टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

2004

नए साल के नए संकल्प :)

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आज सुबह-सुबह एक मित्र ने दुर्ग से फ़ोन पर बधाईयाँ देते हुए कहा कि तुम्हारा व्यंग्य लेख- ‘नए साल के नए संकल्प’ बहुत ही बढ़िया है, और पढ़ने में मज़ा आया. उसने आगे यह भी कहा कि मैं भी सोच रहा हूँ कि तुम्हारे बताए रास्ते का कोई संकल्प लूँ ताकि उसे निभाने में आसानी तो रहे ही, मजा भी आए.



मुझे कुछ आश्चर्य हुआ. मैंने उससे पूछा कि वह लेख तुमने कहाँ पढ़ा. मुझे लगा कि वह भी अब इंटरनेट पर सैर करता होगा. परंतु उसने कहा कि यहाँ का एक दैनिक अख़बार निकलता है उसमें तुम्हारा यह आलेख रविरतलामी के नाम से छपा है. मुझे सुखद आश्चर्य हुआ.



दरअसल यह आलेख इंटरनेट पर मेरी व्यक्तिगत साइट पर तथा विश्वजाल की हिन्दी पत्रिकाअभिव्यक्ति पर पिछले साल भर से है. अगर यह आलेख कहीं किसी प्रिंट मीडिया में छपा हुआ होता तो कब का किसी रोड साइड ठेले के समोसे-भजिए में लपेटा जाकर गुम हो चुका होता. परंतु अजर अमर इंटरनेट पर एक बार आपने इसे प्रकाशित कर दिया तो फिर यह भी अजर अमर हो गया. उस अख़बार ने इस लेख को इंटरनेट पर से ही उतारा और छाप दिया. धन्यवाद उस अख़बार को कि कम से कम उसने मेरा नाम भी लेख के साथ दिया. रचनाकारों के लिए इंटरनेट और ब्लॉग एक ऐसा माध्यम बनकर आया है कि आप अपनी रचनात्मकता को नित नए आयाम दे सकते हैं, बिना किसी संपादकीय कैंची के भय से और बिना किसी भय के कि यह कहीं प्रकाशित हो पाएगा भी या नहीं. आपकी रचना प्रकाशित रहेगी आने वाली पीढ़ियों के उपयोग के लिए अनंत काल तक, जब तक इंटरनेट का वज़ूद रहेगा.



सोच रहा हूँ कि नए साल के संकल्प में मैं अपने ब्लॉग की आवृत्ति बढ़ाऊँ. प्रतिदिन लिखने के लिए समय का प्रबंधन नए सिरे से करना तो होगा, परंतु इस ब्लॉग के पाठकों की राय ज्यादा महत्वपूर्ण है. क्या वे इसे नित्य झेल पाएँगे? अपनी राय टिप्पणियों के माध्यम से मुझ तक पहुँचाएं.



नए साल की हार्दिक शुभकामनाएँ


जय हो श्री 1008 श्री लालू महाराजा की
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लालू भगवान:

पिछले दिनों पटना के बहादुरपुर इलाके में लालू भक्तों द्वारा लालू वंदना पंडाल बनाया गया जिसमें लालू, राबड़ी तथा सोनिया के देवी-देवताओं सरीखी तथा अटल बिहारी और आडवाणी की राक्षसों जैसी मूर्तियाँ बनाई गईं और ‘लालू नाम केवलम्’ के मंत्रों के साथ देवताओं के उत्थान और राक्षसों के विनाश की कामना करते हुए यज्ञ किया गया और आहुतियाँ दी गईं. कार्यक्रम में लोगों की अच्छी-खासी उपस्थिति भी रही. चुनाव जो सर पर हैं, और टिकट पाने के ख्वाहिशमंदों की संख्या भी कम नहीं है. जय हो श्री 1008 श्री लालू महाराजा की. इससे पहले लालू चालीसा की रचना हो चुकी है और उसकी प्रतियाँ भी छप-बंट चुकी हैं. लालू को उनके भक्त कृष्णावतार बताते हुए कई यज्ञ पहले भी कर चुके हैं. पर क्या लालू यह भक्ति उनके कुर्सी पर बने रहते रह पाएगी या फिर उनके सत्ताहीन होने के उपरांत भी जारी रहेगी? यह बात लालू स्वयं ज्यादा जानते होंगे.

लालू भगवान और भगवान विश्वकर्मा:

बारंबार हो रही रेल दुर्घटनाओं को देखते हुए लालू जी अपने अख़बार ‘राजद’ (जो लालू का लालू के लिए लालू के द्वारा है) में फर्माते हैं कि सिर्फ भगवान विश्वकर्मा ही रेल दुर्घटनाओं को रोक सकते हैं. इसके लिए रेल मंत्री बनने के उपरांत उन्होंने भगवान विश्वकर्मा की पूजा की है. सच बात है- बाबा आदम के जमाने की पुरानी, खराब, सड़ती हुई इन्फ्रास्ट्रक्चर पर आधारित भारतीय रेलवे (अभी हाल ही में जो रेल दुर्घटना हुई, उसमें पुरानी सिग्नलिंग प्रणाली जो अंग्रेजों के समय की है, वह खराब हो गई, और उन्हीं अंग्रेजों के समय की काग़ज़ आधारित ट्रेन पास करने की प्रणाली उपयोग में ली जा रही थी, जिसमें मानवीय भूल लाज़िमी था) में दुर्घटनाओं को रोकना भगवान विश्वकर्मा के बस की ही बात है. आइए, हम भी मिल कर प्रार्थना करें कि भगवान विश्वकर्मा लालू जी की प्रार्थना सुन लें.

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लालू आरती:
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एक लालू भक्त ने हाल ही में ऑडियो कैसेट ‘श्री लालू आरती’ जारी किया है जिसमें जाहिर है भोजपुरी में लालू आरती है. कैसेट के कवर पर लालू, राबड़ी, लालू के साले साधु तथा सुभाष के देवताओं के रूप में चित्र हैं. इससे पहले जिस व्यक्ति ने लालू चालीसा की रचना की थी उसे राज्य सभा टिकट से नवाज़ा गया था. उम्मीद करते हैं कि लालू आरती गायक को कोई मंत्री पद शीघ्र मिलेगा. मैं भी सोच रहा हूँ कि लालू पर कोई लालूयादवायण (बतर्ज रामायण) लिख मारूँ तो मेरी भी गरीबी थोड़ी दूर हो सकेगी


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ग़ज़ल
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भारत भूमि का लालू हूँ
चारा खा भया कालू हूँ

कुल्हड़ मय सियासती
समोसों का तो आलू हूँ

माई दलित मेरे अपने
लो कहते हो मैं चालू हूँ

दूरी कैसी मुझसे मैं भी
भैंस के भेस में भालू हूँ

रवि कहे कैसे कुरसी की
भूख में सूख गया तालू हूँ

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माई=एमवाई, मुसलिम+यादव
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भारत में एक शानदार रेल यात्रा


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सिर्फ एक ? शायद नहीं. बल्कि भारत में आपको ऐसी कई शानदार यात्राएँ करने के लिए रोज बरोज मिलेंगी. वृत्तांत यूँ है: इनडिफरेंट, चलताऊ रवैये के कारण भारत की एक प्रमुख रेलगाड़ी ‘सम्पूर्ण क्रांति’ जो दिल्ली से पटना (जो सौभाग्य से रेल मंत्री लालू यादव का शहर भी है) के बीच चलती है, पिछले दिनों बिना राशन पानी के पूरे बीस घंटे लगातार चलती रही और यात्री जिसमें नन्हे मुन्ने बच्चे भी थे, भूखे प्यासे परेशान होते रहे.

सम्पूर्ण क्रांति रेलगाड़ी में सभी श्रेणियों में यात्रियों के खाने पीने की व्यवस्था रेलगाड़ी के भीतर ही रसोई भंडार यान में भंडारित सामग्रियों से की जाती है, चूंकि दिल्ली से पटना की 20 घंटे की यात्रा में रेलगाड़ी बीच में सिर्फ दो स्थानों पर कुछ समय के लिए ही रूकती है. खाने पीने की व्यवस्था के लिए रेलवे द्वारा टिकट के साथ ही अलग से पैसा वसूल लिया जाता है.

कोहरे (?) के कारण पटना से दिल्ली आने वाली सम्पूर्ण क्रांति रेलगाड़ी बहुत अधिक देरी से दिल्ली पहुँची. जब यह दिल्ली पहुँची तो इसके वापस पटना लौटने का समय हो गया था. चूंकि यही रैक वापस पटना जाती है, अत: ताबड़तोड़ इसी रैक को बिना उचित मेंटेनेंस या साफ सफाई के वापस पटना लौटा दिया गया. यहां तक तो ठीक था, परंतु यात्रियों के खाने पीने का सामान उचित मात्रा में रसोई भंडार यान में लोड नहीं किया गया. समय का जो अकाल था.

जो थोड़ा मोड़ा राशन रसोई भंडार में था, उसे प्रथम श्रेणी और वातानुकूलित यात्रियों को दे दिया गया. स्लीपर क्लास के यात्रियों को भोजन-पानी नहीं दिया गया. वे निचले दर्जे में यात्रा जो कर रहे थे, लिहाजा, निचले स्तर के ट्रीटमेंट के ही काबिल थे. भले ही उनमें भूख से बिलबिलाते नन्हें मुन्ने बच्चे भी रहे हों. रेल्वे का विभाग चाहता तो बीच के दो स्टेशनों कानपुर तथा मुगलसराय जहाँ सम्पूर्ण क्रांति कुछ समय के लिए रूकती है, वहां पहले से संदेश भेज कर खानपान की सामग्रियाँ तैयार रखवा कर रेलगाड़ी के पहुँचते ही लोड करवा सकती थी, परंतु नहीं. किसे फ़िकर है? भारतीय रेलवे में सबकी नौकरी पक्की है भाई. और जब तक ट्रेनें आपस में भिड़ न जाएँ, जवाबदारी की किसे चिंता.

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ग़ज़ल
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बताते हो मुझे मेरी जवाबदारियाँ
याद नहीं है अपनी कारगुजारियाँ

फ़ायदे का हिसाब लगाने से पहले
देखनी तो होंगी अपनी देनदारियाँ

देश प्रदेश शहर धर्म और जाति
पर्याप्त नहीं है इतनी जानकारियाँ

काल का दौर ऐसा कैसा है आया
असर भी खो चुकी हैं किलकारियाँ

बैठा रह तू भले ही ग़मज़दा रवि
सबको तो पता है तेरी कलाकारियाँ

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चुनाव आया मिठाईयों का मौसम लाया

चुनाव का मौसम आया तो लालू यादव को याद आया कि अरे, उन्हें रेल मंत्री बने तो साल भर होने जा रहा है और उन्होंने दलित महिलाओं को अभी तक मिठाई नहीं खिलाई है. अत: वे चले मिठाई खिलाने. जेब से करारे नोटों की गड्डियाँ निकालीं और सौ-सौ रूपए मिठाई खाने के लिए बाँटने लगे. अब निगोड़ा चुनाव का मौसम बीच में टपक पड़ा सो वे क्या करें. लोगों ने बेकार ही इसे चुनाव के साथ जोड़ दिया. या शायद अच्छा ही किया. अब बिहार का हर दलित यह उम्मीद तो कर ही सकता है कि लालू के राज में भले ही उसे कुछ न मिले, पाँच साल में कम से कम एक बार सौ रूपए की मिठाई खाने को तो मिल सकेगी.

