टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

वाह! बढ़िया है !

परीक्षण सफल रहा.
लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के मोज़िला ब्राउज़र में अक्षर सही नहीं आ रहे. इसका एक पैच्ड संस्करण है जो पैंगो फ़ॉन्ट्स को समर्थित करता है उसका उपयोग करना होगा. विंडोस में तो कोई समस्या ही नहीं है.

कल बहुत सी बातें लिखेंगे

मेरी हिंदी ग़ज़लें पढ़िए तब तक: http://www.geocities.com/raviratlami

नमस्ते !
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ये जियोसिटीज़ अब कहाँ गया?

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