष्ट चित्रों को मुफ़्त होस्ट करने वाली अन्य उचित साइटों के बारे में अगर आपको पता हो तो कृपया मुझे खबर करें.

2 blogger-facebook:

  1. जनाब एक डोमेन ही क्यों न ले लें? .name, .info, .ws तो काफ़ी सस्ते हैं, और .com, .org, .net भी कोई ज्यादा महँगे नहीं। फिर बेधड़क कतरनें क्या, वीडियो तक छापिए।

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  2. हाँ, मेरे दिमाग में आइडिया घूम तो रहा है, परंतु माले-मुफ़्त-दिले-बेरहम... फिर डोमेन संभालने का नया काम... देखें कब तक मुफ़्त के माल पर टिके रहते हैं... (दान की बछिया के दांत देख रहा है रवि ..)

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