लालू भाग्यशाली हैं कि मिठाई खाने के लिए पैसे पाने के होड़ में कोई भगदड़ नहीं मची और कोई मरा नहीं. पिछले लोक सभा चुनाव के दौरान (लालजी टण्डन के जन्मदिवस की खुशी में) महिलाओं को अटल बिहारी बाजपेयी के चुनाव क्षेत्र लखनऊ में साड़ी बाँटी गई थी जिसमें भगदड़ मचने से कई महिलाओं की मौत हो गई थी. पिछले दिनों मेरे शहर में नगर निगम चुनाव हुए और पार्षद पद के कुछ प्रत्याशियों ने वोटरों को जम कर मुफ़्त में दारू पिलाई. अब यह जुदा बात है कि मिठाई खाकर, साड़ी पहन कर या फिर दारू पीकर वे वोट किसको देते हैं. जनता भोली और भावुक हो सकती है, बेवकूफ़ कतई नहीं.

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ग़ज़ल
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लो मिठाई खाओ कि चुनाव है
तेरे द्वारे लाया हूँ कि चुनाव है

पाँच साल फिर मिलने का नहीं
पिओ मुफ़्त दारू कि चुनाव है

भाई बाप दोस्त बने हैं दुश्मन
दुश्मन बने दोस्त कि चुनाव है

ड्योढ़ी में ख़ैरातों का ये अंबार
हम क्यों भूले थे कि चुनाव है

याद रखना रवि परिवर्तनों की
वोट में है ताक़त कि चुनाव है

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भारत और भाषण
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इन्फ़ोसिस के नारायणमूर्ति कहते हैं कि नेताओं को भाषण देने के बजाए काम करना चाहिए. भारत में अब भाषणों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए.

बात वाजिब है. परंतु नेताओं का कोई काम भाषण के बगैर हो सकता है क्या? वे खांसते छींकते भी हैं तो भाषणों में. वे खाते पीते ओढ़ते बिछाते सब काम भाषणों में करते हैं. कोई उद्घाटन होगा, कोई समारोह होगा तो कार्यक्रम का प्रारंभ भाषणों से होगा और अंत भी भाषणों से होगा. संसद के भीतर और बाहर तमाम नेता भाषण देते नजर आते हैं, और उससे ज्यादा इस बात पर चिंतित रहते हैं कि उनकी बकवास को हर कोई ध्यान से सुने. दो रेलगाड़ियाँ आपस में भिड़ती हैं तो मांग की जाती है कि रेल्वे मंत्री वक्तव्य दें. कहीं कोई घोटाला होता है तो विरोधी चिल्लाते हैं कि प्रधानमंत्री वक्तव्य दें. राजनेताओं का तो खाना ही हजम नहीं होता होगा जब तक वे भाषण नहीं देते हों. मुझे तो लगता है कि कोई नेता अपनी प्रेयसी से प्रेम का इजहार भाषणों से ही करता होगा. आज भारत की पूरी सियासत वक्तव्यमय-भाषणमय हो गई है.

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ग़ज़ल
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गुम गया मुल्क भाषणों में
जनता जूझ रही राशनों में

नेताओं की है कोई जरूरत
दुनिया को सही मायनों में

इस दौर के नेता जुट गए
गलियारा रास्ता मापनों में

बदहाल क़ौम के धनी नेता
लोग घूम रहे हैं कारणों में

जिंदा रहा है अब तक रवि
और रहेगा बिना साधनों में

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बाजी.कॉमः प्रा-जी, ये इंडियन क़ानून है !

बाजी.कॉम के सीईओ अवनीश बजाज को पिछले दिनों नई दिल्ली में गिरफ़्तार कर 6 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. उनका जुर्म? उनका जुर्म ये है कि वे बाजी.कॉम जैसे विश्वस्तर के इंटरनेट आधारित स्वचालित ऑनलाइन खरीद-बिक्री केंद्र सुविधा मुहैया करवाने वाले पोर्टल के भारतीय मूल के सीईओ हैं.

किसी व्यक्ति ने बाजी.कॉम पर एमएमएस आधारित अश्लील सीडी बेचने के लिए रख दी, और उसकी कुछ प्रतियाँ बिक भी गईँ. बाजी.कॉम पर जाहिर है, रजिस्ट्रेशन शर्तों को हामी भरने के उपरांत कोई भी रजिस्टर्ड व्यक्ति उन शर्तों का उल्लंघन करते हुए कुछ भी बेच सकता है, चूंकि लाखों की तादाद में खरीदी बिक्री किए जाने वाले सामानों पर व्यक्तिगत निगाह रखना असंभव तो है ही, बल्कि आज के जमाने में ऐसा करना मूर्खता भी है. यही बाजी.कॉम पर हुआ और जिस व्यक्ति ने अश्लील सीडी बेची, उसे तो खैर पकड़ा ही गया, परंतु बाजी.कॉम के सीईओ को भी भारतीय पुलिस ने पकड़ लिया कि भाई अश्लील सीडी बिकी तो तेरी दुकान से ही है !

यानी बाजी.कॉम को करना यह था कि जो भी वस्तु उस पोर्टल पर खरीदी बिक्री के लिए आए, उसे उसका सीईओ व्यक्तिगत रूप से जाँचे परखे कि वह किस देश के किस क़ानून के तहत क़ानूनी है या गैर क़ानूनी है और फिर इसके उपरांत उसके व्यवसाय की अनुमति दे. भाई क्या बात है, इंटरनेट के युग में ऐसे में हो चुका धंधा. शायद यही वजह है कि लक्ष्मी मित्तल भारत से बाहर जाकर स्टील किंग बन जाते हैं और उसकी भारतीय स्टील कंपनियाँ घाटे में चल रही होती हैं.

कानून क्या किताबों में लिखी चंद लकीरें होनी चाहिएँ जिन्हें चंद अज्ञानी पूर्वज लिख जाते हैं और जिन्हें अग्रजों के प्रगतिशील समाज का भान नहीं होता?

अब तो मुझे भी यह भय सताने लगा है कि कल को कोई मेरे ब्लॉग पर अश्लील टिप्पणी लिख दे तो मुझे भारतीय पुलिस गिरफ्तार न कर ले...

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शेर
-.-.-
नादान तू क्योंकर गिरफ्तार हो गया
रोजा के बगैर कैसे इफ्तार हो गया

हिंदी में टाइप करना मुश्किल? कतई नहीं





क्या आपको पता है कि कम्प्यूटर में काम करने के लिए 12 भारतीय भाषाओं हेतु 126 प्रकार के कुंजी पटल विन्यास उपलब्ध हैं? अकेले हिंदी में
ही दर्जनों कुंजीपटल विन्यास -सुषा से लेकर इनस्क्रिप्ट तक हैं. कम्प्यूटरों के
लिए हिंदी का आज भी कोई मानक कुंजी पटल नहीं है. अब तक तो अंग्रेजी फ़ॉन्ट को हिंदी रूप देकर और उसके आधार पर अपना नया कुंजीपटल विन्यास बनाकर लोगों ने छोटा रास्ता निकाला था जिससे भला होने के बजाए नुकसान ही ज्यादा हुआ. फिर किसी ने अपना माल मुफ़्त उपयोग के लिए भी जारी नहीं किया (इसमें सरकारी एजेंसियाँ भी शामिल हैं, जो जनता के टैक्स का भारी भरकम पैसा भकोस लेती हैं
पर यहाँ बेचारे डेवलपरों को न कोसें, बल्कि योजना बनाने वाले सरकारी बाबुओं को कोसें), भले ही लोग पायरेसी के लिए भी उस उत्पाद (उदा. लीप ऑफ़िस) को न पूछें. वो तो भला हो भारतभाषा जैसी भली
जगह से आए शुषा सीरीज के
मुफ़्त फ़ॉन्ट का जिसके दम खम पर
आज हिन्दी की कई साइटें बख़ूबी चल रही हैं.



परंतु यूनिकोड के प्रचलन में आने से हम में से प्रत्येक को अंततः यूनिकोड फ़ॉन्ट का रास्ता पकड़ना ही होगा. इंटरनेट पर हिन्दी में सर्च सिर्फ यूनिकोड पर ही संभव है और गूगल इसे साल भर से ज्यादा समय से समर्थित कर रहा है. यूनिकोड आधारित रेडहेट लिनक्स के हिंदी संस्करण आ चुके हैं और अगले साल के प्रारंभ में विंडोज़ हिंदी का सस्ता स्टार्टर संस्करण आने से परिदृश्य में तेजी से परिवर्तन आएगा. अतः अभी तक जो भी हिन्दी का उपयोग यूनिकोड से इतर करते
आ रहे हैं, उनके लिए सुझाव है कि शुभष्य शीघ्रम्.



यूनिकोड हिन्दी समर्थन विंडोज़ 2000 या एक्सपी तथा लिनक्स के नवीनतम संस्करणों में ही उपलब्ध है अतः यह इसके प्रचलन में बड़ी बाधा
है. अभी भी बहुत से कंप्यूटर उपयोक्ता विंडोज 9
x का उपयोग करते हैं. परंतु यदि उन्हें जालघर के हिंदी संसाधनों में शामिल होना है तो उन्हें भी शीघ्र ही अपने विंडोज़ अद्यतन कराने होंगे. अगर विंडोज़ अद्यतन करना वित्तीय रूप से संभव नहीं है, तो मुफ़्त मे उपलब्ध लिनक्स आपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करना उचित होगा. रेडहेट का फेदोरा कोर 3 आउट ऑफ द बॉक्स हिंदी समर्थन देता है, यहाँ तक कि पुराने 500 मे. हर्त्ज और 128 एम.बी रैम तक के कम्प्यूटरों पर इसे आसानी से चलाया जा सकता है. इसकी संस्थापना भीपूरी तरह हिंदी वातावरण में रहकर की जा सकती है.



फ़ॉन्ट आधारित हिंदी मसलन कृतिदेव या शुषा से यूनिकोड हिंदी में बदलना अब तक आसान नहीं था. परंतु अब आपके पुराने कार्यों को यूनिकोड में परिवर्तन के लिए रूपांतर नामक एक प्रोग्राम तो है ही, कुछ अन्य पीएचपी स्क्रिप्ट तथा सी प्रोग्राम इंडिकट्रांस.ऑर्ग में भी उपलब्ध हैं. ये प्रोग्राम मुफ़्त हैं तथा अच्छे खासे परिणाम देते हैं. मैंने रूपांतर को अपने पुराने इस्की हिंदी फ़ाइलों को यूनिकोड में रूपांतरण के लिए अच्छा खासा काम मेंलिया है.



