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भारतीय सड़कें पार्ट २

रोड शो २
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दोस्तों, यह जो चित्र आप देख रहे हैं वह भारत के एक प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग - आगरा मुम्बई (एबी रोड) मार्ग पर हुए चक्का जाम का है. चक्का जाम में वाहनों की २० किलोमीटर लंबी कतार में ट्रक, जीप,कार, बस और अन्य वाहन फंसे हुए दिखाई दे रहे हैं. यह जाम पिछले ४८ घंटों से लगा हुआ था और इन पंक्तियों के लिखने तक जारी था...



पर मज़ेदार बात यह है कि यह जाम किसी प्राकृतिक विपदा या घटिया निर्माण के चलते किसी पुल टूटने इत्यादि के कारण नहीं लगा. यह जाम बहुत ही मजेदार तरीके से, हमारे इंडियन चलताऊ एटीट्यूड के कारण लगा. दरअसल किसी प्रकरण के सिलसिले में न्यायालय ने आदेश दिया कि महाराष्ट्र से आने वाले सभी ट्रकों को तुलवाया जाए ताकि ट्रकों में ओवरलोडिंग कानूनन रोकी जा सके. सामान्य भारतीय ट्रकें जो १५-२० टन के लिए डिज़ाइन होती हैं, उनमें २५-३० टन सामान लादना आम बात है. अब चाहे पर्यावरण को लगे चूना या खस्ताहाल सड़कें और हों बदहाल इससे क्या? बहरहाल, सरकारी बाबुओं ने आनन फानन उस आदेश पर अमल किया कि कोई भी मालवाहक वाहन बिना तुलवाई किए बार्डर पार न हो सके. पर अदूरदर्शिता देखिए कि नाके पर सिर्फ एक ही तौल काँटा लगा है, वह भी बिजली से चलता है, जिसके आने जाने का ठिकाना मध्य प्रदेश में नहीं है. उसमें एक ट्रक को तौलने में कम से कम पाँच मिनट लगते हैं. उस मार्ग पर वाहनों का दबाव इतना है कि प्रति दूसरे मिनट एक मालवाहक वाहन गुजरता है. अब बताइए, जाम लगेगा कि नहीं? और यह जाम कभी खत्म होगा? नतीजतन भारतीय जनता जो इसमें दुर्भाग्य से फंस गई मूर्ख बनी इस जाम को भुगतती रही, और हम आप इन खबरों को पढ़ कर द्रवित होते रहे और अपनी सड़ी गली व्यवस्था को कोसते रहे.

इस तरह की विपदाओं को, दोस्तों, हमें कोई नया नाम देना होगा. क्या ख़याल है आपका?

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ग़ज़ल
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व्यवस्था को कोई नया नाम देना होगा
बहुत हो चुका अब कुछ काम देना होगा

संभल सकते हो तो संभल जाओ यारों
नहीं तो फिर बहुत बड़ा दाम देना होगा

दिन के उजालों में क्या करते रहे थे
अब इसका हिसाब हर शाम देना होगा

इस मुल्क में कब किसी शिशु का नाम
रॉबर्ट न रहीम और न राम देना होगा

हरियाली तो आएगी रवि पर शर्त ये है
हिस्से का एक टुकड़ा घाम देना होगा

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घाम = धूप (छत्तीसगढ़ी)

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