घटिया हो तो चलेगासस्ता होना चाहिए

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इकॉनामिस्ट स्वामीनाथन अय्यर ने रेल्वे बज़ट पर मज़ेदार टिप्पणी की. उन्होंने कहा
कि यह बज़ट देश के लिए नहीं है, वरन् लालू की कांस्टिट्यूएंसी के लिए है. आगे
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी श्रेणियों में किराया नहीं बढ़ा तो इसमें
प्रसन्नता की कोई बात इस लिए नहीं है, चूंकि बज़ट देश के लिए नहीं है, वरन् कुछ
वोट बैंक पक्का करने के लिए है. लिहाजा रेल सेवाएँ कम खर्चे पर, सस्ती ही होनी
चाहिएँ भले ही वे घटिया हों. घटिया, सड़ा गला, बेकार सब चलेगा, शर्त ये है कि वे
सस्ती होनी चाहिएँ.

सचमुच, रेल सेवा कितनी सस्ती हैः एक उदाहरणः रतलाम से इंदौर (१००कि.मी.) का रेल
किराया है १९ रूपए, जबकि वहीं रेल्वे स्टेशन से कहीं भी बाहर जाने का
थ्री_व्हीलर का न्यूनतम किराया है २० रूपए. ज़ाहिर है, भारतीय रेल की तुलना
जापानी, फ्रांसीसी या चीनी रेल से नहीं की जा सकती. हमें तो, घटिया चलेगा,
बशर्तें उन्हें सस्ता होना चाहिए. इन्हीं भावों को उद्वेलित करती एक ग़ज़ल
पढ़िएः

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ग़ज़ल
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सस्ता होना चाहिए

घटिया बेकार चलेगा बशर्तें उन्हें सस्ता होना चाहिए
इस शहर में जीना है तो उन्हें सस्ता होना चाहिए

विचारधारा, प्रतिबद्धता, प्रगतिशीलता झोंको भाड़ में
जिन्हें सफ़ल होना है उन्हें सस्ता होना चाहिए

न करो इस जमाने में कर्म की कालातीत बातें
समझने समझाने के लिए उन्हें सस्ता होना चाहिए

सुकून भरे ख्वाबों के लिए तरसता रहा वो मुसाफ़िर
पता न था कि नींद में भी उन्हें सस्ता होना चाहिए

ढोरों गँवारों के शहर में तो ज़ाहिरा बात है दोस्तों
अगर कोई रास्ते बने भी हैं उन्हें सस्ता होना चाहिए

पुकारते हुए साँस उखड़ जाएगी रवि तेरी एक दिन
मुद्दे उठने के लिए भी अब उन्हें सस्ता होना चाहिए

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हाँ, बढ़िया चीज़ की कोई कद्र नहीं है। चीप ऍण्ड बॅस्ट होना चाहिए।

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