रहा सवाल हिंदी कुंजीपटल विन्यास का, तो धन्यवाद एक बार फिर माइक्रोसॉफ्ट का. माइक्रोसॉफ़्ट के आईएमई1 संस्करण 5 (भारतीय भाषाओं के लिए मुफ़्त डाउनलोड हेतु उपलब्ध) में आपको सात तरह के हिंदी कुंजीपटल विन्यास मिलते हैं. ये हैं ट्रांसलिट्रेशन, रेमिंगटन, गोदरेज, हिंदी टाइपराइटर आरबीआई, इनस्क्रिप्ट, वेब दुनिया तथा एंग्लो-नागरी. हो सकता है इनमें से कोई न कोई तो आप उपयोग कर ही रहे होंगे. 1 एम.बी. आकार के इस डाउनलोड को अपने विंडोज़ 2000 या एक्सपी तंत्र पर स्थापित करें और नियंत्रण पटल केकुंजीपटल विन्यास में से हिंदी कुंजीपटल Hindi Indic IME 1 [V 5.0] चुनें और इन सात में से कोई भी उपयोग हेतु चुनें. यदि आपका मौजूदा इस्तेमाल में आ रहा कुंजी पटल विन्यास यहाँ पर नहीं है (जैसे कि शुषा) तो फिर माइक्रोसॉफ़्ट का ही कुंजीपटल विन्यास संपादक (कीबोर्ड एडीटर ) का उपयोग कर अपने लिए विशेष यूनिकोड हिंदी कुंजीपटल की रचना कर सकते हैं या वर्तमान कुंजीपटल में कुछ रद्दोबदल कर सकते हैं. और यह बिलकुल आसान है. बस आपके तंत्र पर .नेट फ्रेम वर्क संस्थापित होना चाहिए. यदि आप हिंदी में शुरूआत ही कर रहे हैं तो आपके लिए
ट्रांसलिट्रेशन या एंग्लो नागरी कुंजी पटल बहुत ही सरल होगा चूंकि यह फ़ोनेटिक
आधारित है, और आप हिंदी को रोमन में टाइप कर हिंदी यूनिकोड का उपयोग कर सकेंगे (जैसे कि रवि लिखने के लिए
ravi या riv). ट्रांसलिट्रेशन में तो ऑनलाइन हेल्प भी है, और इसके वर्ड लिस्ट की सहायता से लंबे और प्रायः बार बार उपयोग में आने वाले हिंदी शब्दों के अंग्रेजी संक्षिप्ताक्षर देकर अपना काम और भी आसान बना सकते हैं. लिनक्स में इनस्क्रिप्ट कुंजीपटल डिफ़ॉल्ट रूप में संस्थापित होता है, परंतु इसके कुंजीपटल एक्सएमएल फ़ाइल में मामूली रद्दोबदल कर अपने पसंदीदा, अभ्यस्त हो चुके हिंदी कुंजीपटलकी रचना की जा सकती है.



तो फिर देर किस बात की? अपने कम्प्यूटर को यूनिकोड हिंदीमय कर लीजिए आज, अभी ही.

देखें हिन्दी कुंजीपटल स्क्रीनशॉट 1
देखें हिन्दी कुंजीपटल स्क्रीनशॉट 2

यिप्पी ! याहू ! हुर्रे ! इंडीब्लॉगी में माइक्रोसॉफ़्ट पुरस्कार ! !

मुझे माफ कीजिएगा यदि मैं उत्तेजना में आकर ज्यादा ही उछलकूद मचा रहा होऊंगा. परंतु बात ही कुछ ऐसी है. इंडीब्लॉगी 2004 में पुरस्कारों की सूची में कुछ और नाम जुड़ गए हैं, और उनमें है माइक्रोसॉफ़्ट द्वारा भी एक पुरस्कार प्रदाय किए जाने की घोषणा. धन्यवाद माइक्रोसॉफ़्ट तथा धन्यवाद दीपक गुलाटी जिनके प्रयासों से माइक्रोसॉफ़्ट द्वारा पुरस्कार प्रायोजित किया गया. अब कुल मिलाकर आधा दर्जन से ज्यादा पुरस्कार हो गए हैं.

तो दोस्तों अपने नॉमिनेशन्स और अपने ब्लॉगों की धार और पैनी कीजिए और शामिल होइए इंडीब्लॉगी 2004 में. एक अच्छी खबर यह भी है कि नॉमीनेशन की तारीख आगे बढ़ कर 31 दिसम्बर हो चुकी है. अतः बन पड़े तो छूट चुके अपने दोस्तों को भी खबर कर दें. अधिक जानकारी के लिए इंडीब्लॉगी देखें.

इंडिया क्रम्बलिंग ?

इंडियन एक्सप्रेस में पिछले कुछ दिनों से समाचार सीरीज छप रहा है कि किस प्रकार कर्नाटक की नई सरकार सत्ता में आते ही बैंगलोर के लिए लिए गए पिछली सरकार के निर्णयों, कार्यों और खासकर विकास कार्यों को जानबूझ कर रोक रही है. जिसके कारण बैंगलोर बर्बाद होता जा रहा है. यह सब क्षेत्रीय राजनीति के तहत हो रहा है. प्रदेश तथा देश के विकास कार्यों से राजनीतिज्ञों को कोई लेना देना नहीं है.
यह स्थिति कमोबेश भारत भर में है. दरअसल राजनीतिज्ञों को अपनी और अपनी पार्टी के अलावा अन्य किसी के विकास में कोई दिलचस्पी नहीं है. जो भी कार्य किए जाते हैं वह सत्तारूढ़ पार्टी की भलाई के लिहाज से किए जाते हैं. किसी पार्टी की सरकार अगर कोई काम करती है, तो विरोधी पार्टी को उसमें भ्रष्टाचार नज़र आता है. सरकार बदलते ही उसमें मीन मेख निकाल कर उन कार्यों की धज्जियाँ उड़ाई जाती हैं. नतीजतन भारत देश जहाँ साधनों संसाधनों की कोई कमी नहीं है, जहाँ का तहाँ खड़ा है.
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ग़ज़ल
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ईमान का रास्ता और था
मैं चला वो रास्ता और था

चला तो था दम भर मगर
मंजिल का रास्ता और था

तेरी वफा की है बात नहीं
हमारा ही रास्ता और था

कथा है सफल सफर की
क्या तेरा रास्ता और था

सब दुश्मन हो गए रवि के
वो दिखाता रास्ता और था

जालघर के हिन्दी समूह


जालघर के समूहों की अपनी दुनिया है. भांति-भांति केलोगों ने भांति-भांति के समूहों का सृजन जालघर में किया हुआ है. यहाँ किसी समूहमें आपको किसी क्लिष्ट विषय पर गहन चर्चा में रत लोग मिलेंगे तो वहीं किसी अन्य समूह में हल्के फुलके हास परिहास की बातें चल रही होंगी. कहीं इतिहास पर शोध की
बातें हो रही होंगी तो कहीं तकनालॉजी पर बहसें हो रही होगीं. और यह भी संभव है कि किन्हीं समूहों में स्तरहीन विषयों पर स्तरहीन चर्चाएँ चल रही हों. फिर भी, जालघर के समूह न केवल व्यक्ति के ज्ञान को परिमार्जित करने का अच्छा खासा कार्य रहे हैं बल्कि विचारों के आदान-प्रदान के लिए विश्व-स्तर पर मौलिक मंच प्रदान कर रहे हैं.
जालघर के समूह दरअसल वैश्विक गोष्ठी स्थल हैं जहाँ आप बेझिझक अपनी बात चार लोगों के बीच कह सकते हैं और चार लोगों की बेबाक बातें भी जान सकते हैं.

अपनी बात कहने के लिए या अपने विचारों से मिलते जुलते बातों के बारे में जानने के लिए आप भी जुड़ सकते हैं जालघर के किसी ऐसे समूह से जिसे आप समझते हैं आपकी रुचि का है. और अगर आपको आपकी रुचि से मिलता जुलता कोई समूह नहीं भी मिलता है, तो भी कोई बात नहीं. आप स्वयं एक नया समूह बना सकते हैं. ऐसे समूहों की सेवाएँ आमतौर पर मुफ़्त, निशुल्क हैं. किसी मौजूदा समूह से जुड़ना या कोई नया समूह बनाना बहुत आसान है. याहू, एमएसएन, गूगल तथा ऐसे ही कुछ अन्य जालघर हैं जिनमें मौजूदा किसी समूह से जुड़ने तथा नया समूह बनाने की सुविधाएँ हैं. याहू के समूह प्रायः अधिक लोकप्रिय हैं चूंकि यह काफी पुराना है इसमें ढेर सारी अन्य सुविधाएँ भी हैं.


हिन्दी विषय से सम्बन्धित कई समूह जालघर में पहले से ही बने हुए हैं. जालघर पर ढूंढने से पता चलता है कि हिन्दी का उल्लेख करते हुए लगभग 1564 समूह
अकेले याहू में ही हैं. दर्जनों अन्य हिन्दी समूह एमएसएन, गूगल, इंडियाटाइम्स के
तथा अन्य समूहों में भी हैं. इससे यह उम्मीद जगती है कि हमें प्रायः हर कल्पनीय
विषय पर जालघर पर कोई न कोई मौजूदा समूह मिल सकता है. परंतु हजारों की संख्या में समूहों के मौजूद होने के बावजूद भी कभी ऐसा होता है कि हमें पता नहीं चलता कि कौन सा समूह हमारे अपने विषय तथा हमारी अपनी प्रकृति से मेल खाता है तथा कहाँ उपलब्ध है. ऐसी स्थिति में जालघर पर शांति के साथ ढूंढने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. हिन्दी विषय से सम्बन्धित ऐसे ही कुछ समूहों के बारे में कुछ जानकारी एकत्र करने का प्रयास किया गया है जिनमें चाहें तो आप भी जुड़कर हिन्दी साहित्य चर्चा में भाग ले सकते हैं तथा अपनी रचनात्मकता को नए आयाम दे सकते हैं.

1 अनुभूति- हिन्दी समूह वैसे तो इस समूह का निर्माण जालघर की हिन्दी कविता पत्रिका
  1. अनुभूति-हिन्दी के नई हवा स्तम्भ में प्रकाशित कविताओं पर बेबाक बहस के लिए किया गया है, परंतु सदस्य इसमें अपनी कविताएँ भी प्रकाशित कर सकते हैं. इनमें से कुछ चुनी कविताओं को अनुभूति में प्रकाशित भी किया जाता है. इस समूह में वर्तमान में 137 सदस्य हैं. इस समूह में यूनिकोड तथा रोमन लिपि में रचनाएँ तथा टिप्पणियाँ प्रेषित की जा सकती हैं. अधिकतर सदस्य रोमन लिपि का उपयोग करते है. यह समूह काफ़ी सक्रिय प्रतीत होता है चूंकि माह सितम्बर, अक्तूबर और नवंबर 04 में क्रमशः 1904, 1686 तथा 1051 संदेश इस समूह को भेजे गए.

  2. हिन्दी समूह यह समूह प्रमुखतः हिन्दी को दूसरी भाषा के रूप में सीखने वालों के ज्ञान को परिष्कृत करने के लिहाज से तैयार किया गया है. अप्रैल 1999 से चल रहे इस समूह के 702 मौजूदा सदस्य हैं. इस समूह में भी यूनिकोड या रोमन लिपि में हिन्दी में संदेश पोस्ट किए जा सकते हैं. यह समूह भी काफी सक्रिय है तथा इसको सितम्बर, अक्तूबर और नवंबर 04 में क्रमश 231, 230 तथा 76 संदेश प्राप्त हुए.

