कु-न्याय

ये न्याय है या कु-न्याय
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पिछली पोस्टिंग में बात न्याय में देरी के विषय में थी. बात आगे बढ़ाते हैं. उमा भारती को जेल के बजाए गेस्ट हाउस में ही रखा गया है. राज्य सरकार ने गेस्ट हाउस को जेल का दर्जा दे दिया है. आप कल्पना कर सकते हैं कि क्या यह सुविधा किसी गैर राजनीतिक व्यक्ति को हासिल हो सकती है? इसीलिए, सिर्फ इसीलिए लोग राजनीति को अपना रहे हैं जिनमें शामिल हैं विजय मलैया से लेकर अंबानी बंधु भी, और इसीलिए वीरप्पन से लेकर चंबल के निर्भय गुज्जर तक राजनीति में आने के लिए फ़ीलर्स भेजते रहते हैं. इसी लिए राजा भैया जेल में बन्द होकर भी पार्टी देते हैं, और आम आदमी की क्या कहें, जिस आईपीएस अधिकारी ने कभी राजा भैया के विरूद्ध प्रकरण बनाया था, सरकार बदलते ही उस अधिकारी के विरूद्ध प्रताड़ना प्रकरण बनाए गए जिस हेतु सर्वोच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा.

भारतीय न्याय व्यवस्था के बारे में कुछ और गंभीर आंकड़े-

।। लगभग १.८ लाख क़ैदी हवालात में बंद हैं जो अपनी अधिकतम सजा से भी अधिक समय का हवालात पहले ही भुगत चुके हैं. उनका फ़ैसला कब होगा पता नहीं. बेचारे ग़रीब जमानतें भी नहीं करवा सकते.

।। भारतीय जेलों में उनकी निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक क़ैदियों को ठूंसा जाता है. उदाहरण के लिए, एक वक्त गोपालगंज, बिहार के जेल में ५० क़ैदियों की क्षमता वाले जेल में ६५० क़ैदी थे.

।। उच्च न्यायालयों में ३४ लाख प्रकरण निपटारे के लिए पड़े हैं, तथा इसके विरूद्ध न्यायाधीशों के निर्धारित संख्या के ४०% पद खाली पड़े हैं, जो अर्से से भरे नहीं गए हैं. नतीजतन, प्रतिवर्ष १.५ लाख प्रकरण लंबित सूची में और भी जुड़ जाते हैं.

ये न्याय है या कु-न्याय?
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ग़ज़ल
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इस व्यवस्था में जीने के लिए दम चाहिए
सबको अब राजनीति के पेंचो-ख़म चाहिए

ज़र्द हालातों में अब सूख चुकी भावनाएँ
पूरी बात समझने आँखें ज़रा नम चाहिए

नशेड़ियों में तो कबके शुमार हो गए वो
दो घड़ी चैन के लिए भी कुछ ग़म चाहिए

शांति की बातें सुनते तो बीत गई सदियाँ
बात अपनी समझाने के लिए बम चाहिए

बातें बुहारने की बहुत करता है तू रवि
उदर-शूल के लिए तुझे कुछ कम चाहिए

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उमा दीक्षित से शायद आपका अभिप्राय उमा भारती से है।

धन्यवाद प्रतीक. उफ़, ये तो भारी ग़लती थी. ठीक कर दिया है.

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
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