बुधवार, 15 सितंबर 2004

पुलिस स्टोरी२

पुलिसः भाग २
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मैंने अपनी पिछली पोस्टिंग में पुलिस के बारे में लिखा था. उस कड़ी को आगे बढ़ाते हैं. एक और अख़बार की क़तरन पर जरा नज़र डालिएः



Nirbhay_Gujjar
Originally uploaded by raviratlami.
पुलिस स्टोरी२



इंसपेक्टर जनरल रिज़वान अहमद ने डायरेक्टर जनरल को रपट दी है कि २३ पुलिस मैन डकैत निर्भय गुज्जर के पे-रोल पर हैं. और व्यवस्था कुछ नहीं कर पा रही. यही वज़ह है कि निर्भय डकैतियाँ और फ़िरौती करता तो घूम ही रहा है, वह खुले आम मीडिया (टीवी चैनल सम्मिलित) को अपना इंटरव्यू देता फिर रहा है कि वह राजनीति में धमाके के साथ प्रवेश करने वाला है!
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एक माइक्रॉन मुस्कान
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महाराष्ट्र और बिहार में चुनावी सरगर्मियाँ तेज़ हो गईं हैं. मेरा पुत्र जो कक्षा नवीं का छात्र है, उसने मुझसे पूछा कि आपको अगर चुनाव में लड़ना हो, तो आप कौन सा चुनाव चिह्न लेंगे? उसे स्कूल में इस विषय पर बोलना था, और वह कुछ विचारों पर काम कर रहा था. मेरे दिमाग में तत्काल बिज़ली सी कौंधी. अगर मैं चुनाव में लड़ता तो कौन सा चुनाव चिह्न लेता?

मेरा चुनाव चिह्न होता डंकी (गधा नहीं). वज़हें ख़ूब सारी हैं-
।। डंकी कुछ पढ़ा लिखा नहीं होता. हमारे मंत्रियों, संसद/विधान सभा सदस्यों के लिए भी पढ़ा लिखा होना अनिवार्य नहीं है.
।। वोटरों को जाति, धर्म, पैसा इत्यादि के आधार पर डंकी बनाया जाता रहा है
।। समग्र देश के विकास के लिए राजनीति में कोई काम नहीं करता. सब अपनी कंस्टीट्यूएन्सी, अपनी सीट बचाए रखने के हिसाब से काम करते हैं. डंकी भी अपना पेट भरने की ख़ातिर ही काम करता है अन्यथा नहीं.

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