  3. हिन्दी-फोरम यह समूह हिन्दी-उर्दू यानी हिन्दुस्तानी भाषा में साहित्यिक रुचि रखने वालों के आपसी विचार विमर्श तथा ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए बनाया गया है. इसमें उठने वाले बहस के विषयों को किसी लीक पर बांधा नहीं गया है, वरन कहीं से भी शुरुआत की जा सकती है, बस वह हिन्दी से जुड़ी होनी चाहिए. यह समूह मार्च 04 से क्रियाशील है और वर्तमान में इसके 291 सदस्य हैं. इस समूह की सक्रियता साधारण है. अक्तूबर तथा नवंबर 04 में क्रमशः 140 तथा 100 संदेश इस समूह को प्राप्त हुए. संदेश रोमन लिपि या यूनिकोड में प्रेषित किए जा सकते हैं.

  4. हिन्दी कविता संग्रह जैसे कि नाम से ही प्रतीत होता है, जालघर का यह याहू समूह हिन्दी कविताओं के लिए ही बनाया गया है जहाँ आप अपनी कविताओं
    को समूह सदस्यों के बीच प्रकाशित कर सकते हैं तथा उस पर चर्चा कर सकते हैं. हालाँकि इस समूह के 62 सदस्य हैं, परंतु इस समूह की सक्रियता नगण्य प्रतीत होती है. संदेशों को यूनिकोड तथा रोमन लिपि में भेजा जा सकता है.

  5. फोरम-इन-हिन्दी याहू का यह हिन्दी समूह विदेशों में बसे हिन्दी भाषियों के लिए बनाया गया है ताकि वे अपनी भाषा में अपने मित्रों के बीच जुड़ सकें. वर्तमान में इस समूह के 59 सदस्य हैं तथा इसकी सक्रियता समयानुसार घटती बढ़ती रहती है. इस समूह को मार्च 04 में सर्वाधिक 116 संदेश प्राप्त हुए.

  6. ई-बज़्म इंडियाटाइम्स.कॉम में समूहों को क्लब के नाम से जाना जाता है. ई-बज़्म इंडियाटाइम्स.कॉम का हिन्दी-उर्दू (देवनागरी) भाषा का क्लब है जहाँ पर सदस्य अपने हिन्दी-उर्दू के ग़ज़ल, नज्म, शेर, कविता, छंद, दोहे इत्यादि पोस्ट कर सकते हैं. ई-बज़्म की मौजूदा सदस्य संख्या 231 है तथा इसके सदस्य खासे सक्रिय हैं. पोस्टिंग रोमन तथा यूनिकोड हिन्दी में की जा सकती है.

  7. गाथा यह इंडियाटाइम्स का एक और सक्रिय हिन्दी समूह स्थल है जिसके वर्तमान में 48 सदस्य हैं. सितम्बर 2001 से प्रारंभ इस क्लब की सक्रियता मिली जुली है. यह समूह नवोदित लेखकों कवियों के लिये खासतौर पर बनाया गया है जहाँ वे अपनी रचनाओं को पोस्ट कर उस पर बहसें कर सकते हैं.

  8. चिट्ठाकार गूगल का यह हिन्दी समूह हिन्दी भाषा में ब्लॉग लिखने वालों के लिए बनाया गया है ताकि वे अपने ब्लॉगों को और बेहतर बना सकें. हालाँकि इस समूह में हिन्दी में रूचि रखने वाले या अपना हिन्दी ब्लॉग शुरू करने वाले भी जुड़ सकते हैं. इस समूह में पोस्टिंग रोमन लिपि या यूनिकोड
    हिन्दी में किया जा सकता है. वैसे प्रायः इसके सभी सदस्य यूनिकोड हिन्दी में
    संदेश प्रेषित करते हैं. यह समूह अति-सक्रिय तो नहीं है, परंतु ब्लॉग जगत के
    लोगों के लिए यह समूह अनिवार्य सा है.

  9. हिन्दी याहू समूहों की लोकप्रियता को देखकर गूगल ने भी अपने पोर्टल में समूहों का बीटा संस्करण प्रारंभ किया है, जो वर्तमान में शैशवावस्था में है. परंतु कालांतर में गूगल समूह सदस्यों को मिलने वाली सुविधाओं के मामले में श्रेष्ठ होंगे. गूगल का यह हिन्दी समूह हिन्दी पाठकों, लेखकों, कवियों सभी के लिए एक खुला मंच के रूप में बनाया गया है. अभी इसके 19 सदस्य हैं और यह कुछ कुछ सक्रिय है.

अब अगर इन सूचियों में आपके विचार के अनुसार कोई समूह नज़र नहीं आता है जिसमें आप जुड़ सकें, तो या तो याहू, गूगल या इंडियाटाइम्स के विभिन्न समूहों में जाकर 1500 हिन्दी समूहों में से अपने लिये कोई उचित हिन्दी समूह तलाश करें और फिर भी न मिले तो फिर एक नया हिन्दी समूह ही तैयार कर लें. बस फिर आप अपने आप को नए मित्रों के बीच पाएँगे.

एक और हिंदी ब्राउज़र
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लगता है सचमुच, प्यारी बहना हिंदी के दिन फिर गए हैं. विश्व का सबसे आधुनिक, सबसे ज्यादा सुरक्षित और सबसे ज्यादा तेज़ी से लोकप्रियता की ओर अग्रसर होता हुआ ब्राउज़र- मोज़िला फ़ायरफ़ाक्स 1.0 हिंदी में जारी किया जा चुका है.
इस मर्तबा भी, संयोग से इसके जारी करने वाले हैं छत्तीसगढ़ (पूर्व मध्यप्रदेश) के भिलाई-दुर्ग के पंकज ताम्रकार. इसके हिंदी अनुवाद में पंकज का सहयोग दिया है आसिफ इकबाल ने.

स्क्रीनशॉट देखें

इसी के साथ ही ई-मेल क्लाएंट मोजिला थंडरबर्ड (थंडरबर्ड नाम का तूफ़ानी पंछी अनुवाद शायद ठीक नहीं है पंकज भाई) भी हिंदी में जारी किया गया है.

पंकज को उनके इस गंभीर प्रयास के लिए हार्दिक बधाई. हिंदी अनुवाद में मात्रा की कुछ ग़लतियाँ तो हैं हीं जिन्हें फिर भी छोड़ा जा सकता है, परंतु अनुवादों में कई मेन्यू शब्दों को माइक्रोसोफ्ट तथा लिनक्स हिंदी से बिलकुल ही अलग, प्रायः सीधा अनुवाद दे दिया गया है जिससे इसके उपयोग में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है. उदाहरण के लिए, बुकमार्क को माइक्रोसोफ्ट तथा लिनक्स में पसंद तथा पसंदीदा शब्द दिया गया है, परंतु थंडरबर्ड में स्मरण संकेत. उम्मीद है, अगले संस्करणों में इस पर ध्यान दिया जाकर कम से कम मेन्यू शब्दों को एकसार रखने के प्रयास किए जाएंगे. और शायद तभी हिंदी का पूर्ण माहौल कम्प्यूटरों में लोकप्रिय हो सकेगा, नहीं तो भ्रम के कारण लोग इससे दूर ही रहेंगे.

अधिक जानकारी तथा डाउनलोड संबंधी जानकारी हेतु http://www.digi-help.com पर सैर करें.

कतरी हुई कतरनें
इस ब्लॉग में उपयोग की गई कतरनें प्रायः लोगों को रुचिकर प्रतीत होती हैं. हालाँकि इन कतरनों का प्रयोग संदर्भ वश किया जाता है, परंतु कभी-कभी कतरनों के मूल अवयव ज्यादा ही रोचक होते हैं. कुछ पाठकों ने कतरनों को अधिक स्पष्ट बड़े और पढ़े जा सकने लायक आकार में शामिल करने की मांग की है. बड़े आकारों के चित्रों को लिंक के रूप में देने की कोशिश रहेगी ताकि वेब पृष्ठ अनावश्यक रूप से भारी न हो जाए.

मैंने फ्लिकर, हैलो, पिकासा इत्यादि का उपयोग किया है तथा ये साइटें पता नहीं क्यों चित्रों को फिर से कॉम्प्रेस कर देती हैं जिससे कि वे स्पष्ट नहीं रह पाते. जो जोकर जैसा मेरा चित्र बाजू में दिख रहा है, वह फ्लिकर का किया धरा है. लोगों का कहना है कि मैं इस चित्र में जैसा दिखता हूँ उससे कहीं ज्यादा बेहतर दिखता हूँ :)

बड़े आकारों के सुस्पष्ट चित्रों को मुफ़्त होस्ट करने वाली अन्य उचित साइटों के बारे में अगर आपको पता हो तो कृपया मुझे खबर करें.

गाँव-देहात से आया हिंदी में ब्राउज़रः डांगीसॉफ़्ट आई-ब्राउज़र++


कौन कहता है कि आसमान में सूराख़ नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों. मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे, गंज बसौदा के रहने वाले जगदीप सिंग डांगी ने कम्प्यूटर जगत के आसमान पर वो पत्थर उछाला है, जिसके फलस्वरूप प्रकाश की जो किरणें फूट रही हैं, वे भारतीय कम्प्यूटर उपयोक्तताओं के कार्य के माहौल को आने वाले दिनों में न सिर्फ खासा प्रभावित करेंगी, आम ग्रामीण जन तक कम्प्यूटरों तथा जालघर की पहुँच को अति आसान भी बनाएँगी. और ग़ज़ब बात यह है कि एक साधारण से किसान के बेटे जगदीप भले ही थोड़े से फ़िजीकली चैलेन्ज्ड हैं, परन्तु मानसिक रूप से बिलकुल नहीं. उनके सभी सहपाठी इंजीनियर बंधु तक यह स्वीकार करते हैं कि जहाँ वे विभिन्न एमएनसीज् में अपना भविष्य बनाने में लगे हैं, निपट देहात में जन्मे-जमे जगदीप निःस्वार्थ भाव से जन-कल्याण के सॉफ़्टवेयर विकसित करने में लगे हैं. उनका सपना है हिंदी में आपरेटिंग सिस्टम तैयार करने का.

जगदीप ने गंज बसौदा जैसे छोटे से जगह में रहते हुए ही तीन वर्षों के अथक परिश्रम से हिंदी भाषा इंटरफेस युक्त एक वेब ब्राउज़र तथा हिंदी के कुछ अन्य अनुप्रयोग हिंदी वर्तनी जाँचक, डिज़िटल शब्दकोश, हिंदी सरल संपादक इत्यादि बनाए हैं. हिंदी वेब ब्राउजर डांगी सॉफ़्ट आई-ब्राउज़र++ का संपूर्ण इंटरफेस हिंदी भाषा में है. इसके अलावा इसमें अन्य खूबियाँ भी हैं. उदाहरण के लिए, यह इंटरनेट एक्सप्लोर के शक्तिशाली इंजन से तो चलता है, पर इसमें अन्य खूबियाँ भी हैं जो इंटरनेट एक्सप्लोरर में उपलब्ध नहीं हैं जैसे कि अँग्रेज़ी तथा हिंदी के अलग-अलग सर्च बार तथा स्वचालित हिस्ट्री प्रदर्शक. इस वेब ब्राउज़र में उपयोक्ता को हिंदी शब्द रूपांतरण की सुविधा तो मिलती ही है, 20320 शब्दों का शब्दकोश भी इसमें अंतर्निर्मित है, जिसकी सहायता से उपयोक्ता को अँग्रेज़ी भाषा के जालपृष्ठों को हिंदी में समझने में सहायता मिलती है. अँग्रेज़ी शब्दों के अर्थ के साथ-साथ उनके उच्चारण भी दिए गए हैं. साथ ही हिंदी के समानार्थी शब्दों को देकर इसे और भी समृद्ध बनाया गया है. यही नहीं, इसका शब्दकोश परिवर्तनीय, परिवर्धनीय भी है जिसे उपयोक्ता अपने अतिरिक्त शब्दों को सम्मिलित कर और भी समृद्ध बना सकता है. हिंदी ब्राउज़र के वर्ड ट्रांसलेटर की मज़ेदार खूबी यह है कि यह दोनों दिशाओं में कार्य करता है यानी हिंदी से अँग्रेज़ी तथा अँग्रेज़ी से हिंदी. इसका उपयोग आप स्थानीय रूप से आई-ब्राउज़र के भीतर तो कर ही सकते हैं, वैश्विक रूप से विंडोज के अन्य किसी भी अनुप्रयोगों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है. अगर आपको हिंदी टाइप करने में दिक्कत आती है, तो जगदीप ने उसका भी इंतजाम कर रखा है. इस हेतु वे ऑन स्क्रीन हिंदी कुंजी पटल प्रस्तुत करते हैं जिसकी सहायता से माउस क्लिक करके किसी भी विंडोज़ अनुप्रयोग में हिंदी भाषा में टाइप किया जा सकता है.

आई-ब्राउज़र++ विंडोज 9x से ऊपर के सभी संस्करणों पर चल सकता है.

आई-ब्राउज़र++ के हिंदी अनुप्रयोग उपयोग में आसान हैं. उदाहरण के लिए, ब्राउज़र के भीतर ही किसी भी अँग्रेज़ी / हिंदी के शब्दों को दायाँ क्लिक करने पर यह उसका उपलब्ध अर्थ, उच्चारण सहित तत्काल प्रदर्शित करता है. यह ब्राउज़र पारंपरिक हिंदी उपयोक्ताओं के लिए बहुत काम का है चूँकि यह फ़ॉन्ट एनकोडिंग के द्वारा कार्य करता है, अतः आप अपने एचटीएमएल / पाठ दस्तावेज़ों में इसके हिंदी सर्च फ़ील्ड में हिंदी शब्दों के आधार पर ही शब्दों को ढूंढ/बदल सकते हैं. यह लगभग सभी प्रकार के हिंदी फ़ॉन्ट्स जैसे कि नई दुनिया, शुशा, आकृति इत्यादि पर कार्य कर सकता है. हालाँकि आई-ब्राउज़र हिंदी में है परंतु यूनिकोड हिंदी में कार्य कर सकने की उपलब्धता विंडोज़ 2000 या विंडोज़ एक्सपी में ही उपलब्ध हो सकेगी. इस ब्राउज़र की एक खामी यह भी है विजुअल बेसिक की सहायता से बना होने के कारण वर्तमान में यह सिर्फ विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए उपलब्ध है. लिनक्स तथा अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए नहीं. जगदीप ने इस सॉफ़्टवेयर को अभी आम उपयोग के लिए जारी नहीं किया है. वे इसे जारी करने हेतु उचित प्लेटफॉर्म की तलाश में हैं ताकि उनका प्रयास अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच सके तथा कम्प्यूटरों का प्रयोग अँग्रेज़ी नहीं जानने वाले हिंदी भाषी भी आसानी से कर सकें.



करोड़ पति एमपी - एमएलए

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महाराष्ट्र के पिछले चुनाव में एक तिहाई एमएलए ऐसे विजयी हुए हैं जो करोड़ पति हैं. करोड़ो रुपयों की संपत्ति जो उन्होंने मजबूरन घोषित की है वह चुनाव आयोग की अनिवार्यता के कारण घोषित की है. भारत के मौजूदा एमपी के बारे में इंडिया टुडे, आउटलुक और इंडियन एक्सप्रेस जैसे समाचार पत्र पत्रिकाओं ने पहले ही प्रकाशित किया है कि इनमें से सौ से ऊपर ऐसे हैं जिनके ऊपर किसी न किसी वजह से मुक़दमे चल रहे हैं और कइयों पर तो हत्या जैसे गंभीर अपराधिक प्रकरण चल रहे हैं. वैसे भी अब एक चुनाव में लड़ने के लिए जहाँ लाखों रुपयों की आवश्यकता होती है, एक आम आदमी के किसी चुनाव में खड़ा होकर उसका जीत पाना अब असंभव हो गया है. ऐसी स्थिति में अगर हमारे एमपी और एमएलए करोड़ पति या बाहुबली नहीं होंगे तो और क्या होंगे. आम आदमी की स्थिति तो एक सच्चे वोटर की भी नहीं रह गई है. जब वह वोट देने जाता है तो पता चलता है कि उसका वोट तो कोई लठैत पहले ही डाल चुका है, या उस आम आदमी का वोट एक एद्धा दारू की बोतल में पहले ही बिक चुका है या फिर उस आम आदमी का वोट जाति, धर्म, क्षेत्रवाद ने पहले ही खरीद लिया है.
चलिए, कम से कम यह तो हुआ है कि वोटर चाहे गर्त में जाता जाए, प्रायः नेताओं - एमपी , एमएलए की जमात में खासी प्रगति हो रही है. भारत में प्रॉस्पैरिटी पाने के लिए नेता बनने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है. अभी तो एक तिहाई एमएलए ही करोड़ पति हैं, उम्मीद करें कि बाकी बेचारों का रहन सहन भी शीघ्र सुधरे और अगले चुनाव में हमें शत प्रतिशत एमएलए करोड़ पति मिलें. करोड़ पति ही क्यों अरब पति एमएलए मिलें. आमीन.
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ग़ज़ल
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नेता और वोटर की पोज़ीशन देखिए
जाति और धर्म के परमुटेशन देखिए

बीती है अभी तो सिर्फ अर्ध शताब्दी
नेताओं के पहरावों में प्रमोशन देखिए

आँसुओं से साबका पड़ा नहीं कभी
वोटरों को लुभाने के इमोशन देखिए

सियासती जोड़ तोड़ में माहिर उनके
मुद्दे पकड़ लाने के इग्नीशन देखिए

अपनी पाँच साला नौकरी में रवि ने
कहाँ कहाँ नहीं खाए कमीशन देखिए
.-.-.

रेडहैट लिनक्स हिंदी समेत 5 भारतीय भाषाओं में जारी
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रेडहैट का फेदोरा कोर 3, हिंदी समेत 5 भारतीय भाषाओं, यथा- बंगाली, पंजाबी, गुजराती तथा तमिल में जारी किया जा चुका है तथा यह संपूर्ण सर्वर ऑपरेटिंग सिस्टम अपने साथ ढेरों अन्य अनुप्रयोगों सहित मुफ़्त डाउनलोड हेतु अब यहाँ सेः http://fedora.redhat.com/download/mirrors.html उपलब्ध है. फेदोरा कोर 3 में प्रारंभिक संस्थापना स्क्रीन से लेकर प्रायः सभी प्रकार के अनुप्रयोगों तक पूर्णतः आपको भारतीय भाषा का वातावरण प्राप्त होगा. इसमें केडीई 3.2 , एक्सएफसीई 4.2 के लगभग सभी मॉड्यूल्स तथा साथ ही गनोम 2.8 सहित कुछ अन्य अनुप्रयोग जैसे कि गेम इंसटैंट मैसेंजर के प्रायः अधिकतर हिंदी अनुवादों का कार्य हमारी टीम ने किया है. यूँ इससे पूर्व रंगोली नाम से भारतीय भाषाओं का एक जीवंत लिनक्स सीडी का बीटा संस्करण भी जारी किया जा चुका है जिसमें ऊपर दी गई भाषाओं के अलावा मराठी, कन्नड़, मलयालम इत्यादि भाषाओं के आंशिक समर्थन भी हैं. उड़िया तथा तेलुगु भाषा में भी कार्य जोरों से जारी है. शायद लिनक्स में भारतीय भाषाओं की सक्रियता को देखते हुए माइक्रोसोफ्ट की भी नींद उड़ी है और वह भी अगले साल हिंदी में विंडोज़ एक्स पी का कम कीमत का स्टार्टर वर्जन निकालने जा रहा है, तथा उसने यह भी घोषणा की है कि अन्य 14 भारतीय भाषाओं में भी शीघ्र ही उसका संस्करण निकलेगा. डेबियन लिनक्स का संस्थापक भी अब हिंदी में अनुवादित किया जा चुका है और प्रारंभिक जाँच पड़ताल के बाद डेबियन में हिंदी समर्थन जारी होने की संभावना है. मेनड्रेक लिनक्स संस्थापक तो पहले से ही हिंदी में उपलब्ध है ही.
अब वह दिन आ गया है जब भारतीय कंप्यूटरों के संपूर्ण डेस्कटॉप वातावरण भारतीय भाषाओं में ही रहेंगे.
स्क्रीन शॉट देखें:
हिंदी में

मराठी में

बंगाली में

ਪੰਜਾਬੀ ਮੇੰ

ગુજરાતી મેં


ये तो उम्र का तक़ाज़ा है भाई…



बचपन में मैं इंद्रजाल कॉमिक्स पढ़ने में मज़ा लेता था. जैसे ही किशोरावस्था में कदम पड़े, रानू, गुलशन नंदा और मिल्ज़ बून की रोमांटिक किताबें मज़ा देने लगीं. पता नहीं कब इयॉन फ्लेमिंग, जेम्स हेडली चेईज़, इरविंग वैलेस (सेकेण्ड वूमेन तो अभी भी याद है), फ्रेडरिक फोरसाइथ और अपने शुद्ध देसी सुरेन्द्र मोहन पाठक तक कैसे पहुँच गया. इस बीच हंस, सारिका, प्रेमचंद, हरिशंकर परसाई, कुरआन शरीफ़, बाइबल, पुराण और पता नहीं क्या क्या बाँच डाले. और, प्रायः हर अलग अलग समय में इन चीज़ों को पढ़ने में बड़ा मज़ा आया. पर अब न कॉमिक्स, न रोमांटिक उपन्यास और न चेइज़ पढ़ा जाता है. अब तो कोई आई टी तकनॉलाज़ी से संबंधित कोई चीज आकृष्ट करती है या फ़िर ऊपर दी गई जैसी ग़ज़लें (माणिक वर्मा की लिखी ग़ज़ल (कविता?) जो नई दुनिया के दीपावली विशेषांक 2004 में छपी है.)

ग़ज़ल
*+*+*
माणिक वर्मा की ग़ज़लः
***+++***
जो सच बोले उसे सूली चढ़ा दो
ये तख्ती हर कचहरी में लगा दो

हमें दुनिया का नक्शा मत बताओ
हमारा घर कहाँ है ये बता दो

करो तुम कत्ल जब भी आस्था का
बजाकर शंख चीखों को दबा दो

यक़ीनन कल जलेगा घर में चूल्हा
ये वादा करके बच्चों को सुला दो

दीवाली आपके बच्चे भी देखें
ये माचिल लो हमारा घर जला दो

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ये भारतीय क़ानून हैं....

--**--**--

क़ानून के किस्से बड़े निराले हैं. कहा जाता है कि क़ानून अंधा होता है. यह भी कहा जाता है कि बड़े और पैसे वालों के लिए क़ानून नाम की कोई चीज़ नहीं होती. कुछ लोगों के अपने क़ानून होते हैं. कहीं क़ानून तो होता है, परंतु क़ानून के पालन हार ही उसे तोड़ते फ़िरते हैं. आज जीवन के हर क्षेत्र के लिए इतने क़ायदे क़ानून हो गए हैं कि हममें से हर कोई हर पग पर क़ानून तोड़ता चलता है. जब कोई नेता शासक बनता है तो विरोधियों को अंदर कर देता है और कहता है क़ानून अपना काम करेगा. जब वह विरोधी पार्टी में होता है तो चिल्लाता है कि क़ानून को शासकों ने बंधक बना लिया है और मनमाना क़ानून लगा रहे हैं. बहुत से क़ानून हैं जिसे हम आप रोज तोड़ते हैं पर खुदा का शुक्र है कि हम में से अधिकतर नेता नहीं हैं. अन्यथा या तो क़ानून के काम के कारण या तो अंदर होते या क़ानून को काम देने के नाते अपने विरोधियों को अंदर कर रहे होते.

बहरहाल, चर्चा भारत के एक विचित्र क़ानून की हो रही है. इसके लिए एक घटना सुनिए.
एक भारतीय व्यक्ति अपने विदेशी मेहमान की मेहमान नवाज़ी के लिए फ़ाइव स्टार होटल ले गया. ज़ाहिर है उन्होंने ख़ाने के साथ बियर का ऑर्डर दिया. बेयरा बियर की एक बोतल और सिर्फ एक गिलास लेकर आया. यह सोच कर कि बेयरे से अनजाने में यह गलती हो गई होगी, और इसे अन्यथा न लेते हुए भारतीय ने अपनी बियर पानी के गिलास में डाली. पर बेयरा दौड़ते हुए आया और बोला - साहब जी, आप हमारे होटल का भट्ठा मत बिठाइयेगा. आज ड्राइ डे है और उस दिन क़ानूनन किसी भारतीय को शराब नहीं परोसी जा सकती. किसी विरोधी पार्टी को पता चल गई तो इस बात पर हम अंदर हो जाएंगे और हमारा लाइसेंस रद्द हो जाएगा. हम आप से माफ़ी चाहते हैं. भारत में विशेष अवसरों पर ड्राई डे होता है. यानी उस दिन शराब बिक्री पर प्रतिबंध होता है. पर यह प्रतिबंध सिर्फ भारतीयों के लिए होता है. विदेशियों के लिए नहीं. हो सकता है कि आपको इस कहानी में कुछ अतिशयोक्ति दिखाई दे, परंतु यह भी सच है कि ड्राई डे के दिन औसत से ज्यादा शराब बिकती है. क़ानूनन शराब नहीं बेची जा सकती अतः एक दो पैग शराब आपको होटलों या बार में नहीं मिलेगी. परंतु टाउट्स आपको अद्धा पौवा और बोतल हर जगह, थोड़े से ज्यादा पैसे में बेचते मिलेंगे. फिर शराब बंदी के दिन लोगों को जरा ज्यादा ही तलब लगती है. चुनावों के ऐन दो दिन पहले से ड्राइ डे डिक्लेयर हो जाता है परंतु हम सब को पता है कि जब तक जम कर बोतलों की सप्लाई नहीं होती है, चुनाव का अंतिम चरण पूरा नहीं होता है. एक और क़ानून है जिसमें आप 21 (महिला के लिए 18) साल के होने पर शादी तो कर सकते हैं, परंतु दारू पीने के लिए आपको 25 साल का होना पड़ेगा, नहीं तो पुलिस क़ानून के तहत आपको जेल में बंद कर सकती है. पीने वाले को भी और पिलाने वाले को भी.

ऐसा ही एक भारतीय क़ानून है जिसमें किसी विशेष अवसर पर जैसे कि गांधी जयंती इत्यादि पर मांस विक्रय पर प्रतिबंध रहता है. बेचारे मछुआरे और कसाई जो ले दे कर अपना पेट पालते हैं उन्हें उस दिन अपना कारोबार जबर्दस्ती बंद रखना पड़ता है. शायद देश के क़ानून बनाने वालों को अब तक यह जानकारी नहीं है कि दूध और घी भी रासायनिक रूप से एनिमल प्रोटीन और फैट (पशु मांस) ही हैं...

ये भारतीय क़ानून हैं....
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ग़ज़ल
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बनते बिगड़ते नित्य नए क़ानून हैं
कुछ के लिए नहीं कहीं क़ानून हैं

चले कैसे कोई इस पथ पर अविराम
पग पग पर कई कई तो क़ानून हैं

सियासती लोग खुश हैं तो दरअसल
बनाए उन्होंने अपने लिए क़ानून हैं

धन बल पर निकलती हैं व्याख्याएँ
शायद इसीलिए अंधे सभी क़ानून हैं

जमाने में आ के रो नहीं सका रवि
सच बात न कहने के जो क़ानून हैं

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इंडीब्लॉग अवॉर्ड 2004
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भारतीय तथा भारत से जुड़े अंग्रेजी भाषा में तथा भारतीय भाषाओं में लिखे जाने वाले ब्लॉगों के लिए इस साल के इंडीब्लॉग अवॉर्ड के लिए तैयारियाँ ज़ोरों से चल रही हैं. (धन्यवाद इंडीब्लॉगी, आपके तारीफ़े काबिल प्रयास के लिए :). तो दोस्तों आप भी कमर कस कर मैदान में कूद पड़िए. आखिर आपके ब्लॉग में भी तो कोई न कोई अवॉर्ड पाने की खासियत मौजूद है ही और वैसे भी आपका ब्लॉग किसी से कम है क्या? ऊपर से इंडीब्लॉग में दर्जन भर से ज्यादा वर्ग/श्रेणियाँ हैं जिन में अवॉर्ड दिया जाना है. अतः आपके ब्लॉग को कोई न कोई अवॉर्ड मिलने की पूरी संभावना है. न भी मिले तो क्या, ओलंपिक की तरह इसमें भी शामिल होना ज्यादा महत्वपूर्ण है, बजाय इनाम प्राप्त करने के.
अवॉर्ड में शामिल होने के अलावा आप यह भी कर सकते हैं:

** आप चाहें तो अवॉर्ड के लिए जूरी मेम्बर बन सकते हैं
** आप चाहें तो कोई पुरस्कार प्रायोजित कर सकते हैं
** आप चाहें तो अपना स्वयं का या किसी अन्य ब्लॉग के लिए केनवासिंग कर सकते हैं – इसके लिए जूरी सदस्यों को ई-मेल करना होगा.
** आप अन्य इंडियन ब्लॉगर्स को इसके बारे में बता सकते हैं

अधिक जानकारी के लिए इंडीब्लॉग का वेब पृष्ठ देखें
तो आइए इंडीब्लॉग एवॉर्ड 2004 को सफल बनाएँ

भारत में अमीर-ग़रीब सब बराबर



विश्व प्रसिद्ध कार्टूनकार आर. के. लक्ष्मण का एक कार्टून 22 नवंबर के अंक में छपा है.

वे अपने पैने व्यंग्य की कूची चलाते हुए स्पष्ट करते हैं कि भारत में क्या अमीर क्या ग़रीब सब

बराबर हैं. सभी भुगतने के लिए अभिशप्त हैं. ग़रीब रोटी कपड़ा मकान की समस्या से त्रस्त

है तो अमीर पावर कट, लोड शेडिंग, गड्ढे और धूल युक्त सड़कों, ट्रैफिक जाम, पानी की

कमी, स्कैम इत्यादि समस्याओं से त्रस्त है.

समाजवादी / साम्यवादी लोगों को खुश होना चाहिए कि कम से कम भुगतने के मामले में तो

भारत में सभी बराबर हैं. अमीरी-ग़रीबी का फ़र्क़ वास्तव में यहाँ मिट गया है.

पर, अगर कोई फ़र्क़ कहीं नज़र आता है तो वह राजा और रंक (बक़ौल अमिताभ बच्चन) के

बीच है. और यह फ़र्क़ दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है.
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ग़ज़ल
**//**
आदमी है आदमी के पीछे बराबर
सोचता नहीं होना है हिसाब बराबर

चाँदी का चम्मच ले के आया पर
चार दिन की जिंदगी सबकी बराबर

रत्न जटित ताबूत है तो क्या हुआ
भीतर कीड़े और दुर्गंध सभी बराबर

सच है कि अपने आवरणों के अंदर
कहीं कोई फ़र्क़ नहीं है बाल बराबर

काल को तुम भूल गए रवि शायद
कल दुर्ग था आज मैदान बराबर

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या भगदड़ में भारत?



नई दिल्ली के रेल्वे स्टेशन पर पिछले दिनों जन साधारण एक्सप्रेस ट्रेन में चढ़ने उतरने के

दौरान मची भगदड़ में आधा दर्जन व्यक्तियों की मौत हो गई तथा कई गंभीर रूप से घायल हो

गए. जाहिर है, ऐसे भगदड़ में मरने तथा घायल होने वालों में अधिकतर महिलाएँ एवं बच्चे

ही थे.
भारत में भगदड़ कोई नई बात नहीं है. हर जगह भगदड़ मची रहती है. चाहे वह रेल्वे स्टेशन

हो, हवाई अड्डा हो या फिर मरीन ड्राइव. जहाँ भीड़ है, और सुविधाओं का अभाव हो वहाँ

भगदड़ तो मचेगी ही.
फिर नई दिल्ली, जो भारत देश की राजधानी है, वहाँ के रेल्वे स्टेशन पर भगदड़ मचना इस

बात की गवाही देता है कि यहाँ की जनता किस हाल में गुज़र बसर करने को अभिशप्त है. नई

दिल्ली रेल्वे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर आपको कहीं भी सूचना पट्ट देखने को नहीं मिलेंगी जो

बताएँगी कि कौन सी ट्रेन किस समय पर और कब उस पर आएगी और जाएगी. सुविधाओं का

घोर अभाव है. भीड़ नियंत्रित करने का कोई प्लान ही नहीं है. ऐसे में भगदड़ तो मचना ही

है.
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ग़ज़ल
*/*/*
क्या मिलना है भगदड़ में
जीना मरना है भगदड़ में

मित्रों ने हैं कुचले हमको
अच्छा बहाना है भगदड़ में

लूटो या खुद लुट जाओ
यही होना है भगदड़ में

जीवन का नया वर्णन है
फँसते जाना है भगदड़ में

तंग हो के रवि भी सोचे
शामिल होना है भगदड़ में
++//--

एअरपोर्ट का अपहरण
**********


बैंगलोर में एक अंतर्राष्ट्रीय एअरपोर्ट बनाए जाने की योजना पिछले दस साल (जी हाँ,

पिछले दस साल !) से चल रही है, और अभी भी मामला विभिन्न सरकारों और

सरकारी विभागों की स्वीकृति की प्रतीक्षा में उलझा पड़ा है. तारीफ़ की बात तो यह है कि

कर्नाटक की पिछली काँग्रेस सरकार ने इस परियोजना को स्वीकृति दे दी थी, परंतु नई

सरकार जो काँग्रेस की ही है (क्या बात करते हैं, मंत्री तो बदल गए हैं न भाई), इस

परियोजना की स्वीकृति पर पुनर्विचार कर रही है !
इस परियोजना की शीघ्र स्वीकृति के लिए इन्फ़ोसिस के नारायण मूर्ति भी लगे रहे हैं.

उनके प्रयासों से इसमें थोड़ी गति भी आई, परंतु और भी कई अन्य परियोजनाओं की

तरह यह भी हाईजैक हो गया राजनीतिबाजों, अफसरशाहों और लालफ़ीताशाहों के द्वारा.

परियोजनाओं पर विचार और पुनर्विचार करते-करते ये अपहृत हो जाते हैं और भारत का

इन्फ्रास्ट्रक्चर जहाँ का तहाँ पड़ा रह जाता है- ठस. भूले भटके कभी कोई परियोजना पूरी

होती भी है तो वह भ्रष्टाचार के चलते लड़खड़ाती / दम तोड़ती ही चलती है...

**--**
ग़ज़ल
**+**
मूल्यों में गंभीर क्षरण हो गया
मुल्क का भी अपहरण हो गया

भ्रष्ट राह में चलने न चलने का
सवाल ये जीवन मरण हो गया

बचे हैं सिर्फ सांपनाथ नागनाथ
पूछते हो ये क्या वरण हो गया

हँसा है शायद दीवाना या फिर
भूल से तो नहीं करण हो गया

रवि बताए क्यों कि ढोंगियों का
वो एक अच्छा आवरण हो गया
*-*-*

आइए, थोड़ी पूजा-अर्चना करें
*****


पहले मिग 21 और अब मिराज विमानों के दुर्घटना ग्रस्त होने की अधिक संख्या को देखते

हुए एअरफोर्स द्वारा पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठान करवाया जा रहा है, ताकि ऐसी वारदातों

को, प्रभु की कृपा से रोका जा सके.

वाह भाई क्या बात है. फ़्लाइट इंजीनियर प्रभु से प्रार्थना करता होगा कि हे प्रभु, आज मैंने

अपनी व्यस्तता के कारण मिराज का आवश्यक मेंटेनेंस नहीं किया है, अतः कृपा करना,

आज दुर्घटना नहीं होने देना. खरीदी विभाग का चीफ़ प्रार्थना करता होगा कि हे दयालु प्रभु

तूने अब तक विभिन्न खरीदी में कमीशन पाने में साथ दिया है, अब डुप्लीकेट पार्ट्स के साथ

विमानों को बढ़िया उड़ने में मदद करना.

मैं अपना एक अनुभव बताता हूँ. कुछ समय पूर्व की बात है जब 11 किलो-वोल्ट के कुछ

सर्किट ब्रेकर्स के कॉन्टेक्ट्स बुशिंग के साथ ही ज्यादा संख्या में, अकारण ही जलने लगे थे.

सब तरह की जाँच के बाद भी कुछ पता नहीं चल पा रहा था कि कॉन्टेक्ट्स क्यों भीषण गर्म

होकर जलने लगे हैं. बारीकी से छानबीन की गई तो पाया गया कि एक खास बैच के

कॉन्टेक्ट्स में ये समस्या है. तह में उतरा गया तो पाया गया कि लोहे के पार्ट्स के ऊपर

कॉपर का मुलम्मा पहना कर कॉन्टेक्ट्स की सप्लाई की गई थी, जिस वजह से वे परीक्षण में

तो असल प्रतीत होते थे, परंतु हाई रेजिस्टेंस के कारण अतिउच्च करेंट पर तीव्रता से गर्म

होकर जल जाते थे. और, क्या आप जानते हैं, उस वक्त नया कॉन्टेक्ट लगाते वक्त क्या

किया जाता था ? पूजा की जाती थी, नारियल फोड़ा जाता था कि ईश्वर, मदद करना.

ब्रेकर को बढ़िया चलने देना, जलाना नहीं....

आइए, हम भी इबादत करें कि हे प्रभु, हमारे मिग-मिराज के साथ-साथ मासूम पायलटों

की भी रक्षा करना, आखिर भ्रष्टाचार की अधिकता वाले देशों की सूची में उच्च स्थान पर रहने

वाले भारत की रक्षा तो आप कर ही रहे हैं...

***
ग़ज़ल
---

गले में फाँस हो इबादत कीजिए
मन में पाप हो इबादत कीजिए

बहुत बेरहम हो गई ये दुनिया
रस्ते चलते हो इबादत कीजिए

गड्ढे जाम ट्रैफ़िक पुलिसिया
बच निकले हो इबादत कीजिए

पल भर जीना जहाँ मुश्किल
गुज़ारे दिन हो इबादत कीजिए

कुछ करने से बेहतर है रवि
कार्य सफल हो इबादत कीजिए

*+*+*+

मेड फॉर इंडिया, रीयली?
***********


नोकिया ने अपने आर एंड डी टीम में अरबों डालर निवेश कर भारतीय परिवेश के लिए

अलग प्रकार का सेलफ़ोन ईज़ाद किया है. यह सेलफ़ोन टॉर्च लाइट युक्त है ताकि भारतीय

घनघोर अंधियारा में खासा काम आ सके. इसमें धूल सुरक्षा भी है ताकि भारत के सर्वत्र

अत्यंत धूल भरे इलाकों में यह सुरक्षित रह कर काम कर सके. इसमें ना फिसल ग्रिप

भी है, ताकि चोर उचक्कों की छीना झपटी से सुरक्षा मिल सके. भाई वाह ! क्या

बात है. पर कुछ और ऐसी ही ईज़ादें भारतीयों के लिए हो जाए तो मज़ा आ जाए.
मेरी कुछ इच्छाएँ (विश लिस्ट) हैं –

1 ऐसे वाहन ईज़ाद किए जाएँ जो गड्ढों युक्त, भीड़ भरे, जाम लगे भारतीय सड़कों पर

भी फर्राटा से दौड़ सकें, तथा घासलेट, कुकिंग गैस, नेफ्था, साल्वेंट इत्यादि (वैसे

भी ये पेट्रोल/डीज़ल/सीएनजी में तो धड़ल्ले से मिलाए ही जाते हैं) से भी चल सकें.

2 ऐसी घड़ियाँ बनाई जाएँ जो इंडियन स्टैंडर्ड टाइम का लिहाज रखें. यानी की किसी

समारोह के उद्घाटन पर नियत समय पर या किसी नेता के लंबे उबाऊ भाषण पर वह रूक

जाए जब तक कि उद्धाटन न हो जाए और भाषण समाप्त न हो जाए ताकि लोगों को यह

आभास न हो कि वे लेट हो रहे हैं.

3 ऐसी वेंडिंग मशीनें बनाकर हर दस कदम पर लगाई जाएँ जहाँ प्रतिदिन आम भारतीय

घर से निकलने से पूर्व विभिन्न सरकारी विभागों को दिया जाने वाला घूस का पैसा जमा

कर उस दिन के लिए टिकट निकाल सके जिसे वह जगह जगह दिखा कर (कि उसने

आज का अपना हिस्सा जमा कर दिया है,) अपना कार्य निपटा सके.....

4 यूँ तो सूची खासी लंबी है, परन्तु सूची क्र. 2 की वस्तु अभी बनाई नहीं गई है,

अतः फिर कभी...

दोस्तों, अगर आपको भी कुछ सूझ रहा हो तो लिख दीजिए अपनी इच्छा सूची भी अपनी

टिप्पणी के रूप में..

चोला राम का दिल रावण रावण
यही है रवि हाहाकारी असलियत




भाग 1 में मैंने बोहरा समाज के धर्मगुरु का परिवार मुम्बई के कामा हाउस को 1 अरब से अधिक रुपयों में खरीदे जाने के बारे में लिखा था. वह तो भला हो कुछ समाचार पत्रों का जिसमें इस विवादास्पद सौदे का हल्ला मचा और वह रद्द हो गया. भाग 2 तो और भी कलंकित है. काँची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य को हत्या के अपराध में मुख्य अभियुक्त क्रमांक 1 के रूप में विगत दिनों गिरफ्तार किया गया. मामला पीठ के पाँच हजार करोड़ रूपयों से अधिक की सम्पत्ति का है, जिसके दुरुपयोग के बारे में मृतक बरसों से शंकराचार्य पर उंगली उठाते रहे थे.

मैं फिर से एक बार कहना चाहूँगा कि ये धार्मिक गुरु चाहे जिस पंथ, रीति और धर्म के हों, वे खतरनाक परजीवी हैं जो समग्र विश्व को चूसकर उसके विकास में बाधा डालते रहे हैं. उम्मीद करते हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ इनकी असलियत को पहचान लेंगीं.

ग़ज़ल
****
खुद की नहीं पहचानी असलियत
तलाश में हैं औरों की असलियत

यहीं तो है उस लोक की हकीकत
जनता कब पहचानेगी असलियत

मत मारो उस दीवाने को पत्थर
पहले देख लो अपनी असलियत

ईश्वर तो मौज़ूद है तेरे कर्मों में
रे मूरख पहचान तेरी असलियत

चोला राम का दिल रावण रावण
यही है रवि हाहाकारी असलियत

उल्टा पुल्टा इंडिया
********
जग सुरैया ने टाइम्स ऑफ इंडिया (नवंबर ७, २००४) में इंडिया के बारे में काफी कुछ लिखा है. जग सुरैया पत्रकारिता से ताउम्र जुड़े रहे हैं और उन्होंने विश्व के तमाम देशों की यात्राएँ भी की हैं. अपने अनुभवों को वे बेबाकी से लिखते रहे हैं. उस लेख का छोटा सा हिस्सा प्रस्तुत हैः

इंडिया उल्टा पुल्टा देश है. यहाँ की हर चीज उल्टी पुल्टी है. विश्व के अन्य प्रजातंत्रों में प्रजा शासकों को चुनती है ताकि प्रजा खुशहाल हो सके. इंडिया में प्रजा शासकों को चुनती है ताकि शासक, प्रजा के खर्चे से खुशहाल हो सकें. अन्य जगह पानी, बिजली, स्कूलों और हस्पतालों की व्यवस्था हर एक की सुगम पँहुच में हो इस पर ध्यान दिया जाता है. इंडिया में इन यूटिलिटीज़ को गोली मारो, अपना हिस्सा पार करो का नारा चलता है. अन्य जगहों पर सिस्टम इस लिए चलता है चूंकि वहाँ सिस्टम मौज़ूद है और हर व्यक्ति उससे बंधा है- चाहे लाइन में लगना हो, रास्ते पर चलना हो, टैक्स जमा करना हो... पर अरबों की जनसंख्या वाले देश इंडिया में तो सिस्टम है ही नहीं फालों क्या करें, वह भी तब जब इंडिया का हर बंदा अपने कर्मों से बंधा है!

***
ग़ज़ल
***

यहाँ तो हर बात उल्टे पुल्टे हैं
जीने के हालात उल्टे पुल्टे हैं

मेरा ईश तेरा खुदा उसका ईशु
कैसे ये ख़यालात उल्टे पुल्टे हैं

बावरे नहीं हैं अवाम दरअसल
शहर के नियमात उल्टे पुल्टे हैं

जेल में होती है पप्पुओं की जश्न
मुल्क के हवालात उल्टे पुल्टे हैं

चैन और नींद से महरूम रवि
उसके तो दिनरात उल्टे पुल्टे हैं

****

जालघर के अँग्रेज़ी -हिंदी शब्दकोश



पढ़ने लिखने के लिए कंप्यूटरों पर हमारी निर्भरता बढ़ती ही जा रही है.

निकट भविष्य में अधिसंख्य जन, प्रायः अधिसंख्य कार्यों हेतु, अधिसंख्य समय
कंप्यूटरों का ही उपयोग करने लगेंगे. अच्छे लेखन के लिए तथा लिखे हुए को अच्छे ढंग

से समझने के लिए प्रायः शब्दकोशों की आवश्यकता होती है. अब चूंकि हम अपने कार्य
कंप्यूटर पर ही करने लगे हैं, तो फिर मोटे-मोटे शब्दकोशों के पन्ने पलटने आवश्यकता

कतई नहीं है. अब आपके कंप्यूटर पर ही ढेरों, विभिन्न भाषाओं के शब्दकोश और समांतर
कोश उपलब्ध हैं. कंप्यूटर पर उपलब्ध संस्थापन योग्य तथा ऑनलाइन शब्दकोशों के द्वारा

शब्दों को ढूंढा जाना न सिर्फ आसान होता है, वरन कई प्रकार के सहायक अनुप्रयोगों
यथा ‘काट तथा चिपका’ इत्यादि का उपयोग कर अपने कार्य को और भी आसान बनाया जा सकता

है. हिंदी भाषा के लिए कुछ समय पूर्व तक जालघर में तथा कंप्यूटर पर संस्थापन योग्य
अँग्रेज़ी-हिंदी-अँग्रेज़ी शब्दकोश इक्का-दुक्का ही उपलब्ध थे. परंतु अब स्थितियाँ

तेजी से बदली हैं और आज हमारे पास बहुत से विकल्प उपलब्ध हैं, और प्रायः हर
प्लेटफॉर्म चाहे विंडोज़9x / विंडोज़-एक्सपी हो या लिनक्स, के लिए अँग्रेज़ी-हिंदी

शब्दकोश उपलब्ध हैं. आइए कुछ ऐसे ही हिंदी के मुक्त शब्दकोश कंप्यूटर प्रोग्रामों
तथा ऑनलाइन औज़ारों के बारे में चर्चा करते हैं और देखते हैं कि अपने लिए क्या

उपयुक्त है.

उपयोग के लिए अँग्रेज़ी हिंदी शब्दकोश निम्न रूपों में उपलब्ध हैं:

1 कंप्यूटर में संस्थापन योग्य प्रोग्रामः



जहाँ कुछ व्यावसायिक अँग्रेज़ी - हिंदी शब्दकोश प्रोग्राम विंडोज़ प्लेटफॉर्म में
संस्थापन कर उपयोग में लिए जाने हेतु उपलब्ध हैं. वहीं कुछ ऐसे ही मुक्त प्रोग्राम

भी उपलब्ध हैं. व्यवसायिक प्रोग्राम जहाँ अनेक गुणों से युक्त हैं तथा उच्चारण,
व्याकरण, वाक्य विन्यास इत्यादि भी बताते हैं, मुक्त प्रोग्राम सीधे, सपाट होने के

बावजूद अच्छे और उपयुक्त हैं. विंडोज़ प्लेटफॉर्म के लिए एक मुक्त प्रोग्राम


फ्रीलेंग डिक्शनरी
के नाम से उपलब्ध है तथा इसी प्रोग्राम का कुछ

अतिरिक्त

हिंदी-अँग्रेज़ी शब्दों का डाटाबेस
भी मुक्त उपयोग हेतु उपलब्ध है. इस
प्रोग्राम में हिंदी अर्थ रोमन लिपि में ही दिए गए हैं. इस प्रोग्राम में यह भी

सुविधा है कि आप अपने शब्दकोश के डाटाबेस में सुविधानुसार परिवर्तन / परिवर्धन कर
सकते हैं. आम उपयोग के प्रायः सभी शब्द तो इसमें मिल जाते हैं, परंतु फिर भी यह

शब्दकोश अभी उतना उन्नत नहीं है.

2 डाउनलोड योग्य शब्दकोश फ़ाइलें:

जालघर में अँग्रेज़ी-हिंदी-अँग्रेज़ी तथा अन्य भाषाओं की शब्दकोश फ़ाइलें डाउनलोड कर

मुक्त उपयोग में लेने हेतु भिन्न रूपों में उपलब्ध हैं. इन फ़ाइलों की खासियत यह है
कि आप इन्हें किसी भी प्लेटफॉर्म में उपयोग कर सकते हैं. उदाहरण के लिए एचटीएमएल,

टेक्स्ट तथा पीडीएफ़ शब्दकोश फ़ाइलों को आप क्रमशः किसी भी ब्राउजर, पाठ संपादक या
पीडीएफ़ फ़ाइल प्रदर्शक के द्वारा विंडोज़ / लिनक्स के किसी भी संस्करण में उपयोग

में ले सकते हैं. इन फ़ाइलों में शब्दकोश प्रोग्रामों की तरह शब्दों को ढूंढने की
ठीक-ठीक सुविधा तो नहीं मिल पाती है, परंतु फिर भी शब्द अकारादि क्रम में होने के

कारण उन्हें ढूंढने में ज्यादा कठिनाई भी नहीं होती. हाँ इतना अवश्य होता है कि ये
फ़ाइलें काफ़ी बड़ी होती हैं (300-400 पृष्ठों से अधिक) अतः इन्हें लोड होने में

आरंभिक समय अधिक लग सकता है. कुछ अच्छे अँग्रेज़ी हिंदी शब्दकोश फ़ाइलों के विवरण
निम्न हैं जिन्हें उनके साथ दिए लिंक को क्लिक कर डाउनलोड किया जा सकता हैः


हिंदी-अँग्रेजी का एक सरल सा शब्दकोश


पीडीएफ़ फ़ॉर्मेट
में उपलब्ध है जिसे



यहाँ
से भी डाउनलोड किया जा सकता है. पीडीएफ़ फ़ॉर्मेट में आपको यह
सुविधा मिलती है कि आपको हिंदी भाषा के फ़ॉन्ट इत्यादि की समस्याओं से जूझना नहीं

पड़ता. यही शब्दकोश


पोस्टस्क्रिप्ट फ़ॉर्मेट
में तथा


आईट्रान्स
रूप में भी उपलब्ध है जिन्हें सुविधानुसार डाउनलोड कर उपयोग

किया जा सकता है.

अन्य कई फ़ाइल फ़ॉर्मेट
में भी यही शब्दकोश आपकी सुविधा के लिये उपलब्ध

किया गया है. यह एक उन्नत शब्दकोश है जो शब्दों से संपन्न है. एक अन्य हिंदी
अंग्रेज़ी शब्दकोश


शब्दांजलि
के नाम से जारी किया गया है जिसमें भी शब्दों का अच्छा खासा
संग्रह है. यह शब्दकोश



ऑनलाइन
उपयोग हेतु भी उपलब्ध है. परंतु इसे देखने या इसका उपयोग करने
हेतु आपको अपने कंप्यूटर पर इस्की प्लगइन तथा आवश्यक फ़ॉन्ट संस्थापित करना होगा,

जिनके लिंक शब्दांजलि के जालघर पर उपलब्ध हैं. बनस्थली के मूल अँग्रेज़ी हिंदी
शब्दकोश का

यूनिकोड हिंदी

एचटीएमएल में परिवर्तित शब्दकोश

 इंडिकट्रांस के जालघर पर भी उपलब्ध है. अगर आप यूनिकोड हिंदी में
कार्य करते हैं तो यह शब्दकोश आपके लिए खासा सहायक होगा. यह शब्दकोश अँग्रेज़ी के

सही उच्चारणों को भी बताता है. एक अन्य शब्दकोश


अँग्रेज़ी-हिंदी-उर्दू
शब्दसूची के नाम से उपलब्ध है जिसमें उर्दू

शब्दों को भी समाहित किया गया है.

3 ऑनलाइन शब्दकोशः

कंप्यूटर में संस्थापन योग्य / फ़ाइल शब्दकोशों में यह सुविधा मिलती है कि इंटरनेट

से कनेक्ट हुए बिना ही उनका उपयोग किया जा सकता है. परंतु अगर आपके पास इंटरनेट
कनेक्टिविटी की अच्छी सुविधा है, तो ऑनलाइन शब्दकोशों का उपयोग अधिक उपयुक्त होगा.

ऑनलाइन शब्दकोश नित्य नए-नए शब्दों का समावेश तो करते ही हैं, आपको नई सुविधाएँ,
नए, सरल तरीके भी प्रदान करते हैं. अँग्रेज़ी-हिंदी-अँग्रेज़ी के कई अच्छे ऑनलाइन

शब्दकोश आपके उपयोग के लिए उपलब्ध हैं. जिसमें कुछ प्रमुख हैं

वर्डएनीव्हेयर

जहाँ आप एक साथ कई भाषाओं के शब्दकोशों का लाभ ले सकते हैं. इसका इंटरफेस

आसान है. बस वांछित शब्द को इसके इनपुट बक्से में भरिए, भाषाएँ नियत करिए और ‘गो’

बटन पर क्लिक करिए. थोड़े से अंतराल में वांछित शब्द का अर्थ प्रकट हो जाएगा. अभी
यह हिंदी को रोमन में प्रदर्शित करता है. संभवतः हिंदी के फ़ॉन्ट इत्यादि समस्या से

बचने तथा प्लेटफ़ॉर्म उपयुक्तता के लिए. एक अन्य ऑनलाइन शब्दकोश


डिजिटल डिक्शनरीज़ ऑफ़ साउथ एशिया
के नाम से है, जो आपको शब्दों को

भिन्न प्रकार से ढूंढने में भी सहायता प्रदान करता है. यहाँ आप शब्दों को उसके
प्रारंभिक अंतिम या मिश्रित अक्षरों द्वारा ढूंढ सकते हैं. इस साइट पर यूनिकोड (तथा

उसके बगैर भी) पर काम करने की सुविधा है. एक ऑनलाइन अँग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोश


यूनिवर्सल वर्ड हिंदी लेक्सिकन
आईआईटी मुम्बई के द्वारा उपलब्ध कराया

गया है जिसे कि मूलतः मशीन आधारित हिंदी से अँग्रेज़ी मे अनुवाद हेतु तैयार किया
गया है. इसे हिंदी भाषा के विश्वकोष के रूप में


हिंदी शब्दतंत्र

 के नाम से विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है. वर्तमान में इसके

शब्दकोश में 91 हजार से भी ज्यादा अंग्रेज़ी शब्दों के हिंदी में अर्थ दिए गए हैं.
व्यवसायिक रूप में जारी अक्षरमाला अँग्रेज़ी-हिंदी शब्दकोश का मुक्त


ऑनलाइन संस्करण

 भी उपलब्ध है.


शब्दकोश डाट कॉम
के नाम से एक विशुद्ध अँग्रेज़ी-हिंदी ऑनलाइन शब्दकोश

भी अपने सरल इंटरफेस सहित जालघर में आपके मुक्त उपयोग हेतु उपलब्ध है.

अब, आपका प्रश्न होगा कि भई, गाली गलौज, अप्रिय भाषा का भी कोई शब्दकोश है? तो, जी

हाँ, जालघर पर वह भी उपलब्ध है. विश्व की तमाम अन्य भाषाओं सहित अपनी खालिस हिंदी (रोमन

लिपि) में भी, वैकल्पिक शब्दकोश (
आल्टरनेटिव डिक्शनरीज़
) के रूप में. तो, अबकी, यदि आपको किसी का कहा

सुना समझ नहीं पड़े, तो सीधे रूख करिएगा इन शब्दकोशों की ओर.

 


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